BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
10 views

मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न हॉर्मोनों की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अग्र पीयूष ग्रंथि (Anterior pituitary) द्वारा स्रावित 'प्रोलैक्टिन' (Prolactin) हॉर्मोन मुख्य रूप से स्तन ग्रंथियों के विकास और दुग्ध उत्पादन को उत्तेजित करता है, जबकि 'ऑक्सीटोसिन' हॉर्मोन का स्राव पश्च पीयूष ग्रंथि से होता है जो दुग्ध के निष्कासन (Milk ejection) और प्रसव के दौरान गर्भाशय की चिकनी पेशियों के संकुचन को प्रेरित करता है।
  2. 2. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland) का वल्कुट (Cortex) भाग 'कॉर्टिसोल' (Cortisol) का स्राव करता है, जो एक मुख्य ग्लूकोकॉर्टिकोइड है और यह शरीर में ग्लाइकोजेनोलिसिस को प्रेरित करने के साथ-साथ सूजनरोधी (Anti-inflammatory) प्रतिक्रिया और प्रतिरक्षा प्रणाली के दमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  3. 3. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'थैलीटोनिन' (Calcitonin) हॉर्मोन रक्त में कैल्शियम के स्तर को बढ़ाने का कार्य करता है, जो कि पैराथायराइड हॉर्मोन (PTH) के प्रभावों का पूरी तरह से पूरक (Synergistic) होता है और हड्डियों से कैल्शियम के अवशोषण को तीव्र करता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि अग्र पीयूष ग्रंथि से स्रावित प्रोलैक्टिन दुग्ध उत्पादन (lactogenesis) को नियंत्रित करता है, जबकि पश्च पीयूष ग्रंथि (Neurohypophysis) से स्रावित ऑक्सीटोसिन दुग्ध निष्कासन और गर्भाशय संकुचन में सहायता करता है। कथन 2 सही है, अधिवृक्क वल्कुट से उत्पन्न कॉर्टिसोल कार्बोहाइड्रेट चयापचय को प्रभावित करता है, ग्लूकोनियोजेनेसिस को बढ़ावा देता है और सूजनरोधी प्रतिक्रिया प्रदर्शित करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि थायराइड ग्रंथि की पैराफॉलिकुलर कोशिकाओं द्वारा स्रावित 'कैल्सीटोनिन' रक्त में कैल्शियम के स्तर को **घटाता** (Hypocalcemic factor) है, जबकि पैराथायराइड हॉर्मोन (PTH) कैल्शियम के स्तर को बढ़ाता है; अतः ये दोनों एक-दूसरे के विपरीत (Antagonistic) कार्य करते हैं, पूरक नहीं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम, एंट्रॉपी (Entropy) और विभिन्न तापमापी पैमानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम स्पष्ट करता है कि किसी भी स्वतः स्फूर्त (Spontaneous) प्रक्रम में ब्रह्मांड की कुल एंट्रॉपी हमेशा बढ़ती है, और आदर्श रूप से उत्क्रमणीय (Reversible) प्रक्रम में कुल एंट्रॉपी परिवर्तन शून्य होता है। 2. केल्विन ताप पैमाने पर तापमान की परिभाषा ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम पर आधारित होती है, और इस पैमाने पर किसी वस्तु का ऋणात्मक तापमान संभव है क्योंकि कार्नोट इंजन की दक्षता 100% से अधिक हो सकती है। 3. जब किसी गैस का रुद्धोष्म (Adiabatic) स्वतंत्र प्रसार (Free expansion) निर्वात में किया जाता है, तो गैस द्वारा कोई कार्य नहीं किया जाता और न ही कोई ऊष्मा बाहर से दी जाती है, किंतु इस अप्रतिवर्ती प्रक्रम के कारण गैस की एंट्रॉपी में वृद्धि होती है। 4. प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी और गैस तापमापी दोनों ही तापमान मापन के लिए उपयोग किए जाते हैं, जिसमें स्थिर आयतन गैस तापमापी को उसके अत्यधिक व्यापक कार्यक्षेत्र और उच्च यथार्थता के कारण प्राथमिक मानक तापमापी माना जाता है, जिसका विस्तृत विवरण विकिपीडिया संदर्भ में दिया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम, ऊष्मा धारिता और विशिष्ट ऊष्मा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का ही एक व्यापक रूप है, जिसके अनुसार किसी निकाय को दी गई ऊष्मा ($dQ$) निकाय की आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन ($dU$) और निकाय द्वारा किए गए कार्य ($dW$) के योग के बराबर होती है। 2. समदाबीय प्रक्रम (Isobaric process) में दी गई ऊष्मा की गणना करते समय मोलर ऊष्मा धारिता का उपयोग किया जाता है, और किसी गैस के लिए स्थिर दाब पर मोलर ऊष्मा धारिता ($C_p$) का मान स्थिर आयतन पर मोलर ऊष्मा धारिता ($C_v$) से हमेशा कम होता है ($C_p < C_v$)। 3. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता है ($dQ = 0$), जिसके फलस्वरूप गैस के प्रसार में निकाय द्वारा किया गया कार्य उसकी आंतरिक ऊर्जा के ह्रास के कारण होता है और तापमान में गिरावट आती है। 4. जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता सभी पदार्थों में अधिकतम होती है, जिसके कारण जल का उपयोग ताप नियंत्रক (Coolant) के रूप में और ठंडे प्रदेशों में सेकने वाली बोतलों में किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? प्रकाश तरंगें? दुधवा? धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सोडियम और पोटेशियम जैसी अत्यंत क्रियाशील धातुएं ठंडे पानी के साथ तीव्र अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं और यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है, जबकि कैल्शियम पानी के साथ कम तीव्र गति से अभिक्रिया करता है और उत्पन्न होने वाली हाइड्रोजन गैस के बुलबुले धातु की सतह से चिपक जाते हैं जिससे कैल्शियम तैरने लगता है। 2. ऐलुमिनियम, जिंक और टिन जैसी धातुएं उभयधर्मी (Amphoteric) ऑक्साइड या हाइड्रॉक्साइड का निर्माण करती हैं, जिसका अर्थ है कि वे अम्ल और क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करके लवण और पानी बनाती हैं। 3. मिश्रधातु 'अमलगम' (Amalgam) में एक अनिवार्य धातु हमेशा पारा (Mercury) होती है, और लोहे की अनभिक्रियाशीलता (Unreactivity) के कारण लोहा पारे के साथ आसानी से अमलगम बना लेता है, यही कारण है कि पारे के भंडारण के लिए लोहे के पात्रों का उपयोग किया जाता है। 4. उत्कृष्ट गैसों के अतिरिक्त, कुछ अधातुएं जैसे सल्फर और फॉस्फोरस अपनी बहुपरमाणुकता दर्शाती हैं, जिसमें सल्फर $S_8$ के रूप में वलय संरचना और श्वेत फॉस्फोरस $P_4$ के रूप में चतुष्फलकीय संरचना बनाता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.