त्वरित लिंक्स
General Science
10 views
मानव शरीर के विभिन्न शारीरिक तंत्रों (पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. आमाशय की 'पैरीटाल या ऑक्सिंटिक कोशिकाएँ' (Oxyntic cells) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के साथ-साथ 'कैसल का आंतरिक कारक' (Intrinsic factor) का स्रावण करती हैं, जो आंत में विटामिन $B_{12}$ के अवशोषण के लिए अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है।
- 2. फुफ्फुसीय वेंटिलेशन के दौरान बाह्य अंतरापर्शुक पेशियों और डायाफ्राम का संकुचन वक्षीय गुहा के आयतन को कम करता है, जिससे फेफड़ों के भीतर का अंतरापोषीय दाब वायुमंडलीय दाब से अधिक हो जाता है और वायु बाहर प्रवाहित होती है।
- 3. हृदय के चालन तंत्र में विद्युत आवेगों की शुरुआत सिनोट्रायल (SA) नोड से होती है, जिसे हृदय का प्राकृतिक 'पेसमेकर' कहा जाता है, और यह आवेग एट्रियोवेंट्रिकल (AV) नोड, बंडल ऑफ हिस तथा पर्किंजे तंतुओं से होते हुए निलयों के संकुचन को प्रेरित करता है।
- 4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के अंतर्गत 'मस्तिष्क आवरण' (Meninges) की सबसे बाहरी और कठोर परत 'ड्यूरा मेटर' (Dura mater) होती है, और प्रमस्तिष्क (Cerebrum) का 'लिम्बिक तंत्र' (Limbic system) भावनाओं, प्रेरणा और कामुकता के नियमन में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि आमाशय की ऑक्सिंटिक कोशिकाएं HCl और कैसल के आंतरिक कारक का स्रावण करती हैं जो विटामिन B12 के अवशोषण में मदद करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि श्वसन के समय बाह्य अंतरापर्शुक पेशियों और डायाफ्राम का संकुचन वक्षीय गुहा के आयतन को **बढ़ाता** है, जिससे अंतरापोषीय दाब वायुमंडलीय दाब से कम हो जाता है और वायु फेफड़ों के अंदर प्रवेश करती है (प्रश्वसन)। कथन 3 सही है क्योंकि हृदय की धड़कन SA नोड से शुरू होती है। कथन 4 सही है, इसके बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
मीथेन का सूत्र?
→
पदार्थ के सामान्य गुण, पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की स्वतंत्र सतह पर पृष्ठ तनाव (Surface Tension) का कारण अणुओं के बीच लगने वाला ससंजक बल (Cohesive force) है, और तापमान बढ़ाने पर अधिकांश द्रवों का पृष्ठ तनाव घट जाता है, जबकि घुलनशील अशुद्धियाँ मिलाने पर यह बढ़ भी सकता है।
2. श्यानता (Viscosity) द्रवों का वह गुण है जिसके कारण द्रव की विभिन्न परतें अपनी ही परतों के बीच होने वाली相対 गति का विरोध करती हैं, और गैसों में श्यानता ताप बढ़ने पर घटती है जबकि द्रवों में ताप बढ़ने पर बढ़ती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा विस्थापित तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल (Buoyant force) का अनुभव करती है, और वस्तु के तैरने के लिए वस्तु का घनत्व तरल के घनत्व से अधिक होना चाहिए।
4. केशिकत्व (Capillarity) की घटना पृष्ठ तनाव के कारण होती है, जिसके अंतर्गत यदि काँच की किसी नली को जल में डुबोया जाए तो जल नली में ऊपर चढ़ जाता है क्योंकि जल और काँच के बीच का आसंजक बल (Adhesive force), जल के ससंजक बल की तुलना में अधिक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम, एंट्रॉपी (Entropy) और विभिन्न तापमापी पैमानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम स्पष्ट करता है कि किसी भी स्वतः स्फूर्त (Spontaneous) प्रक्रम में ब्रह्मांड की कुल एंट्रॉपी हमेशा बढ़ती है, और आदर्श रूप से उत्क्रमणीय (Reversible) प्रक्रम में कुल एंट्रॉपी परिवर्तन शून्य होता है।
2. केल्विन ताप पैमाने पर तापमान की परिभाषा ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम पर आधारित होती है, और इस पैमाने पर किसी वस्तु का ऋणात्मक तापमान संभव है क्योंकि कार्नोट इंजन की दक्षता 100% से अधिक हो सकती है।
3. जब किसी गैस का रुद्धोष्म (Adiabatic) स्वतंत्र प्रसार (Free expansion) निर्वात में किया जाता है, तो गैस द्वारा कोई कार्य नहीं किया जाता और न ही कोई ऊष्मा बाहर से दी जाती है, किंतु इस अप्रतिवर्ती प्रक्रम के कारण गैस की एंट्रॉपी में वृद्धि होती है।
4. प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी और गैस तापमापी दोनों ही तापमान मापन के लिए उपयोग किए जाते हैं, जिसमें स्थिर आयतन गैस तापमापी को उसके अत्यधिक व्यापक कार्यक्षेत्र और उच्च यथार्थता के कारण प्राथमिक मानक तापमापी माना जाता है, जिसका विस्तृत विवरण विकिपीडिया संदर्भ में दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विद्युत धारा, प्रतिरोध और सर्किट के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक का प्रतिरोध उसके तापमान पर निर्भर करता है; धात्विक चालकों का ताप बढ़ाने पर उनका प्रतिरोध बढ़ता है, जबकि अर्धचालकों (Semiconductors) और इलेक्ट्रोलाइट्स का ताप बढ़ाने पर उनका प्रतिरोध घटता है।
2. किर्चऑफ़ का प्रथम नियम (संधि नियम) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी विद्युत परिपथ की किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
3. जब दो समान आंतरिक प्रतिरोध वाले सेलों को समानांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ में प्राप्त कुल विद्युत धारा का मान एक अकेले सेल की तुलना में दोगुना हो जाता है, भले ही बाह्य प्रतिरोध शून्य हो।
4. किसी विद्युत परिपथ में शक्ति क्षय (Power dissipation) केवल धारा के वर्ग ($I^2$) और प्रतिरोध ($R$) के गुणनफल पर निर्भर करता है, और यह परिपथ में जुड़े प्रतिरोधकों के श्रेणी या समानांतर विन्यास से पूरी तरह स्वतंत्र होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विद्युत परिपथों और किर्चॉफ के नियमों (Kirchhoff's Rules) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किर्चॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि (Junction) पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
2. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी बंद लूप (Closed loop) में कुल विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
3. जब एक ही मान के आंतरिक प्रतिरोध वाले कई सेलों को समांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो कुल धारा का मान एकल सेल की तुलना में काफी कम हो जाता है, और यह संयोजन तब अत्यधिक उपयोगी होता है जब बाह्य प्रतिरोध का मान आंतरिक प्रतिरोध की तुलना में बहुत अधिक होता है।
4. किसी Wheatstone Bridge के संतुलन की स्थिति में, गैल्वेनोमीटर में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है, और यह विधि अज्ञात प्रतिरोध को अत्यधिक यथार्थता के साथ मापने के लिए उपयोग की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.