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General Science
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मानव शरीर में वृहद पोषक तत्वों और सूक्ष्म पोषक तत्वों (विटामिन और खनिज) के जैव-रासायनिक कार्यों तथा उनके उपापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. थيامिन (विटामिन $B_1$) अपने सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'थियामिन पाइरोफॉस्फेट' (TPP) के माध्यम से कार्बोहाइड्रेट उपापचय में पाइरुवेट के एसिटाइल-CoA में ऑक्सीडेटिव डीकार्बोक्सिलेशन को उत्प्रेरित करता है, और इसकी गंभीर कमी से 'बेरी-बेरी' रोग होता है।
- 2. नियासिन (विटामिन $B_3$) का संश्लेषण मानव शरीर में ट्रिप्टोफैन अमीनो अम्ल से हो सकता है, तथा इसकी कमी से पैलाग्रा रोग उत्पन्न होता है जिसके क्लासिक लक्षणों में डर्मेटाइटिस, डायरिया और डिमेंशिया शामिल हैं।
- 3. एस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन $C$) एक जल-विलेय एंटीऑक्सीडेंट है जो कोलेजन फाइबर के हाइड्रॉक्सीलेशन (प्रोलिन और लाइसिन अवशेषों के) के लिए आवश्यक प्रो-कोलेजन हाइड्रोक्सिलाइज एंजाइम को सक्रिय रखता है, और इसकी कमी से स्कर्वी रोग हो जाता है।
- 4. विटामिन A (रेटिनॉल) का मुख्य सक्रिय रूप '11-सिस-रेटिनॉल' है, जो आँखों की शलाकाओं (Rods) में मौजूद वर्णक 'रोडोप्सिन' का एक प्रमुख घटक है, और इसकी कमी से केवल 'रौंधी' (Night blindness) होती है, जबकि कॉर्निया पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। थियामिन (विटामिन B1) TPP के रूप में कार्बोहाइड्रेट चयापचय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नियासिन का संश्लेषण ट्रिप्टोफैन से होता है और इसकी कमी से पैलाग्रा होता है। विटामिन C कोलेजन संश्लेषण के लिए आवश्यक है। कथन 4 गलत है क्योंकि विटामिन A का सक्रिय रूप रेटिना में '11-सिस-रेटिनाल' (11-cis-retinal) होता है, और इसकी गंभीर कमी से 'रोडोप्सिन' का क्षय होता है जिससे केवल रतौंधी ही नहीं, बल्कि 'क्सैरोफ्थैल्मिया' (Xerophthalmia) जैसी गंभीर कॉर्नियल समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
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तरंग गति और ध्वनि तरंगों (Wave Motion and Sound) के भौतिक सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी गैस में ध्वनि की चाल गैस के दाब पर निर्भर करती है, और यदि तापमान को स्थिर रखते हुए गैस का दाब दोगुना कर दिया जाए, तो ध्वनि की चाल भी दोगुनी हो जाती है।
2. अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves) के संचरण के दौरान माध्यम में संपीडन (Compression) वाले स्थानों पर दाब और घनत्व दोनों का मान अधिकतम होता है, जबकि विरलन (Rarefaction) वाले स्थानों पर न्यूनतम होता है।
3. डॉप्लर प्रभाव (Doppler effect) के अनुसार, जब ध्वनि स्रोत और श्रोता के बीच की दूरी कम होती है, तो श्रोता को सुनाई देने वाली ध्वनि की आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से अधिक प्रतीत होती है, और यह प्रभाव प्रकाश तरंगों के लिए भी मान्य है।
4. अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse waves) केवल ठोस और द्रवों की सतह पर ही उत्पन्न की जा सकती हैं, क्योंकि गैसों में अपरूपण प्रत्यास्थता (Shear elasticity) का अभाव होता है, जिसके कारण गैसों के भीतर अनुप्रस्थ तरंगों का संचरण संभव नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भौतिक राशियों और उनके मापन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पारसेक' (Parsec) खगोलीय दूरियों को मापने की सबसे बड़ी व्यावहारिक इकाई है, जो कि उस दूरी के बराबर होती है जिस पर एक खगोलीय इकाई (AU) की चाप पृथ्वी की कक्षा की औसत त्रिज्या के केंद्र पर एक आर्कसेकंड का कोण बनाती है।
2. किसी भौतिक राशि के विमीय सूत्र में यदि द्रव्यमान, लंबाई और समय की विमाएँ क्रमशः $A, B$ और $C$ हैं, तो उस राशि की पद्धति बदलने पर उसका संख्यात्मक मान (Numerical value) बदल जाता है, किंतु उसका विमीय सूत्र और एसआई मात्रक अपरिवर्तित रहते हैं।
3. 'प्रकाश वर्ष' (Light-year) समय की एक इकाई है जिसका उपयोग अंतरिक्ष में अत्यधिक तीव्र गतियों और अंतरालीय समय अंतरालों को मापने के लिए किया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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शुद्ध सोना?
