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डार्विन के प्राकृतिक चयन के सिद्धांत (Natural Selection) और आधुनिक संश्लेषण सिद्धांत (Modern Synthetic Theory of Evolution) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. डार्विन का प्राकृतिक चयन का सिद्धांत इस बात पर केंद्रित था कि व्यक्तिगत जीवों में होने वाले कायिक (Somatic) उत्परिवर्तन पीढ़ियों के दौरान संचयी रूप से वंशागत होते हैं, जो स्पीचिएशन (Speciation) का मुख्य कारण बनते हैं।
- 2. आधुनिक संश्लेषण सिद्धांत (Neo-Darwinism) के अनुसार, विकास की मूल इकाई 'व्यक्तिगत जीव' नहीं बल्कि 'समष्टि' (Population) है, और समष्टि की जीन आवृतियों में होने वाले परिवर्तन ही जैव विकास का आधार हैं।
- 3. 'जेनेटिक ड्रिफ्ट' (Genetic Drift) या आनुवंशिक अपवाह एक यादृच्छिक (Random) प्रक्रिया है जो छोटी समष्टियों में अधिक प्रभावी होती है और यह प्राकृतिक चयन के विपरीत, कभी-कभी लाभकारी एलील को भी समष्टि से पूर्णतः विलुप्त कर सकती है।
- 4. अनुकूलित विकिरण (Adaptive Radiation) एक ही पूर्वज से विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में नई जातियों के उद्भव की प्रक्रिया है, जिसका उत्कृष्ट उदाहरण डार्विन की फिंच (Darwin's Finches) और ऑस्ट्रेलियन मार्सुपियल हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि डार्विन और उनके समकालीन वैज्ञानिकों को आनुवंशिकी की सही जानकारी नहीं थी, और बाद में अगस्त वीजमैन ने सिद्ध किया कि केवल जनन कोशिकाओं (Germ cells) में होने वाले परिवर्तन ही वंशागत होते हैं, कायिक (Somatic) परिवर्तन नहीं। इसके अलावा, उत्परिवर्तन की अवधारणा बाद में जोड़ी गई थी। कथन 2 सत्य है, आधुनिक संश्लेषण सिद्धांत के अनुसार समष्टि (Population) ही विकास की इकाई है। कथन 3 सत्य है, जेनेटिक ड्रिफ्ट एक यादृच्छिक घटना है जो छोटी आबादी में एलील आवृत्तियों को प्रभावित करती है। कथन 4 सत्य है, एडाप्टिव रेडिएशन एक ही पूर्वज से विभिन्न जातियों के विकास को दर्शाता है। जैव विकास की विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और ABO तथा Rh रक्त समूह प्रणालियों के सूक्ष्म जैव-रासायनिक एवं immunotoxicolgical संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली में, रक्त समूह 'A' और 'B' के व्यक्तियों के प्लाज्मा में क्रमशः 'एंटी-B' और 'एंटी-A' एंटीबॉडी पाई जाती हैं, जो कि मुख्य रूप से IgM प्रकार की इम्युनोग्लोबुलिन होती हैं, और इनका आणविक आकार बड़ा होने के कारण ये प्लेसेंटा (अपरा) को पार करके गर्भस्थ शिशु तक नहीं पहुँच सकती हैं।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$) से ग्रसित व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर 'H-एंटीजन' का पूर्णतः अभाव होता है क्योंकि उनमें FUT1 (Fucosyltransferase 1) जीन का उत्परिवर्तन होता है, जिसके परिणामस्वरूप उनके प्लाज्मा में एंटी-A, एंटी-B के साथ-साथ एक शक्तिशाली 'एंटी-H' एंटीबॉडी भी प्राकृतिक रूप से उपस्थित होती है।
3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति मुख्य रूप से तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-ऋणात्मक (Rh⁻) पिता और एक Rh-धनात्मक (Rh⁺) माता से उत्पन्न होने वाला पहला शिशु Rh-धनात्मक होता है, और प्रसव के दौरान माँ के शरीर में एंटी-Rh एंटीबॉडी का निर्माण होता है।
4. रुधिर स्कंदन (Blood coagulation) की प्रक्रिया में कैल्शियम आयन ($Ca^{2+}$) एक आवश्यक सह-कारक के रूप में कार्य करता है, जो प्रोथ्रोम्बिन को सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदलने तथा फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील फाइब्रिन तंतुओं में बहुलीकृत करने के लिए अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के विभिन्न शारीरिक तंत्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय की 'पैरीटाल या ऑक्सिंटिक कोशिकाएँ' (Oxyntic cells) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Intrinsic factor) का स्रावण करती हैं, जो आंत में विटामिन $B_{12}$ के अवशोषण के लिए अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है।
2. फुफ्फुसीय वेंटिलेशन के दौरान बाह्य अंतरापर्शुक पेशियों और डायाफ्राम का संकुचन वक्षीय गुहा के आयतन को कम करता है, जिससे फेफड़ों के भीतर का अंतरापोषीय दाब वायुमंडलीय दाब से अधिक हो जाता है और वायु बाहर प्रवाहित होती है।
