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ध्वनि तरंगों और तरंग गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी गैस में ध्वनि की चाल उस गैस के निरपेक्ष तापमान के वर्गमूल के सीधे आनुपातिक होती है, तथा गैस के घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
- 2. लाप्लास द्वारा न्यूटन के ध्वनि की चाल के सूत्र में किए गए संशोधन के अनुसार, वायु में ध्वनि का संचरण एक समता isothermal प्रक्रिया है, क्योंकि संपीडन और विरलन के दौरान उत्पन्न ऊष्मा तुरंत परिवेश में स्थानांतरित हो जाती है।
- 3. जब एक अनुदैर्ध्य ध्वनि तरंग सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है, किंतु तरंगदैर्ध्य और वेग दोनों में परिवर्तन हो जाता है।
- 4. डॉप्लर प्रभाव के अनुसार, जब ध्वनि स्रोत और श्रोता एक-दूसरे की ओर गति करते हैं, तो श्रोता द्वारा सुनी जाने वाली आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से कम प्रतीत होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि किसी गैस में ध्वनि की चाल $v = \sqrt{\frac{\gamma RT}{M}}$ के अनुसार तापमान के वर्गमूल के समानुपाती और घनत्व के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि लाप्लास संशोधन के अनुसार वायु में ध्वनि का संचरण एक **रुद्धोष्म (Adiabatic)** प्रक्रिया है, न कि समतापीय, क्योंकि यह प्रक्रिया इतनी तीव्र होती है कि ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं हो पाता है। कथन 3 सही है क्योंकि माध्यम बदलने पर तरंग की आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है जबकि वेग और तरंगदैर्ध्य बदल जाते हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि स्रोत और श्रोता के एक-दूसरे के पास आने पर आभासी आवृत्ति **अधिक** प्रतीत होती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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मानव शरीर में जैविक अणुओं और पोषण (विटामिन, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन $B_{12}$ (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विलेय विटामिन है जो मानव शरीर में यकृत (Liver) और अन्य ऊतकों में कई वर्षों तक संग्रहीत रह सकता है, और इसके अवशोषण के लिए आमाशय की पैरीटाल कोशिकाओं द्वारा स्रावित 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) अनिवार्य होता है।
2. प्रोटीन संरचना के संदर्भ में, प्रोटीनों की 'तृतीयक संरचना' (Tertiary structure) पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला की त्रि-आयामी वलय को दर्शाती है, जो हाइड्रोजन आबंध, आयनिक आबंध, वैन डेर वाल्स बलों और डाइसल्फ़ाइड आबंधों द्वारा स्थायी बनती है, और यह संरचना एंजाइमी सक्रियता के लिए पूर्णतः आवश्यक होती है।
3. कार्बोहाइड्रेट चयापचय में, 'सेलूलोज' एक ऐसा सम-पॉलीसैराइड (Homopolysaccharide) है जिसमें ग्लूकोज इकाइयाँ $eta$-1,4-ग्लाइकोसिडिक बंध द्वारा जुड़ी होती हैं, और मानव पाचन तंत्र में इसे पचाने वाले एंजाइम (सेल्युलेज) की अनुपस्थिति के कारण यह ऊर्जा प्रदान नहीं करता, बल्कि आंतों में आहारीय फाइबर (Dietary fiber) के रूप में कार्य करता है।
4. वसा-विलेय विटामिन 'विटामिन A' (रेटिनॉल) की अत्यधिक कमी से केवल नेत्र संबंधी विकार जैसे कि जीरोथैल्मिया और रतौंधी होती है, और इसका अत्यधिक सेवन (हाइपरविटामिनोसिस A) मानव शरीर में किसी भी प्रकार की विषैली प्रतिक्रिया या ऊतक क्षति उत्पन्न नहीं करता क्योंकि यह मूत्र के माध्यम से आसानी से उत्सर्जित हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर काटते हुए उपग्रह का कोणीय संवेग (Angular Momentum) नियत रहता है, क्योंकि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा लगाया जाने वाला बल आघूर्ण (Torque) शून्य होता है।
2. यदि पृथ्वी की सतह के निकट परिक्रमा कर रहे किसी उपग्रह का कक्षीय वेग उसके वर्तमान मान का $\sqrt{2}$ गुना (यानि लगभग 41.4% की वृद्धि) कर दिया जाए, तो वह उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को पार कर पलायन कर जाएगा।
3. तुल्यकालिक उपग्रह (Geostationary satellite) की पृथ्वी की सतह से ऊँचाई लगभग 36,000 किलोमीटर होती है, और यह उपग्रह विषुवत वृत्त के ऊपर पश्चिम से पूर्व दिशा में पृथ्वी की परिक्रमा करता है।
4. उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता (Weightlessness) का अनुभव होता है, जिसका प्रमुख कारण यह है कि अंतरिक्ष में पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल पूरी तरह से शून्य हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत परिपथों और चालकों के प्रतिरोध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक का विद्युत प्रतिरोध उसके पदार्थ की प्रकृति, उसकी लंबाई के सीधे आनुपातिक और उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है, जबकि विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करता है।
2. जब कई प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम (Series combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध के योग से कम होता है, और सभी प्रतिरोधकों से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का मान भिन्न-भिन्न होता है।
3. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में, कुछ विशेष पदार्थों का प्रतिरोध अति-निम्न तापमान (क्रांतिक तापमान) पर घटकर शून्य हो जाता है, जिससे वे बिना किसी ऊर्जा ह्रास के विद्युत धारा प्रवाहित करने लगते हैं।
4. किर्चॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम या KCL) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि पर मिलने वाली समस्त विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं, और सभी धनावेशित आयन तथा अष्टक-अपूर्ण यौगिक (जैसे $BF_3$) उत्कृष्ट लुईस अम्ल के रूप में कार्य करते हैं।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के अनुसार, एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में केवल एक प्रोटॉन ($H^+$) का अंतर होता है, और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार अत्यधिक दुर्बल होता है।
3. जब किसी दुर्बल अम्ल के लवण को उसके प्रबल क्षार के साथ जल में घोला जाता है, तो जल-अपघटन (Hydrolysis) के फलस्वरूप प्राप्त जलीय विलयन की प्रकृति अम्लीय होती है और विलयन का pH मान 7 से कम होता है।
4. जल के स्व-आयनन (Self-ionization) के कारण, शुद्ध जल का आयनिक गुणनफल ($K_w$) तापमान पर निर्भर करता है, और तापमान बढ़ाने पर $K_w$ का मान बढ़ने से शुद्ध जल का pH मान 7 से कम हो जाता है, यद्यपि वह रासायनिक रूप से उदासीन ही रहता है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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