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General Science
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जीन विनिमय (Crossing Over) और आनुवंशिक विविधता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जीन विनिमय की प्रक्रिया अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की पैकीटीन (Pachytene) उप-अवस्था के दौरान समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच खंडों के आदान-प्रदान के फलस्वरूप होती है।
  2. 2. इस जैव-रासायनिक प्रक्रिया को उत्प्रेरित करने के लिए 'रेकॉम्बिनेज' (Recombinase) नामक विशिष्ट एंजाइम की सक्रियता अनिवार्य होती है, जो डीएनए स्ट्रैंड्स को काटने और पुनः जोड़ने का कार्य करता है।
  3. 3. जीन विनिमय के स्थल पर समजात गुणसूत्रों के बीच बनने वाली X-आकार की संरचनाओं को 'कियास्माटा' (Chiasmata) कहा जाता है, जिनका निर्माण पैकीटीन अवस्था में ही हो जाता है किंतु उनका स्पष्ट अंतर्संक्रमण और पृथक्करण डायकाइनेसिस (Diakinesis) अवस्था में समाप्त होता है।
  4. 4. क्रॉसिंग ओवर की आवृत्ति (Frequency) दो जीनों के बीच की भौतिक दूरी के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely proportional) होती है, अर्थात् जितने पास जीन होंगे, क्रॉसिंग ओवर की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

जीन विनिमय (Crossing Over) लैंगिक जनन करने वाले जीवों में आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) का एक प्रमुख स्रोत है। यह अर्धसूत्री विभाजन-I की पैकीटीन (Pachytene) अवस्था में समजात गुणसूत्रों के नॉन-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच होता है और इसे 'रेकॉम्बिनेज' (Recombinase) एंजाइम उत्प्रेरित करता है। पैकीटीन में 'कियास्माटा' (Chiasmata) का निर्माण शुरू होता है और डायकाइनेसिस में 'टर्मिनलाइजेशन' (Terminalization) द्वारा इनका अंत होता है। हालांकि, कथन 4 गलत है क्योंकि क्रॉसिंग ओवर की आवृत्ति दो जीनों के बीच की दूरी के **समानुपाती** (Directly proportional) होती है—अर्थात जितनी अधिक दूरी होगी, क्रॉसिंग ओवर की संभावना उतनी ही अधिक होगी। इस संबंध में विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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