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General Science
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विद्युत परिपथों और उससे संबंधित नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी चालक के भीतर मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग (Drift Velocity) बहुत कम होता है (लगभग $10^{-4} \text{ m/s}$ की कोटि का), फिर भी परिपथ में स्विच ऑन करते ही प्रकाश की गति से विद्युत सिगनल प्रवाहित होता है क्योंकि विद्युत क्षेत्र की प्रसार गति प्रकाश के वेग के बराबर होती है।
- 2. जब वीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge) संतुलन की अवस्था में होता है, तो गैल्वेनोमीटर से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है, और इस स्थिति में यदि गैल्वेनोमीटर और सेल के स्थान को आपस में बदल दिया जाए, तो सेतु का संतुलन बिंदु बिगड़ जाता है।
- 3. अतिचालकता (Superconductivity) के दौरान कुछ पदार्थों का विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है और वे चुंबकीय क्षेत्र को अपने भीतर से बाहर धकेल देते हैं, जिसे 'मीस्नर प्रभाव' (Meissner Effect) कहा जाता है।
- 4. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम / KVL) ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है, जो यह बताता है कि किसी बंद पाश (Closed Loop) में कुल विद्युत वाहक बलों का बीजगणितीय योग उस पाश में होने वाले विभिन्न प्रतिरोधों के सिरों पर विभव पतनों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि चालकों में इलेक्ट्रॉनों का अनुगमन वेग बहुत कम होता है, परंतु विद्युत क्षेत्र लगभग प्रकाश की गति से पूरे परिपथ में संचारित होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि वीटस्टोन सेतु की व्युत्क्रमणीयता (Reciprocity) के सिद्धांत के अनुसार, यदि गैल्वेनोमीटर और सेल के स्थान को आपस में बदल दिया जाए, तो भी सेतु का संतुलन अप्रभावित रहता है। कथन 3 सही है, अतिचालक अवस्था में मीस्नर प्रभाव के कारण पदार्थ पूर्ण Diamagnetic व्यवहार प्रदर्शित करते हैं। कथन 4 सही है, किर्चॉफ का द्वितीय नियम ऊर्जा संरक्षण का पालन करता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन के रासायनिक व्यवहार, समावयवता (Isomerism) और उनकी अभिक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्काइन्स (Alkynes) में त्रिक बंध (Triple bond) उपस्थित होने के बावजूद ये इलेक्ट्रॉनेस्नेही योगात्मक (Electrophilic addition) अभिक्रियाओं की तुलना में अधिक आसानी से नाभिकस्नेही योगात्मक अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करते हैं क्योंकि इनका कार्बन-कार्बन त्रिक बंध इलेक्ट्रॉन घनत्व से भरपूर होता है।
2. बेन्जीन और उसके व्युत्पन्न (ऐरोमैटिक हाइड्रोकार्बन) हकल के नियम ($4n+2$ पाई इलेक्ट्रॉन) का पालन करते हैं और वे अपनी उच्च असंतृप्ति के बावजूद योगात्मक अभिक्रियाओं के बजाय आसानी से इलेक्ट्रॉनेस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ (Electrophilic substitution reactions) देते हैं।
3. मुक्त मूलक प्रतिस्थापन (Free-radical substitution) अभिक्रियाओं में एल्केन्स का हैलोजनीकरण एक श्रृंखला अभिक्रिया (Chain reaction) के रूप में होता है, जिसमें ब्रोमीन की तुलना में क्लोरीन की क्रियाशीलता अत्यधिक तीव्र और कम वरनात्मक (Less selective) होती है।
4. ज्यामितीय समावयवता (Geometric Isomerism) प्रदर्शित करने के लिए किसी यौगिक में प्रतिबंधित घूर्णन (Restricted rotation) का होना अनिवार्य है, और एल्कीन्स के सिस्ट-ट्रान्स (Cis-Trans) समावयवियों के भौतिक गुण जैसे द्विध्रुव आघूर्ण और क्वथनांक भिन्न-भिन्न होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अम्ल, क्षार और लवण के रासायनिक व्यवहार तथा विभिन्न संकल्पनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरहेनियस संकल्पना के अनुसार, अम्ल वे पदार्थ हैं जो जलीय विलयन में हाइड्रोजन आयन ($H^+$) उत्पन्न करते हैं, जबकि क्षार वे हैं जो हाइड्रॉक्साइड आयन ($OH^-$) देते हैं, किंतु यह संकल्पना केवल जलीय माध्यम तक ही सीमित है और निर्जलीय विलायकों में इसकी व्याख्या नहीं कर पाती।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के अनुसार, एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में केवल एक प्रोटॉन ($H^+$) का अंतर होता है, और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार अत्यधिक दुर्बल प्रवृत्ति का होता है।
3. जब किसी दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण (जैसे सोडियम एसिटेट - $CH_3COONa$) का जल अपघटन किया जाता है, तो प्राप्त जलीय विलयन की प्रकृति अम्लीय होती है और इसका pH मान 7 से कम होता है।
4. लुईस संकल्पना के अनुसार, वे सभी स्पीशीज जो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair of electrons) ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं, 'लुईस क्षार' कहलाती हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने वाली स्पीशीज 'लुईस अम्ल' होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आनुवंशिकी का जनक किसे माना जाता है?
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