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General Science
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मानव शरीर में उत्पन्न होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगजनकों और संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'टिटनेस' (Tetanus) एक जीवाणु जनित रोग है जो 'क्लॉस्ट्रेडियम टिटानी' (Clostridium tetani) के कारण होता है, और इसके बीजाणु मिट्टी या जंग लगी वस्तुओं के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं तथा पेशियों में तीव्र ऐंठन उत्पन्न करते हैं।
- 2. 'काली खांसी' (Pertussis) जिसे व्हूपिंग कफ भी कहा जाता है, 'बर्डेटेल्ला पर्टुसिस' (Bordetella pertussis) नामक ग्राम-ऋणात्मक जीवाणु के कारण होती है, जो मुख्य रूप से श्वसन मार्ग की उपकला को संक्रमित करती है।
- 3. 'ट्रैकोमा' (Trachoma) एक नेत्र संक्रमण है जो 'क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस' (Chlamydia trachomatis) नामक सूक्ष्मजीव के कारण होता है, और यह कॉर्निया तथा कंजंक्टिवा को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाकर अंधेपन का कारण बन सकता है।
- 4. 'लेप्रोसी' या कुष्ठ रोग 'माइकोबैक्टीरियम लेप्री' नामक जीवाणु के कारण होता है, जो अत्यधिक संक्रामक होने के कारण श्वसन बूंदों के माध्यम से बहुत ही अल्प समय में स्वस्थ मनुष्यों में फैल जाता है और मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को नष्ट करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि टिटनेस 'क्लॉस्ट्रेडियम टिटानी' के कारण होता है, जिसके बीजाणु तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि काली खांसी 'बर्डेटेल्ला पर्टुसिस' जीवाणु द्वारा होती है। कथन 3 सही है क्योंकि ट्रैकोमा एक नेत्र संक्रमण है जो 'क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस' से होता है। कथन 4 गलत है क्योंकि कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) अत्यधिक संक्रामक नहीं होता है और यह मुख्य रूप से परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral nervous system) तथा त्वचा को प्रभावित करता है, न कि केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को बहुत अल्प समय में नष्ट करता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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प्रकाश किस प्रकार की तरंग है?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के जैव रासायनिक चक्रों और पादप हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल पर अनिवार्य रूप से निर्भर होते हैं, और इनमें मुख्य पादप शरीर अगुणित (Gametophyte) होता है जिस पर बीजाणुकोद्भिद (Sporophyte) आश्रित रहता है।
2. सी-4 (C4) पौधों में प्रकाश संश्लेषण के दौरान केल्विन चक्र से पहले कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण मेसोफिल कोशिकाओं में 'PEP कार्बोक्सिलेस' एंजाइम द्वारा होता है, जिससे एक 4-कार्बन यौगिक (ऑक्सालोएसेटिक एसिड) बनता है, जो इसे उष्णकटिबंधीय जलवायु में उच्च प्रकाश तीव्रता और कम जल उपलब्धता के प्रति अत्यधिक अनुकूल बनाता है।
3. 'एब्सिसिक एसिड' (ABA) एक वृद्धि-प्रोत्साहक पादप हॉर्मोन है जो मुख्य रूप से तने की लंबाई में तीव्र वृद्धि, कोशिका दीर्घीकरण (Cell elongation) और बीजों के अंकुरण को प्रेरित करने के लिए उत्तरदायी होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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आवर्त सारणी के तत्वों के आवर्ती गुणों और उनकी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है और प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में वृद्धि होती है, जिसके कारण प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान सामान्यतः बढ़ता है, हालांकि नाइट्रोजन ($N$) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अपने ठीक बाद आने वाले ऑक्सीजन ($O$) तत्व से अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के अर्ध-पूरित (Half-filled) $2p$ कक्षकों का अतिरिक्त स्थायित्व है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और किसी भी उदासीन गैसीय परमाणु द्वारा एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर हमेशा ऊर्जा का उत्सर्जन ही होता है, चाहे परमाणु का आकार या इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कुछ भी हो।
3. हैлोजेन समूह में फ्लोरीन ($F$) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान अपने ही समूह के अगले तत्व क्लोरीन ($Cl$) की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होता है, जिसके कारण अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षक (Interelectronic repulsion) बल का मान बढ़ जाता है।
4. लैंथानाइड संकुचन (Lanthanoid contraction) के कारण $5d$ श्रेणी के संक्रमण तत्वों (जैसे Hafnium, $Hf$) की परमाणु और आयनिक त्रिज्याएँ अपने ठीक ऊपर स्थित $4d$ श्रेणी के तत्वों (जैसे Zirconium, $Zr$) के लगभग बराबर हो जाती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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नाभिकीय भौतिकी और कण त्वरकों (Particle Accelerators) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'साइक्लोट्रॉन' (Cyclotron) एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग आवेशित कणों जैसे प्रोटॉन और ड्यूट्रॉन को उच्च गति तक त्वरित करने के लिए किया जाता है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र कणों को वृत्ताकार मार्ग पर घुमाता है और एक परिवर्ती विद्युत क्षेत्र कणों को प्रत्येक चक्कर में ऊर्जा प्रदान करता है।
2. 'आइंस्टीन का द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता सिद्धांत' ($E=mc^2$) के अनुसार, जब किसी भारी परमाणु के नाभिक का विखंडन या हल्के नाभिकों का संलयन होता है, तो द्रव्यमान में होने वाली सूक्ष्म क्षति (Mass defect) ही अपार ऊर्जा के रूप में मुक्त होती है।
3. नाभिकीय रिएक्टरों में 'नियंत्रक छड़ें' (Control rods) के रूप में कैडमियम या बोरॉन का उपयोग किया जाता है, जो श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए विखंडन प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाले अतिरिक्त प्रोटॉनों का पूर्णतः अवशोषण करती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव के लिए आइंस्टीन को क्या मिला?
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