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General Science
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मानव पोषण में विटामिन और उनके सह-एंजाइमी रूपों तथा रासायनिक नाम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. विटामिन B$_1$ (थायमिन) का सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'थायमिन पाइरोफॉस्फेट' (TPP) है, जो कार्बोहाइड्रेट उपापचय के दौरान पाइरुविक एसिड के ऑक्सीडेटिव डिकार्बोक्सिलेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- 2. विटामिन B$_3$ (नियासिन) 'निकोटिनामाइड एडेनिन डाइब्यूक्लियोटाइड' (NAD$^+$) और NADP$^+$ का एक आवश्यक घटक है, जिसकी कमी से 'पेलग्रा' (Pellagra) रोग होता है, जिसे '3D रोग' (डर्मेटाइटिस, डायरिया और डिमेंशिया) के रूप में जाना जाता है।
- 3. विटामिन C (एस्कॉर्बिक एसिड) एक जल-विलेय विटामिन है जो शरीर में कोलेजन प्रोटीन के हाइड्रॉक्सिलेशन के लिए आवश्यक होता है, और इसकी गंभीर कमी से 'स्कर्वी' रोग होता है, जिसमें मसूड़ों से रक्तस्राव और घाव भरने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
- 4. विटामिन B$_{12}$ (सायानोकोबालामिन) यकृत में संचित होने वाला एकमात्र जल-विलेय विटामिन है, जिसमें कोबाल्ट धातु आयन पाया जाता है और इसकी कमी से 'परनीसियस एनीमिया' (Pernicious anemia) होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। विटामिन B$_1$ (थायमिन) का सक्रिय रूप TPP है जो कार्बोहाइड्रेट चयापचय में आवश्यक है। नियासिन (विटामिन B$_3$) NAD और NADP का पूर्वगामी है और इसकी कमी से पेलग्रा होता है। विटामिन C कोलेजन संश्लेषण और ऊतक मरम्मत में सहायक है। कथन 4 आंशिक रूप से गलत है क्योंकि विटामिन B$_{12}$ एक **जल-विलेय** विटामिन है, लेकिन यह यकृत में वर्षों तक संचित हो सकता है, जो अधिकांश जल-विलेय विटामिनों के विपरीत है (क्योंकि अधिकांश जल-विलेय विटामिन मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाते हैं)। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) की आनुवंशिकी तथा अनुकूलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली में लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर उपस्थित एंटीजन (एग्लूटिनोजन) के प्रकार के आधार पर रक्त समूह निर्धारित होते हैं, और जिस व्यक्ति के प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों प्राकृतिक एंटीबॉडी उपस्थित होते हैं, उसका रक्त समूह 'AB' होता है।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$ फेनोटाइप) से ग्रस्त व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर 'H एंटीजन' अनुपस्थित होता है, जिसके कारण वे किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (A, B, AB, O) से रक्त प्राप्त नहीं कर सकते हैं, क्योंकि उनके प्लाज्मा में H एंटीजन के विरुद्ध भी एंटीबॉडी पाई जाती है।
3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटेलिस (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-ऋणात्मक (Rh-) माता अपने गर्भ में Rh-धनात्मक (Rh+) भ्रूण को धारण करती है, जिससे पहली गर्भावस्था में ही भ्रूण की गंभीर क्षति या मृत्यु हो जाती है क्योंकि मातृ एंटीबॉडी प्लेसेंटा को बहुत तेजी से पार करती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक एवं भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सोडियम और पोटैशियम जैसी अतिसक्रिय धातुएँ हवा में खुली रखने पर तुरंत अभिक्रिया कर लेती हैं, इसलिए इन्हें सुरक्षित रखने के लिए किरोसिन (मिट्टी के तेल) में डुबोकर रखा जाता है, जबकि सफेद फॉस्फोरस (एक सक्रिय अधातु) को आग से बचाने के लिए पानी के नीचे संग्रहित किया जाता है।
