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General Science
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आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी परमाणु की आयनन एंथैल्पी (Ionization Enthalpy) वह ऊर्जा है जो गैसीय अवस्था में एक विलगित परमाणु से सबसे ढीले बंधे इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक होती है, और आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने के कारण इसका मान सामान्यतः बढ़ता जाता है।
  2. 2. 'परमाणु त्रिज्या' (Atomic Radius) के आवर्तिता के अनुसार, किसी आवर्त में क्षार धातुओं (Group 1) का आकार सबसे बड़ा और हैलोजेन (Group 17) का आकार सबसे छोटा होता है, क्योंकि आवर्त में आगे बढ़ने पर नए कक्ष (Shell) जुड़ते हैं जो आकार को बढ़ाते हैं।
  3. 3. संक्रमण तत्वों (d-ब्लॉक) में बाएं से दाएं जाने पर परमाण्विक त्रिज्याओं में परिवर्तन बहुत कम होता है, जिसका मुख्य कारण आंतरिक कक्षकों (जैसे 3d या 4d) के इलेक्ट्रॉनों द्वारा 'परिरक्षण प्रभाव' (Shielding Effect) का नागण्य होना और नाभिकीय आकर्षण का संतुलित रहना है।
  4. 4. पॉलिंग पैमाने के अनुसार विद्युतऋणाता (Electronegativity) किसी सहसंयोजक बंध में साझे के इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता को दर्शाती है, और आवर्त सारणी में ऊपर से नीचे आने पर मुख्य क्वांटम संख्या बढ़ने के कारण यह घटती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि आयनन एंथैल्पी किसी गैसीय परमाणु से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा है और आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर नाभिकीय आवेश बढ़ने से यह बढ़ती है। कथन 2 गलत है क्योंकि किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर नए कक्ष नहीं जुड़ते, बल्कि मुख्य क्वांटम संख्या वही रहती है और प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने से आकार घटता है, जिससे क्षार धातुएं सबसे बड़ी और हैलोजन सबसे छोटी होती हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि संक्रमण श्रेणियों में परमाण्विक त्रिज्याओं में बहुत कम परिवर्तन का मुख्य कारण d-इलेक्ट्रॉनों का 'दुर्बल परिरक्षण प्रभाव' (Poor shielding effect) होता है, जो बढ़ते नाभिकीय आवेश के प्रभाव को संतुलित करता है, न कि परिरक्षण का नगण्य होना। कथन 4 सही है क्योंकि पॉलिंग पैमाने के अनुसार विद्युतऋणाता ऊपर से नीचे आने पर घटती है। आवर्त सारणी की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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