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General Science
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यूकेरियोटिक कोशिका के कोशिका विभाजन (Cell Division) के दौरान अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) और समसूत्री विभाजन (Mitosis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अर्धसूत्री विभाजन-I की प्रोफेज-I अवस्था के 'डाइकाइनेसिस' (Diakinesis) उपचरण में टर्मिनलाइजेशन (Terminalization) की प्रक्रिया पूरी होती है, जिसमें chiasmata सिरों की ओर खिसक जाते हैं और केंद्रिका लुप्त हो जाती है।
- 2. 'माइटोटिक स्पिंडल' (Mitotic spindle) का निर्माण माइक्रोट्यूब्यूल्स (सूक्ष्म नलिकाओं) द्वारा होता है, और 'निकोडेमाइल' या 'कोलचिसिन' जैसे रसायन ट्यूबुलीन बहुलीकरण को रोककर सेल डिवीजन को मेटाफेज अवस्था में ही रोक देते हैं।
- 3. जंतु कोशिकाओं में कोशिका द्रव्य विभाजन (Cytokinesis) 'कोशिका खांच' (Cell furrow) विधि द्वारा होता है, जिसमें एक्टिन और मयोसिन फिलामेंट्स से बने संकुचई वलय (Contractile ring) का अभिकेंद्रकीय संकुचन होता है, जबकि पादप कोशिकाओं में यह 'सेल प्लेट' (Cell plate) के निर्माण द्वारा केंद्र से परिधि की ओर होता है।
- 4. मियोसिस के दौरान होमोलोगous क्रोमोसोम का पृथक्करण हमेशा एनाफेज-II के दौरान होता है, जबकि सिस्टर क्रोमैटिड्स एनाफेज-I में अलग होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis I) की प्रोफेज-I अवस्था के 'डाइकाइनेसिस' उपचरण में क्रॉसिंग ओवर के पश्चात बने chiasmata का सिरों की तरफ खिसक जाना 'टर्मिनलाइजेशन' कहलाता है। कोलचिसिन (Colchicine) ट्यूबुलीन प्रोटीन के साथ जुड़कर सूक्ष्म नलिकाओं (Microtubules) के बहुलीकरण को बाधित करता है, जिससे तर्कु तंतु (Spindle fibers) नहीं बन पाते और कोशिका विभाजन मेटाफेज में रुक जाता है। जंतु कोशिकाओं में साइटोकाइनेसिस माइक्रोफिलामेंट्स (एक्टिन-मयोसिन) के संकुचन से खांच बनाकर होता है, जबकि पादप कोशिकाओं में गॉल्जीकाय द्वारा स्रावित पुटिकाओं के संलयन से 'सेल प्लेट' बनती है। कथन 4 गलत है क्योंकि होमोलोगस क्रोमोसोम एनाफेज-I में अलग होते हैं और सिस्टर क्रोमैटिड्स एनाफेज-II में अलग होते हैं। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहीकरण (Blood Groups) के विशेष संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बॉम्बे रक्त समूह (Bombay Blood Group) सबसे पहले 1952 में मुंबई में खोजा गया था, और इस फेनोटाइप वाले व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) पर 'H' एंटीजन का पूर्ण अभाव होता है, क्योंकि उनके पास 'H' जीन का कार्यात्मक रूप (Fut1) नहीं होता है।
2. 'AB' रक्त समूह को सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता (Universal Recipient) इसलिए माना जाता है क्योंकि इनकी प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्राकृतिक एंटीबॉडी अनुपस्थित होते हैं, जिससे किसी भी अन्य रक्त समूह (A, B, AB, O) का रक्त चढ़ाने पर लाल रक्त कोशिकाओं का संपिंडन (Agglutination) नहीं होता है।
3. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की आंतरिक मार्ग (Intrinsic Pathway) की शुरुआत क्षतिग्रस्त ऊतकों द्वारा 'थ्रॉम्बोप्लास्टिन' (ऊतक कारक या फैक्टर III) के मुक्त होने से होती है, जो त्वरित रूप से कैल्शियम आयनों की उपस्थिति में फैक्टर VII को सक्रिय करता है।
4. हीमोग्लोबिन के एक अणु में चार पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएं (दो अल्फा और दो बीटा) होती हैं, और प्रत्येक श्रृंखला के हीम समूह के केंद्र में स्थित फेरस आयन ($Fe^{2+}$) ऑक्सीजन के एक अणु के साथ reversibly (उत्क्रमणीय रूप से) बंध बनाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ओजोन परत किस मंडल में स्थित है?
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मानव शरीर में उत्पन्न होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगजनकों और संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'टिटनेस' (Tetanus) एक जीवाणु जनित रोग है जो 'क्लॉस्ट्रेडियम टिटानी' (Clostridium tetani) के कारण होता है, और इसके बीजाणु मिट्टी या जंग लगी वस्तुओं के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं तथा पेशियों में तीव्र ऐंठन उत्पन्न करते हैं।
2. 'काली खांसी' (Pertussis) जिसे व्हूपिंग कफ भी कहा जाता है, 'बर्डेटेल्ला पर्टुसिस' (Bordetella pertussis) नामक ग्राम-ऋणात्मक जीवाणु के कारण होती है, जो मुख्य रूप से श्वसन मार्ग की उपकला को संक्रमित करती है।
3. 'ट्रैकोमा' (Trachoma) एक नेत्र संक्रमण है जो 'क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस' (Chlamydia trachomatis) नामक सूक्ष्मजीव के कारण होता है, और यह कॉर्निया तथा कंजंक्टिवा को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाकर अंधेपन का कारण बन सकता है।
4. 'लेप्रोसी' या कुष्ठ रोग 'माइकोबैक्टीरियम लेप्री' नामक जीवाणु के कारण होता है, जो अत्यधिक संक्रामक होने के कारण श्वसन बूंदों के माध्यम से बहुत ही अल्प समय में स्वस्थ मनुष्यों में फैल जाता है और मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को नष्ट करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं के निष्कर्षण (Metallurgical operations) और उनके परिष्करण (Refining) की विभिन्न विधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'भर्जन' (Roasting) की प्रक्रिया में अयस्क को वायु की नियमित या नियंत्रित आपूर्ति के साथ उसके गलनांक से कम तापमान पर गर्म किया जाता है, जिसका मुख्य उपयोग आमतौर पर सल्फाइड अयस्कों को ऑक्साइड में बदलने के लिए किया जाता है।
2. 'निस्तापन' (Calcination) की प्रक्रिया में कार्बोनेट या हाइड्रेटेड ऑक्साइड अयस्कों को वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में गर्म किया जाता है ताकि वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर हो सकें।
3. 'मंडल परिष्करण' (Zone Refining) का सिद्धांत इस बात पर आधारित है कि अशुद्धियों की विलेयता धातु की ठोस अवस्था की तुलना में उसकी गलित (Molten) अवस्था में काफी अधिक होती है, जिसका उपयोग अति-शुद्ध सिलिकॉन और जर्मेनियम प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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दर्पण का सूत्र?
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