3. हृदय के चालन तंत्र में विद्युत आवेगों की शुरुआत सिनोट्रायल (SA) नोड से होती है, जिसे हृदय का प्राकृतिक 'पेसमेकर' कहा जाता है, और यह आवेग एट्रियोवेंट्रिकल (AV) नोड, बंडल ऑफ हिस तथा पर्किंजे तंतुओं से होते हुए निलयों के संकुचन को प्रेरित करता है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के अंतर्गत 'मस्तिष्क आवरण' (Meninges) की सबसे बाहरी और कठोर परत 'ड्यूरा मेटर' (Dura mater) होती है, और प्रमस्तिष्क (Cerebrum) का 'लिम्बिक तंत्र' (Limbic system) भावनाओं, प्रेरणा और कामुकता के नियमन में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और उनके ईंधनीय गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्केन्स (Alkanes) संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें सभी कार्बन-कार्बन बंध एकल (Single) सहसंयोजक होते हैं, और जब इनका अंशिक ऑक्सीकरण (Controlled oxidation) उत्प्रेरकों की उपस्थिति में कराया जाता है, तो ये विभिन्न प्रकार के ऑक्सीजन युक्त यौगिक जैसे ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड और carboxylic अम्ल बनाते हैं।
2. 'ऑकोटेन संख्या' (Octane number) पेट्रोल (गैसोलीन) की प्रज्वलन गुणवत्ता का माप है, और आइसो-ऑक्टेन (जिसकी ऑक्टेन संख्या 100 मानी जाती है) की तुलना में सीधी श्रृंखला वाले हाइड्रोकार्बन जैसे n-हेप्टेन (जिसकी ऑक्टेन संख्या 0 मानी जाती है) में 'अपस्फोटन' (Knocking) की प्रवृत्ति बहुत अधिक होती है।
3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, और इसे सुरक्षित भंडारण के लिए गंधहीन बनाया जाता है ताकि रिसाव होने पर इसकी तीव्र प्राकृतिक गंध से तुरंत पहचान की जा सके।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्काइन्स (Alkynes) त्रि-आबंध युक्त असंतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं, और अम्लीय प्रकृति प्रदर्शित करते हुए ये सोडियम धातु के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं, जिसका कारण $sp$ संकरित कार्बन से जुड़े हाइड्रोजन की उच्च अम्लता है।
2. जब एथिलीन ($C_2H_4$) की अभिक्रिया क्षारकिय पोटैशियम परमैंगनेट ($KMnO_4$) के ठंडे और तनु विलयन (बेयर अभिकर्मक) के साथ कराई जाती है, तो यह अभिक्रिया एक चक्रीय मैंगनेट एस्टर मध्यवर्ती के माध्यम से आगे बढ़ती है, जिससे ग्लाइकोल का निर्माण होता है और $KMnO_4$ का गुलाबी रंग गायब हो जाता है।
3. बेंजीन जैसे एरोमैटिक यौगिकों में इलेक्ट्रॉन्सनेही aromatic प्रतिस्थापन (Electrophilic Aromatic Substitution) अभिक्रियाओं के दौरान, नाइट्रोनियम आयन ($NO_2^+$) का जुड़ना एक दर-निर्धारक पद होता है, जो बेंजीन वलय के $\pi$-इलेक्ट्रॉन अभ्र पर आक्रमण करके एक मध्यवर्ती 'सिग्मा संकुल' (Arenium ion) का निर्माण करता है।
4. मार्कोवनिकोव नियम के विपरीत, पेरोक्साइड की उपस्थिति में प्रोपीन की हाइड्रोजन ब्रोमाइड ($HBr$) के साथ संकलन अभिक्रिया 'खराश प्रभाव' या पेरोक्साइड प्रभाव के अंतर्गत होती है, जिसमें मुक्त मूलक क्रियाविधि के कारण ब्रोमीन परमाणु उस कार्बन पर जुड़ता है जिसके पास कम हाइड्रोजन परमाणु होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में जैविक अणुओं, पोषण, विटामिन और उनके सह-एंजाइम (Coenzyme) रूपों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B1 (थiamin) का सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'थियामिन पाइरोफॉस्फेट' (TPP) है, जो कार्बोहाइड्रेट उपापचय के दौरान पाइरुवेट के एसिटाइल-CoA में ऑक्सीडेटिव विकार्बोक्सिलीकरण (Oxidative decarboxylation) के लिए आवश्यक होता है।
2. विटामिन B3 (नियासिन) का संश्लेषण मानव शरीर में आवश्यक अमीनो अम्ल 'ट्रिप्टोफैन' से हो सकता है, और इसके सक्रिय सह-एंजाइम रूप NAD+ तथा NADP+ कोशिकीय श्वसन में अपचयन-उपचयन (Redox) अभिक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
3. विटामिन C (एस्कॉर्बिक एसिड) शरीर में कोलेजन प्रोटीन के हाइड्रॉक्सीलेशन (Hydroxylation) के लिए आवश्यक प्रोलील और लिसिल हाइड्रॉक्सीलेज एंजाइम्स के लिए एक रिड्यूसिंग एजेंट के रूप में कार्य करता है, जिसकी कमी से स्कर्वी रोग होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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