2. 'एक्वा रीजिया' (Aqua Regia) सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सांद्र नाइट्रिक अम्ल का 3:1 के आयतन अनुपात में ताजा तैयार किया गया मिश्रण है, जो स्वर्ण (Gold) और प्लैटिनम जैसी उत्कृष्ट धातुओं को भी घोलने की क्षमता रखता है।
3. जब एल्युमिनियम ऑक्साइड ($Al_2O_3$) को क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) के साथ मिश्रित करके हॉल-हैरॉल्ट प्रक्रम द्वारा विद्युत अपघटन किया जाता है, तो क्रायोलाइट एल्युमिनियम ऑक्साइड के गलनांक को कम करने और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाने का मुख्य कार्य करता है।
4. थर्मिट वेल्डिंग प्रक्रिया में एल्युमिनियम चूर्ण और आयरन (III) ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) के मिश्रण का उपयोग किया जाता है, जिसमें एल्युमिनियम अपनी उच्च विद्युत ऋणात्मकता के कारण आयरन को अपचयित करके अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है, जिसके विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन' (GnRH) अग्र पीयूष ग्रंथि को ल्यूटिनाइजिंग हॉर्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (FSH) के स्रावण के लिए उद्दीपित करता है।
2. थायराइड ग्रंथि की फोलिकुला कोशिकाओं द्वारा स्रावित 'कैल्सीटोनिन' हॉर्मोन रक्त में कैल्शियम आयनों के स्तर को बढ़ाने का कार्य करता है, जिससे अस्थि-अवशोषण (Bone resorption) को बढ़ावा मिलता है।
3. अधिवृक्क मज्जा (Adrenal Medulla) द्वारा 'एपिनीफ्रीन' (एड्रेनालाईन) और 'नॉरएपिनीफ्रीन' (नॉरएड्रेनालाईन) का स्रावण किया जाता है, जिन्हें 'आपातकालीन हॉर्मोन' या 'फ्लाइट या फाइट' हॉर्मोन भी कहा जाता है।
4. अपरा (Placenta) एक अस्थायी अंतःस्रावी ऊतक के रूप में कार्य करता है जो 'ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन' (hCG), एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हॉर्मोनों का स्रावण करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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परमाणु भौतिकी और नाभिकीय अभिक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी रेडियोएक्टिव नाभिक के क्षय नियतांक (Decay constant, $\lambda$) और उसकी अर्ध-आयु ($T_{1/2}$) के बीच का संबंध $T_{1/2} = \frac{\ln 2}{\lambda}$ द्वारा व्यक्त किया जाता है, जिसका अर्थ है कि क्षय नियतांक जितना अधिक होगा, नाभिक की अर्ध-आयु उतनी ही कम होगी।
2. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) के दौरान 'द्रव्यमान क्षति' (Mass defect) ही ऊर्जा में रूपांतरित होती है, जिसे आइंस्टीन के समीकरण $E = \mc^2$ द्वारा समझाया जाता है, और यूरेनियम-235 के एक विखंडन से औसतन लगभग 200 MeV ऊर्जा मुक्त होती है।
3. नियंत्रित नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) प्रतिक्रियाओं को पृथ्वी पर संचालित करने के लिए 'टोकामक' (Tokamak) जैसी युक्तियों में अत्यधिक उच्च तापमान और चुंबकीय परिरक्षण (Magnetic confinement) का उपयोग किया जाता है, क्योंकि संलयन के लिए आवश्यक कूलामी प्रतिकर्षक बल को पार करने हेतु उच्च गतिज ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
4. बीटा-क्षय (Beta decay) के दौरान उत्सर्जित होने वाले 'न्यूट्रिनो' और 'एंटी-न्यूट्रिनो' कणों का द्रव्यमान शून्य और आवेश इकाई धनात्मक होता है, जो दुर्बल नाभिकीय बल (Weak nuclear force) के अंतर्गत ऊर्जा और कोणीय संवेग के संरक्षण को सुनिश्चित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाश संश्लेषण कहाँ?
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