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General Science
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और लसिका तंत्र (Lymphatic System) की क्रियात्मक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मानव हृदय का 'सिनोएट्रियल नोड' (SA Node) एक गतिप्रेरक (Pacemaker) के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह स्वतः क्रियाविभव (Action potential) उत्पन्न करने की उच्चतम क्षमता रखता है, जिससे हृदय की पेशियों का संकुचन नियंत्रित होता है।
- 2. जब रक्त कोशिकाओं से केशिकाओं (Capillaries) के माध्यम से ऊतकों में प्रवाहित होता है, तो हाइड्रोस्टेटिक दबाव के कारण प्लाज्मा का एक बड़ा भाग प्रोटीन सहित कोशिकाओं के बीच अंतरकोशिकीय अवकाश में छन जाता है, जिसे लसिका कहा जाता है।
- 3. रुधिर स्कंदन (Blood coagulation) की प्रक्रिया में, थ्रॉम्बोप्लास्टिन और कैल्सियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति में प्रोथ्रॉम्बिन, सक्रिय थ्रॉम्बिन में परिवर्तित होता है, जो आगे घुलनशील फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील फाइब्रिन तंतुओं में बदल देता है।
- 4. फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary Artery) शरीर की एकमात्र धमनी है जो ऑक्सीजनित (Oxygenated) रक्त का वहन करती है, जबकि फुफ्फुसीय शिरा विऑक्सीजनित रक्त को फेफड़ों से बाएं आलिंद तक पहुँचाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि मानव हृदय का 'सिनोएट्रियल नोड' (SA Node) स्वतः उत्तेजना उत्पन्न करने की उच्चतम लयबद्ध क्षमता रखता है, जिसके कारण इसे प्राकृतिक पेसमेकर कहा जाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि केशिकाओं से छनने वाले तरल (इंटरस्टिशियल फ्लूइड) में बड़े प्लाज्मा प्रोटीन सामान्यतः बाहर नहीं आ पाते हैं, और लसिका में बड़े प्रोटीन व रक्त कणिकाएँ अनुपस्थित होती हैं। कथन 3 सही है क्योंकि रुधिर स्कंदन की कैस्केड प्रक्रिया में थ्रॉम्बोप्लास्टिन और $Ca^{2+}$ आयनों की सहायता से प्रोथ्रॉम्बिन सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदलता है, जो फाइब्रिनोजेन को फाइब्रिन में परिवर्तित करता है। कथन 4 गलत है क्योंकि फुफ्फुसीय धमनी विऑक्सीजनित (Deoxygenated) रक्त को हृदय से फेफड़ों तक ले जाती है, जबकि फुफ्फुसीय शिरा ऑक्सीजनित रक्त को फेफड़ों से बाएं आलिंद में लाती है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
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कोशिका का शक्ति केंद्र किसे कहते हैं?
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लेंस की क्षमता का मात्रक?
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नाभिकीय भौतिकरी और रेडियोएक्टिवता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) के दौरान किसी भारी नाभिक का दो या दो से अधिक मध्यम आकार के नाभिकों में टूटना द्रव्यमान क्षति (Mass defect) पर आधारित है, जहाँ आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता समीकरण $E = mc^2$ के अनुसार मुक्त हुई ऊर्जा नाभिकीय बंधन ऊर्जा (Binding energy per nucleon) में वृद्धि के कारण होती है।
2. सूर्य और अन्य तारों पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear Fusion) है, जिसमें अत्यधिक उच्च ताप और दाब पर हल्के हाइड्रोजन नाभिक मिलकर हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं, और यह प्रक्रिया केवल अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया के रूप में ही संभव है।
3. रेडियोएक्टिव क्षय के दौरान उत्सर्जित होने वाली 'गामा किरणें' वास्तव में उच्च आवृत्ति की विद्युत चुंबकीय तरंगें होती हैं, जो नाभिक के ऊर्जा स्तरों में संक्रमण के कारण उत्पन्न होती हैं और इनके उत्सर्जन से न तो परमाणु क्रमांक बदलता है और न ही द्रव्यमान संख्या।
4. किसी रेडियोएक्टिव पदार्थ की अर्ध-आयु (Half-life) उसके प्रारंभिक द्रव्यमान और उस पर बाहरी दाब या तापमान की परिस्थितियों पर निर्भर करती है, जबकि उसका क्षय नियतांक (Decay constant) केवल उस विशिष्ट आइसोटोप की आंतरिक प्रकृति पर निर्भर करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत लेंसों, दर्पणों और प्रकाश के अपवर्तन-परावर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब कोई प्रकाश किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो जाता है, तो पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है, और इस घटना के दौरान परावर्तन के सामान्य नियम ($i = r$) पूरी तरह से लागू होते हैं।
2. एक पतले उत्तल लेंस को जब ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की अभिसारी प्रकृति अपरिवर्तित रहती है किंतु उसकी फोकस दूरी अनंत हो जाती है जिससे वह समतल कांच की भांति व्यवहार करता है।
3. गोलीय दर्पणों के लिए दर्पण सूत्र ($\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$) केवल परपेक्सी (Paraxial) किरणों के लिए ही वैध होता है, अर्थात उन किरणों के लिए जो मुख्य अक्ष के अत्यंत निकट होती हैं और जिनका आपतन कोण बहुत छोटा होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'सोमाटोसटैस्टिन' (Somatostatin) हॉर्मोन अग्र पीयूष ग्रंथि से वृद्धि हॉर्मोन (Growth Hormone) के स्रावण को रोकता है।
2. अधिवृक्क वल्कुट (Adrenal Cortex) द्वारा स्रावित 'एल्डोस्टेरोन' (Aldosterone) एक मिनरलोकोर्टिकोइड है, जो वृक्क नलिकाओं में सोडियम और जल के पुनर्अवशोषण को बढ़ावा देता है तथा पोटेशियम और फॉस्फेट आयनों के उत्सर्जन को नियंत्रित करता है।
3. अग्न्याशय की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) की अल्फा कोशिकाएँ 'ग्लूकाagon' हॉर्मोन का स्रावण करती हैं, जो एक हाइपरग्लाइसेमिक (Hyperglycemic) हॉर्मोन है अर्थात यह रक्त में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाता है।
4. पैराथाइराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'पैराथाइराइड हॉर्मोन' (PTH) अस्थि-अवशोषण (Bone resorption) को प्रेरित करके रक्त में कैल्शियम आयनों के स्तर को कम करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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