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General Science
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जीवाणुभोजी (Bacteriophage) और आनुवंशिक विकास के संदर्भ में, 'हर्शेल और चेस के प्रयोग' (Hershey-Chase experiment) तथा 'डीएनए प्रतिकृति' (DNA replication) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हर्शेल और चेस ने अपने प्रयोग में रेडियोएक्टिव सल्फर ($^{35}S$) का उपयोग डीएनए को चिन्हित करने के लिए और रेडियोएक्टिव फॉस्फोरस ($^{32}P$) का उपयोग प्रोटीन आवरण को चिन्हित करने के लिए किया था, जिससे यह सिद्ध हुआ कि आनुवंशिक पदार्थ प्रोटीन है।
  2. 2. मेसेल्सन और स्टाल (Meselson and Stahl) ने एस्चेरिचिया कोलाई ($E. coli$) पर अपने प्रयोग द्वारा यह प्रमाणित किया कि डीएनए की प्रतिकृति 'संरक्षी' (Conservative) प्रकार की होती है, जिसमें मूल डीएनए अणु का दोनों स्ट्रैंड सुरक्षित रहता है और एक नया दोहरा स्ट्रैंड बनता है।
  3. 3. डीएनए पोलीमरेज एंजाइम हमेशा $5' \rightarrow 3'$ दिशा में नए स्ट्रैंड के संश्लेषण को उत्प्रेरित करता है, जिसके कारण रज्जुक (Strand) का निर्माण दो रूपों में होता है—एक 'अग्रगामी रज्जुक' (Leading strand) जो सतत रूप से बनता है और दूसरा 'पश्चगामी रज्जुक' (Lagging strand) जो छोटे खंडों (ओकाजाकी खंड) के रूप में असंतत रूप से संश्लेषित होता है।
  4. 4. आनुवंशिक कूट (Genetic code) त्रिक (Triplet) प्रकृति का होता है, यानी तीन नाइट्रोजन क्षारकों का एक समूह एक अमीनो अम्ल को कोड करता है, और यह कूट 'अपहृत' (Degenerate) होता है क्योंकि एक से अधिक प्रकूट (Codon) एक ही अमीनो अम्ल के लिए कोड कर सकते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि अल्फ्रेड हर्शेल और मार्था चेस (1952) ने रेडियोएक्टिव फॉस्फोरस ($^{32}P$) का उपयोग डीएनए को चिन्हित करने के लिए (क्योंकि फॉस्फोरस डीएनए में होता है लेकिन प्रोटीन में नहीं) और रेडियोएक्टिव सल्फर ($^{35}S$) का उपयोग प्रोटीन आवरण को चिन्हित करने के लिए (क्योंकि सल्फर प्रोटीन के अमीनो अम्लों में होता है लेकिन डीएनए में नहीं) किया था। इस प्रयोग से यह सिद्ध हुआ कि डीएनए ही आनुवंशिक पदार्थ है। कथन 2 गलत है क्योंकि मेसेल्सन और स्टाल ने $E. coli$ पर भारी नाइट्रोजन ($^{15}N$) का उपयोग करके यह सिद्ध किया कि डीएनए की प्रतिकृति 'अर्ध-संरक्षी' (Semi-conservative) होती है, न कि संरक्षी। कथन 3 सही है; डीएनए पोलीमरेज केवल $5' \rightarrow 3'$ दिशा में कार्य कर सकता है, जिससे लीडिंग स्ट्रैंड संतत और लैगिंग स्ट्रैंड ओकाजाकी खंडों के रूप में बनता है। कथन 4 सही है, आनुवंशिक कूट त्रिक और अपहृत (Degenerate) होते हैं। विकिपीडिया संदर्भ
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'कार्य-ऊर्जा प्रमेय' (Work-Energy Theorem) के अनुसार, किसी पिंड पर सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है, और यह प्रमेय केवल संरक्षी बलों के लिए ही वैध है, असंरक्षी बलों (जैसे घर्षण बल) के लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है। 3. जब कोई पिंड किसी ऊर्ध्वाधर वृत्त में ऊर्ध्वाधर तल पर चक्कर लगाता है, तो डोरी के न्यूनतम बिंदु (सबसे नीचे के बिंदु) पर डोरी में तनाव का मान सर्वोच्च बिंदु (सबसे ऊपर के बिंदु) पर तनाव के मान से हमेशा उसके भार के छह गुने ($6mg$) के अंतर के बराबर होता है। 4. अप्रत्यास्थ टक्कर (Inelastic Collision) के दौरान संवेग संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Momentum) हमेशा लागू होता है, किंतु कुल गतिज ऊर्जा संरक्षित नहीं रहती है, और ऊर्जा का एक हिस्सा ऊष्मा, ध्वनि या विरूपण (deformation) के रूप में हास हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं में केंद्रक आवरण (Nuclear envelope), अंतःझिल्ली तंत्र (Endomembrane system) और कोशिका विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केंद्रक आवरण दो समानांतर झिल्लियों से बना होता है जिनके बीच 10 से 50 नैनोमीटर का स्थान होता है, जिसे परिकेंद्रकीय अवकाश (Perinuclear space) कहते हैं, और इसकी बाहरी झिल्ली सामान्यतः खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (RER) से जुड़ी होती है तथा उस पर राइबोसोम चिपके होते हैं। 2. गॉल्जी उपकरण (Golgi apparatus) का 'cis' (निर्माण) चेहरा परिपक्वता क्षेत्र के रूप में अंतर्द्रव्यी जालिका के विपरीत दिशा में प्लाज्मा झिल्ली की ओर स्थित होता है, जबकि 'trans' (परिपक्व) चेहरा हमेशा केंद्रक की ओर उन्मुख होता है। 3. समसूत्री विभाजन (Mitosis) की मध्यावस्था (Metaphase) के दौरान गुणसूत्र कोशिका के मध्य रेखा पर व्यवस्थित होते हैं और तर्कु तंतु (Spindle fibres) काइनेटोकौर (Kinetochore) से जुड़ जाते हैं, जबकि अनैच्छिक या पश्चावस्था (Anaphase) में सेंट्रोमियर का विभाजन होता है और सिस्टर क्रोमैटिड्स विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं। 4. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की डिप्लोटीन अवस्था में समझात गुणसूत्रों के बीच 'किएस्माटा' (Chiasmata) का निर्माण होता है, जो इस बात का संकेत है कि इस बिंदु पर क्रॉसिंग ओवर की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? 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