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General Science
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मानव शरीर के तंत्रों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. आमाशय में उपस्थित 'ऑक्सिंटिक कोशिकाएँ' (Parietal cells) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) स्रावित करती हैं, जो छोटी आंत में विटामिन $B_{12}$ के अवशोषण के लिए अनिवार्य होता है।
- 2. मानव श्वसन तंत्र में, फेफड़ों की कुल क्षमता (Total Lung Capacity - TLC) का लगभग 70% भाग कार्यात्मक अवशेषी क्षमता (Functional Residual Capacity) के रूप में हमेशा फेफड़ों में बना रहता है जिसे बाहर नहीं निकाला जा सकता।
- 3. हृदय चक्र (Cardiac Cycle) के दौरान, जब आलिंद सिस्टॉल (Atrial systole) होता है, तो निलयों में लगभग 70% रक्त का सक्रिय प्रवाह होता है, जबकि शेष 30% रक्त आलिंदों के संकुचन के कारण निलय में पंप होता है।
- 4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में, मस्तिष्क के आवरण (Meninges) की मध्य परत 'एरेक्नॉइड मेटर' (Arachnoid mater) और आंतरिक परत 'पाय मेटर' के बीच के स्थान में सेरेब्रॉस्पाइनल द्रव (CSF) प्रवाहित होता है, जो मस्तिष्क को आघातों से बचाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि आमाशय की पैराइटल या ऑक्सिंटिक कोशिकाओं द्वारा HCl और कैसल इंट्रिंसिक फैक्टर का स्रावण होता है, जो विटामिन B12 के अवशोषण में मदद करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि कार्यात्मक अवशेषी क्षमता (FRC), जो सामान्य निःश्वसन के बाद फेफड़ों में शेष हवा (ERV + RV) है, कुल फेफड़ों की क्षमता (TLC) का लगभग 40% होती है, न कि 70%। कथन 3 गलत है क्योंकि आलिंद सिस्टॉल के दौरान निलयों में केवल 30% रक्त का प्रवाह होता है, जबकि शेष 70% रक्त आलिंदों के शिथिलन (Diastole) के दौरान गुरुत्वाकर्षण और वेनस रिटर्न के कारण निष्क्रिय रूप से निलयों में भर जाता है। कथन 4 सही है, मस्तिष्क और मेरुरज्जु के चारों ओर पाए जाने वाले मैनिंजेस के बीच सबएरेक्नॉइड स्पेस में सेरेब्रॉस्पाइनल द्रव भरा होता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मानव शरीर के पाचन, श्वसन और तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय में जठर रस (Gastric juice) के भीतर मौजूद 'पेप्सिनोजन' एक निष्क्रिय एंजाइम है, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) की उपस्थिति में सक्रिय पेप्सिन में बदल जाता है और यह प्रोटीन को प्रोटीज तथा पेप्टोन में जलसघटित करता है।
2. फुफ्फुसीय वेंटिलेशन (Pulmonary ventilation) के दौरान, जब बाहरी अंतःश्वसन पेशियां (बाहरी इंटरकोस्टल मांसपेशियाँ और डायाफ्राम) संकुचित होती हैं, तो वक्ष गुहा का आयतन बढ़ जाता है जिसके परिणामस्वरूप फेफड़ों के भीतर का अंतःफुफ्फुसीय दबाव वायुमंडलीय दबाव से अधिक हो जाता है।
3. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के न्यूरॉन्स में 'मिएलिन आच्छद' (Myelin sheath) का निर्माण परिधीय तंत्रिका तंत्र में श्वान कोशिकाओं द्वारा तथा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में ऑलिगोडेंड्रोसाइट्स द्वारा होता है, जो तंत्रिका आवेगों के संचरण की गति को साल्टेटरी संवहन के माध्यम से तीव्र करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर के परिसंचरण और श्वसन तंत्र के नियंत्रण एवं नियमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेडुला ऑब्लोंगाटा (Medulla oblongata) में स्थित श्वसन केंद्र मुख्य रूप से रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) और हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) की सांद्रता में होने वाले परिवर्तनों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है, जबकि ऑक्सीजन ($O_2$) की सांद्रता का श्वसन लय के नियंत्रण पर प्रत्यक्ष प्रभाव बहुत कम होता है।
2. महाधमनी चाप (Aortic arch) और कैरोटिड धमनी (Carotid artery) में स्थित परिधीय केमोरिसेप्टर (Peripheral chemoreceptors) रक्त में $O_2$ के आंशिक दाब में उल्लेखनीय गिरावट का पता लगाते हैं, और आपातकालीन स्थिति में श्वसन दर को बढ़ाने के लिए संकेत भेजते हैं।
3. हृदय की अपनी पेशीय स्वतः उत्तेजन क्षमता (Myogenic nature) होती है, जिसके कारण हृदय की धड़कन की गति का प्राथमिक पेसमेकर 'सिनोएट्रियल नोड' (SAN) तंत्रिका तंत्र की प्रत्यक्ष प्रेरणा के बिना स्वतः क्रिया विभव उत्पन्न करता है, हालांकि स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (ANS) और अधिवृक्क हार्मोन्स इसकी दर को संशोधित (Modulate) कर सकते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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परमाणु की संरचना कैसी है?
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भारी जल (Heavy Water) का रासायनिक सूत्र क्या है?
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के प्रथम नियम के अनुसार, जब भी किसी बंद कुंडली से संबंधित चुंबकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) में परिवर्तन होता है, तो उस कुंडली में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) उत्पन्न होता है।
2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जिसके अनुसार प्रेरित विद्युत वाहक बल या धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है।
3. स्वप्रेरकत्व (Self-inductance) का एसआई मात्रक 'हेनरी' (Henry) है, और यह किसी कुंडली की वह क्षमता है जिसके कारण वह अपने अंदर प्रवाहित होने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करती है।
4. भंवर धाराएँ (Eddy currents) केवल चालकों के सिरों पर उत्पन्न होने वाली पृष्ठीय परिघटना हैं और इनका उपयोग किसी भी व्यावहारिक या औद्योगिक अनुप्रयोग में नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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