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ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम, एंट्रॉपी (Entropy) और विभिन्न तापमापी पैमानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम स्पष्ट करता है कि किसी भी स्वतः स्फूर्त (Spontaneous) प्रक्रम में ब्रह्मांड की कुल एंट्रॉपी हमेशा बढ़ती है, और आदर्श रूप से उत्क्रमणीय (Reversible) प्रक्रम में कुल एंट्रॉपी परिवर्तन शून्य होता है।
2. केल्विन ताप पैमाने पर तापमान की परिभाषा ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम पर आधारित होती है, और इस पैमाने पर किसी वस्तु का ऋणात्मक तापमान संभव है क्योंकि कार्नोट इंजन की दक्षता 100% से अधिक हो सकती है।
3. जब किसी गैस का रुद्धोष्म (Adiabatic) स्वतंत्र प्रसार (Free expansion) निर्वात में किया जाता है, तो गैस द्वारा कोई कार्य नहीं किया जाता और न ही कोई ऊष्मा बाहर से दी जाती है, किंतु इस अप्रतिवर्ती प्रक्रम के कारण गैस की एंट्रॉपी में वृद्धि होती है।
4. प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी और गैस तापमापी दोनों ही तापमान मापन के लिए उपयोग किए जाते हैं, जिसमें स्थिर आयतन गैस तापमापी को उसके अत्यधिक व्यापक कार्यक्षेत्र और उच्च यथार्थता के कारण प्राथमिक मानक तापमापी माना जाता है, जिसका विस्तृत विवरण विकिपीडिया संदर्भ में दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यांत्रिकी (Mechanics) के अंतर्गत ऊर्जा संरक्षण, कार्य-ऊर्जा प्रमेय और प्रत्यास्थ तथा अप्रत्यास्थ संघट्ट (Collisions) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी संरक्षी बल (Conservative force) द्वारा किया गया कार्य मार्ग पर निर्भर नहीं करता बल्कि यह केवल वस्तु की प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, और इस प्रकार के बल के अंतर्गत बंद पथ में किया गया कुल कार्य सदैव शून्य होता है।
2. कार्य-ऊर्जा प्रमेय (Work-Energy Theorem) के अनुसार, किसी वस्तु पर सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है, और यह प्रमेय केवल संरक्षी बलों के लिए ही मान्य है, असंरक्षी बलों (जैसे घर्षण) के लिए लागू नहीं होती।
3. एकविमीय पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट (Perfectriz inelastic collision) में गतिज ऊर्जा का पूर्ण संरक्षण होता है, किंतु संवेग का संरक्षण नहीं होता है, और संघट्ट के पश्चात दोनों वस्तुएं एक साथ मिलकर एक ही वेग से गति करती हैं।
4. यदि किसी निकाय पर कोई बाहरी बल आघूर्ण (External torque) शून्य हो, तो उस निकाय का कुल कोणीय संवेग (Angular momentum) संरक्षित रहता है, जो कि कोणीय संवेग संरक्षण के सिद्धांत को दर्शाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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