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General Science
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आनुवंशिक कोड क्या है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
ट्रिपलेट।
Related Questions
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ध्वनि तरंगों के संचरण, परावर्तन और डॉप्लर प्रभाव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी गैस में ध्वनि की चाल गैस के तापमान के वर्गमूल के सीधे समानुपातिक होती है, जबकि दाब में परिवर्तन का ध्वनि की चाल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि दाब और घनत्व में समानुपातिक परिवर्तन से उनका अनुपात नियत रहता है।
2. जब ध्वनि तरंगें एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती हैं, तो उनकी आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य दोनों अपरिवर्तित रहती हैं, किंतु वेग में परिवर्तन हो जाता है।
3. लाप्लास (Laplace) द्वारा न्यूटन के इस सूत्र में संशोधन किया गया कि ध्वनि का संचरण समतापीय (Isothermal) न होकर रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रिया है, क्योंकि संपीड़न और विरलन की प्रक्रिया इतनी तीव्र होती है कि ऊष्मा का आदान-प्रदान संभव नहीं हो पाता।
4. यदि ध्वनि के स्रोत और श्रोता के बीच आपेक्षिक गति हो, तो श्रोता द्वारा सुनी गई ध्वनि की आवृत्ति में परिवर्तन को 'डॉप्लर प्रभाव' कहा जाता है, और यह प्रभाव केवल अनुदैर्ध्य ध्वनि तरंगों पर ही लागू होता है तथा विद्युत चुंबकीय तरंगों पर लागू नहीं होता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राउल्ट के नियम द्वारा निर्धारित होता है।
2. 'वांट हॉफ गुणांक' ($i$) का मान यदि किसी वैद्युत अपघट्य के जलीय विलयन में संगुणन (Association) होता है, तो 1 से कम होता है, जबकि पूर्ण वियोजन की स्थिति में यह उत्पन्न होने वाले कुल आयनों की संख्या के बराबर होता है।
3. समांगी और विषमांगी उत्प्रेरण में, उत्प्रेरक रासायनिक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को बढ़ा देता है, जिससे अभिकारकों के अणुओं को ऊर्जा अवरोध पार करने में आसानी होती है और अभिक्रिया की दर तीव्र हो जाती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर काटते हुए उपग्रह की कुल ऊर्जा ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बंधा हुआ है।
2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) की परिक्रमण अवधि ठीक 24 घंटे होती है और यह पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर पूर्व से पश्चिम की ओर अपनी कक्षा में चक्कर लगाता है।
3. यदि पृथ्वी अपने वर्तमान अक्षीय घूर्णन की कोणीय चाल को बढ़ा दे, तो भूमध्य रेखा पर रखी वस्तुओं के भार में आभासी कमी आएगी, किंतु उपग्रहों की कक्षीय चाल पर इसका कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि यह केवल केंद्रीय पिंड के द्रव्यमान और उपग्रह की त्रिज्या पर निर्भर करती है।
4. किसी उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता (Weightlessness) का अनुभव होता है क्योंकि उपग्रह और उसमें स्थित यात्री दोनों ही पृथ्वी के केंद्र की ओर समान त्वरण से मुक्त पतन (Free fall) की स्थिति में होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कार्बनिक रसायन और हाइड्रोकार्बन के वैचारिक पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल (Single) सहसंयोजक बंध होते हैं, और ये मुख्य रूप से मुक्त मूलक प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं (Free radical substitution reactions) में भाग लेते हैं।
2. 'मार्कोवनीकॉव नियम' (Markovnikov's Rule) के अनुसार, किसी असममित एल्कीन पर सममित या असममित अभिकर्मक (जैसे HBr) के योग के दौरान, अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग उस द्विआबंधी कार्बन परमाणु से जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या अधिक होती है।
3. 'एसेटिलीन' (Acetylene) या एथाइन एक ऐल्काइन है, जिसे जब लाल तप्त लोहे की नली में 873 K तापमान पर प्रवाहित किया जाता है, तो यह चक्रीय बहुलकीकरण (Cyclic polymerization) के माध्यम से बेंजीन का निर्माण करता है।
4. पेट्रोलियम शोधन के दौरान 'ऑकोटेन संख्या' (Octane Number) पेट्रोल की 'अपस्फोटन-रोधी' (Anti-knocking) क्षमता का माप होती है, जिसमें उच्च ऑक्टेन संख्या वाला ईंधन (जैसे आइसो-ऑक्टेन) निम्न ऑक्टेन संख्या वाले ईंधन (जैसे एन-हेप्टेन) की तुलना में इंजन में बेहतर प्रदर्शन करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में होने वाले ऑटोइम्यून (स्वप्रतिरक्षी) रोगों और उनके रोग-शारीरिक (Pathophysiological) तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'हाशीमोटो थायरॉयडाइटिस' (Hashimoto's thyroiditis) एक स्वप्रतिरक्षी विकार है जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली थायरोग्लोबुलिन और थायराइड पेरोक्साइड एंजाइम के विरुद्ध एंटीबॉडी का उत्पादन करती है, जिससे क्रोनिक लिम्फैटिक थायरॉयडाइटिस और अंततः हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism) की स्थिति उत्पन्न होती है।
2. 'मायस्थेनिया ग्रेविस' (Myasthenia gravis) तंत्रिका-पेशी जंक्शन (Neuromuscular junction) को प्रभावित करने वाला एक विकार है, जिसमें एसिटylकोलाइन रिसेप्टर्स के विरुद्ध एंटीबॉडी उत्पन्न हो जाती हैं, जिससे कंकाल पेशियों में संकुचन का संचरण बाधित होता है और गंभीर पेशीय थकान (Muscle fatigue) होती है।
3. 'रूमेटाइड आर्थराइटिस' (Rheumatoid arthritis) एक प्रणालीगत ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें मुख्य रूप से लिम्फोसाइट्स और मैक्रोफेज साइनोवियल झिल्ली पर आक्रमण करते हैं, और यह रोग केवल अस्थिसंधियों (Joints) तक सीमित रहता है, इसका रक्त वाहिकाओं, फेफड़ों या अन्य अंगों पर कोई प्रणालीगत प्रभाव नहीं पड़ता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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