BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
10 views

रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर सकती हैं, जबकि लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने की प्रवृत्ति रखते हैं, और इनके मध्य उपसहसंयोजक बंध (Co-ordinate bond) का निर्माण होता है।
  2. 2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी सिद्धांत के अनुसार, एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में केवल एक प्रोटॉनों ($H^+$) का अंतर होता है, और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार हमेशा एक प्रबल क्षार होता है।
  3. 3. जल की आयनिक गुणनफल स्थिरांक ($K_w$) का मान ताप बढ़ने पर बढ़ता है, जिसके कारण शुद्ध जल का pH मान 298 K पर 7 होने के बावजूद उच्च तापमान पर उदासीन जल का pH मान 7 से कम हो जाता है, यद्यपि वह तब भी उदासीन ही रहता है क्योंकि $[H^+] = [OH^-]$ बना रहता है।
  4. 4. बफर विलयन (Buffer solution) वे विलयन होते हैं जो बाहर से थोड़ी मात्रा में अम्ल या क्षार मिलाने पर अपने pH परिवर्तन का कड़ा प्रतिरोध करते हैं, और अम्लीय बफर का एक उत्कृष्ट उदाहरण एसिटिक अम्ल ($CH_3COOH$) तथा सोडियम एसिटेट ($CH_3COONa$) का मिश्रण है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि लुईस अवधारणा के अनुसार अम्ल इलेक्ट्रॉन युग्मग्राही (Electron-pair acceptor) और क्षार इलेक्ट्रॉन युग्मदाता (Electron-pair donor) होते हैं, जिनके बीच उपसहसंयोजक बंध बनता है। कथन 2 गलत है क्योंकि ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के अनुसार, किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार हमेशा एक दुर्बल क्षार होता है और इसके विपरीत होता है। कथन 3 सही है क्योंकि $K_w$ एक ताप-निर्भर स्थिरांक है; जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, स्वतः आयनन बढ़ता है जिससे $[H^+]$ और $[OH^-]$ दोनों बढ़ते हैं और $pH$ 7 से कम हो जाता है परंतु जल उदासीन ही रहता है। कथन 4 सही है क्योंकि दुर्बल अम्ल और उसके लवण का मिश्रण एक अम्लीय बफर विलयन बनाता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Share:

Related Questions

छाल? मानव शरीर के विभिन्न तन्त्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) की कार्यप्रणाली और उनके नियंत्रण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आमाशय में भोजन के प्रवेश पर पाइलोरिक ग्रन्थियों से स्रावित होने वाला 'गैस्ट्रिन' (Gastrin) हार्मोन गैस्ट्रिक ग्रंथियों को हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और पेप्सिनोजेन के उत्पादन के लिए उद्दीपित करता है। 2. फुफ्फुसीय गैसों के विनिमय के दौरान, ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का विसरण उनके आंशिक दाब (Partial pressure) की प्रवणता के विरुद्ध होता है, जिसके लिए एल्वियोलर झिल्ली पर सक्रिय परिवहन की आवश्यकता होती है। 3. हृदय के पेसमेकर (SA Node) द्वारा उत्पन्न विद्युत आवेग 'बंडल ऑफ हिस' (Bundle of His) और पुरकिंजे तंतुओं के माध्यम से वेंट्रिकुलर भित्ति तक प्रसारित होते हैं, जिससे दोनों निलय एक साथ संकुचित होते हैं। 4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में, प्रतिवर्ती चाप (Reflex arc) के मार्ग में संवेदी तंत्रिका संकेत को अभिवाही (Afferent) तंतुओं से सीधे मध्यस्थ न्यूरॉन के माध्यम से प्रभावक (Effector) अंगों तक पहुँचाया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? चुम्बकीय पदार्थों के वर्गीकरण और विद्युत चुंबकीय प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रतिचुंबकीय पदार्थों (Diamagnetic substances) की चुंबकीय प्रवृत्ति (Magnetic Susceptibility) का मान ऋणात्मक और ताप पर निर्भर नहीं करता है, जबकि अनुचुंबकीय (Paramagnetic) पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति क्यूरी के नियम (Curie's Law) का पालन करते हुए परम ताप के व्युत्क्रमानुपाती होती है। 2. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के सीधे समानुपाती होता है, तथा इसकी दिशा लेंस के नियम द्वारा निर्धारित होती है जो ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का कठोरता से अनुपालन करता है। 3. 'स्वप्रेरण गुणांक' (Coefficient of Self-Inductance) का SI मात्रक 'हेनरी' होता है, जो कि वेबर प्रति ऐम्पियर के तुल्य है, और यह किसी कुंडली की वह ज्यामितीय विशेषता है जो उसमें प्रवाहित होने वाली धारा के मान में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के रासायनिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में क्षारीय धातुओं (alkali metals) से हैलोजन की ओर बढ़ने पर, परमाणुओं की इलेक्ट्रॉन बंधुता (Electron Affinity) का मान सामान्यतः अधिक ऋणात्मक होता जाता है, क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि के कारण बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉन का जुड़ना अधिक ऊर्जाक्षेपी (exothermic) हो जाता है। 2. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide contraction) के कारण, 4d और 5d श्रेणी की संक्रमण धातुओं (जैसे ज़िरकोनियम और हाफ्नियम) की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिससे उनके रासायनिक गुणों में अत्यधिक समानता देखने को मिलती है। 3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'विकर्ण संबंध' (Diagonal relationship) मुख्य रूप से दूसरे और तीसरे आवर्त के तत्वों (जैसे लीथियम और मैग्नीशियम) के बीच प्रदर्शित होता है, जिसका कारण आयनिक त्रिज्या और आवेश-से-त्रिज्या अनुपात (Charge-to-size ratio) का लगभग समान होना है। 4. उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (First Ionisation Enthalpy) का मान उनके आवर्त में न्यूनतम होता है, क्योंकि उनके अष्टक (Octet) पूर्ण होने के कारण वे आसानी से इलेक्ट्रॉन त्यागने के लिए प्रवृत्त होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण और पादप हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को पादप जगत का उभयचर (Amphibians) कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनमें वास्तविक संवहनी ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) अनुपस्थित होते हैं। 2. C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर C3 पौधों की तुलना में नगण्य होती है, क्योंकि इनमें फॉसफोग्लाइकोलेट मार्ग का नियंत्रण 'क्रैनज शरीर रचना' (Kranz anatomy) और PEP कार्बोक्सिलेस एंजाइम की उच्च आत्मीयता द्वारा प्रभावी ढंग से किया जाता है। 3. जिब्रेलिन (Gibberellins) एक प्राकृतिक पादप हॉर्मोन है जो आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वांत) के तीव्र दीर्घीकरण को प्रेरित करता है तथा अंगूर के डंठल (Stalk) के आकार को बढ़ाने में सहायक होता है। 4. ऑक्सिन (Auxins) मुख्य रूप से त्रेषकीय अग्रभाग (Shoot apex) पर संश्लेषित होते हैं और पार्श्व कलिकाओं (Apical dominance) के विकास को बढ़ावा देते हुए उन्हें सक्रिय रखते हैं, जिससे पार्श्व शाखाओं का विकास त्वरित होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.