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मानव शरीर में जैविक अणुओं और पोषण (विटामिन, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. विटामिन $B_{12}$ (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विलेय विटामिन है जो मानव शरीर में यकृत (Liver) और अन्य ऊतकों में कई वर्षों तक संग्रहीत रह सकता है, और इसके अवशोषण के लिए आमाशय की पैरीटाल कोशिकाओं द्वारा स्रावित 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) अनिवार्य होता है।
  2. 2. प्रोटीन संरचना के संदर्भ में, प्रोटीनों की 'तृतीयक संरचना' (Tertiary structure) पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला की त्रि-आयामी वलय को दर्शाती है, जो हाइड्रोजन आबंध, आयनिक आबंध, वैन डेर वाल्स बलों और डाइसल्फ़ाइड आबंधों द्वारा स्थायी बनती है, और यह संरचना एंजाइमी सक्रियता के लिए पूर्णतः आवश्यक होती है।
  3. 3. कार्बोहाइड्रेट चयापचय में, 'सेलूलोज' एक ऐसा सम-पॉलीसैराइड (Homopolysaccharide) है जिसमें ग्लूकोज इकाइयाँ $eta$-1,4-ग्लाइकोसिडिक बंध द्वारा जुड़ी होती हैं, और मानव पाचन तंत्र में इसे पचाने वाले एंजाइम (सेल्युलेज) की अनुपस्थिति के कारण यह ऊर्जा प्रदान नहीं करता, बल्कि आंतों में आहारीय फाइबर (Dietary fiber) के रूप में कार्य करता है।
  4. 4. वसा-विलेय विटामिन 'विटामिन A' (रेटिनॉल) की अत्यधिक कमी से केवल नेत्र संबंधी विकार जैसे कि जीरोथैल्मिया और रतौंधी होती है, और इसका अत्यधिक सेवन (हाइपरविटामिनोसिस A) मानव शरीर में किसी भी प्रकार की विषैली प्रतिक्रिया या ऊतक क्षति उत्पन्न नहीं करता क्योंकि यह मूत्र के माध्यम से आसानी से उत्सर्जित हो जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

मानव पोषण और जैविक अणुओं के संदर्भ में कथन 1, 2 और 3 सही हैं, जबकि कथन 4 गलत है। कथन 4 असत्य है क्योंकि विटामिन A एक वसा-विलेय विटामिन है, और यकृत में इसके अत्यधिक संचय से 'हाइपरविटामिनोसिस ए' (Hypervitaminosis A) नामक गंभीर विषैली स्थिति उत्पन्न हो सकती है, क्योंकि यह जल-विलेय विटामिनों की तरह मूत्र के रास्ते आसानी से उत्सर्जित नहीं होता है। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और विटामिन जैसे आवश्यक पोषक तत्वों के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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'पाद-पाउंड-सेकंड' (FPS) पद्धति में बल की निरपेक्ष इकाई 'पाउंडल' (Poundal) होती है, जबकि गुरुत्वीय इकाई 'पाउंड-बल' (lbf) होती है। 3. पार्कोसेक या खगोलीय इकाई जैसी बड़ी दूरियों के मापन के लिए 'लंबन विधि' (Parallax method) का उपयोग किया जाता है, जिसमें प्रेक्षण बिंदु के दो अलग-अलग स्थानों से किसी दूरस्थ तारे की स्थिति में होने वाले आभासी विस्थापन का उपयोग किया जाता है। 4. किसी भौतिक राशि का विमीय सूत्र (Dimensional formula) उस राशि की प्रकृति को पूरी तरह स्पष्ट करता है और यह सुनिश्चित करता है कि विभिन्न प्रणालियों में उसके मात्रक का संख्यात्मक मान हमेशा नियत रहे, चाहे मात्रक की पद्धति कोई भी हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → ध्वनि तरंगों और तरंग गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी गैस में ध्वनि की चाल उस गैस के निरपेक्ष तापमान के वर्गमूल के सीधे आनुपातिक होती है, तथा गैस के घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है। 2. लाप्लास द्वारा न्यूटन के ध्वनि की चाल के सूत्र में किए गए संशोधन के अनुसार, वायु में ध्वनि का संचरण एक समता isothermal प्रक्रिया है, क्योंकि संपीडन और विरलन के दौरान उत्पन्न ऊष्मा तुरंत परिवेश में स्थानांतरित हो जाती है। 3. जब एक अनुदैर्ध्य ध्वनि तरंग सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है, किंतु तरंगदैर्ध्य और वेग दोनों में परिवर्तन हो जाता है। 4. डॉप्लर प्रभाव के अनुसार, जब ध्वनि स्रोत और श्रोता एक-दूसरे की ओर गति करते हैं, तो श्रोता द्वारा सुनी जाने वाली आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से कम प्रतीत होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों के जैविक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 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