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General Science
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि किसी सूक्ष्म कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) की स्थिति और उसके संवेग का एक ही समय में पूर्ण रूप से यथार्थ निर्धारण करना असंभव है, और इनकी अनिश्चितताओं का गुणनफल प्लांक नियतांक के आधे के बराबर या उससे अधिक होता है।
- 2. पाऊि का अपवर्जन नियम (Pauli Exclusion Principle) के अनुसार, किसी परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं ($n, l, m, s$) के मान सर्वसम (समान) नहीं हो सकते हैं, जिसका अर्थ है कि एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन ही आ सकते हैं और उनके चक्रण (Spin) विपरीत दिशा में होने चाहिए।
- 3. 'हंड का बहुलकता नियम' (Hund's Rule of Maximum Multiplicity) यह बताता है कि समकक्षीय कक्षकों (Degenerate Orbitals) में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक प्रारंभ नहीं होता, जब तक कि प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन समचक्रण के साथ न भर जाए।
- 4. मुख्य क्वांटम संख्या ($n$) इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा और कक्षक के आकार को निर्धारित करती है, जबकि द्विमांशाजी या दिगंशी क्वांटम संख्या ($l$) कक्षक की त्रि-विमीय ज्यामिति या आकृति को निरूपित करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के मूल सिद्धांतों के अनुसार पूर्णतः सत्य हैं। हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार $\Delta x \cdot \Delta p \ge \frac{h}{4\pi}$ होता है, जो सूक्ष्म कणों के प्रयोगात्मक मापन की मूल सीमा को दर्शाता है। पाऊली का अपवर्जन नियम और हुंड का नियम इलेक्ट्रॉनों के कक्षकीय विन्यास को स्पष्ट करते हैं। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
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मानव शरीर में पोषण, जैविक अणुओं और विटामिनों की चयापचय क्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B12 (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विलेय विटामिन है जो शरीर में, विशेषकर यकृत में, कई महीनों से लेकर वर्षों तक संचित रह सकता है, और इसके अवशोषण के लिए आमाशय द्वारा स्रावित 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) अनिवार्य होता है।
2. 'क्वाशियोरकोर' (Kwashiorkor) रोग केवल लंबे समय तक कुल कैलोरी (ऊर्जा) की गंभीर कमी के कारण होता है, जबकि 'मरास्मस' (Marasmus) प्रोटीन और कैलोरी दोनों की एक साथ कमी का परिणाम है।
3. वसा में घुलनशील विटामिन 'विटामिन E' (टोकोफेरोल) एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है जो कोशिका झिल्ली को लिपिड पेरोक्सीडेशन से बचाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में क्रमिक वृद्धि होने के कारण परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius) में सामान्यतः कमी आती है, किंतु शून्य वर्ग (अक्रिय गैसों) की वान डेर वाल्स त्रिज्या उनके ठीक पहले के हैलोजन तत्वों की सहसंयोजक त्रिज्या की तुलना में काफी बड़ी होती है।
2. नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (First Ionization Enthalpy) का मान ऑक्सीजन की तुलना में अधिक होता है, जिसका प्रमुख कारण नाइट्रोजन के $2p^3$ कक्षक का पूर्ण रूप से भरा होना (Fully-filled) है।
3. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और आवर्त सारणी में फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी क्लोरीन की तुलना में अधिक ऋणात्मक होती है क्योंकि फ्लोरीन का परमाणु आकार बहुत छोटा होता है।
4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के प्रभाव के कारण, 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे हाफ्नियम, Hf) की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग उनके ठीक ऊपर स्थित 4d श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम, Zr) के लगभग समान हो जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के वैचारिक और मात्रात्मक पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis Acids) वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर सकती हैं, और केंद्रीय परमाणु के संयोजी कोष में अष्टक अपूर्ण रखने वाले यौगिक (जैसे $BF_3$) तथा सामान्यतः सभी धनावेशित आयन इस श्रेणी में आते हैं।
2. जब एक दुर्बल अम्ल ($CH_3COOH$) को उसके प्रबल क्षार ($NaOH$) के साथ उदासीनीकरण कराया जाता है, तो तुल्यांकी बिंदु पर बनने वाले लवण के जल-अपघटन के कारण विलयन का pH मान 7 से कम (अम्लीय) होता है।
3. ब्रॉन्स्टेड-लाउरी अवधारणा के अनुसार, किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार (Conjugate base) अत्यंत दुर्बल होता है, जबकि जल अपनी उभयधर्मी (Amphoteric) प्रकृति के कारण ब्रॉन्स्टेड अम्ल और ब्रॉन्स्टेड क्षार दोनों के रूप में कार्य कर सकता है।
4. बफर विलयन (Buffer solution) वे विलयन होते हैं जो थोड़ी मात्रा में अम्ल या क्षार मिलाने पर अपने pH मान में परिवर्तन का विरोध करते हैं, और अम्लीय बफर विलयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण दुर्बल अम्ल और उसके प्रबल क्षार से बने लवण का जलीय मिश्रण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव आँख?
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मानव शरीर में प्रतिजैविक (Antibiotics) के अत्यधिक या गलत उपयोग से 'प्लाज्मिड-मध्यस्थित एंटीबायोटिक प्रतिरोध' (Plasmid-mediated antibiotic resistance) मुख्य रूप से किस जैविक प्रक्रिया के माध्यम से एक जीवाणु से दूसरे जीवाणु में तेजी से फैलता है?
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