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General Science
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जीवाश्मों के विकासवादी इतिहास और आनुवंशिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हार्डी-वेनबर्ग साम्यावस्था (Hardy-Weinberg equilibrium) के अनुसार, किसी आदर्श आबादी में अलील (Allele) और जीनोटाइप आवृत्तियां पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर रहती हैं, बशर्ते आबादी में उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, आनुवंशिक विचलन (Genetic drift) और जीन प्रवाह का अभाव हो।
- 2. 'अनुवंशिक अपवाह' (Genetic drift) छोटे आकार की आबादी में अधिक प्रभावशाली होता है, और इसमें 'संस्थापक प्रभाव' (Founder effect) तथा 'बॉटलनेक प्रभाव' (Bottleneck effect) जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं जो जीन पूल में विविधता को कम कर सकती हैं।
- 3. लामार्कवाद (Lamarckism) के 'उपार्जित लक्षणों की वंशागति' के सिद्धांत को अगस्त वीजमैन (August Weismann) द्वारा अपने चूहे की पूंछ काटने वाले प्रयोग के माध्यम से पूरी तरह खारिज कर दिया गया था, जिसमें उन्होंने यह सिद्ध किया कि सोमेटिक कोशिकाओं (कायिक कोशिकाओं) में होने वाले परिवर्तन अगली पीढ़ी में स्थानांतरित नहीं होते हैं।
- 4. समजात अंग (Homologous organs) वे अंग होते हैं जिनकी मूल संरचना और भ्रूणय उत्पत्ति भिन्न होती है, लेकिन उनके कार्य समान होते हैं, जो कि अभिसारी विकास (Convergent evolution) का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न के विकल्पों का विश्लेषण इस प्रकार है: कथन 1 सही है क्योंकि हार्डी-वेनबर्ग साम्यावस्था के अनुसार बड़े आकार की यादृच्छिक संगामी आबादी में अलील आवृत्तियां स्थिर रहती हैं जब तक कि कोई विकासात्मक बल कार्य न करे। कथन 2 सही है; आनुवंशिक अपवाह (Genetic drift) छोटे समूहों में अधिक प्रभावी होता है जहाँ संस्थापक प्रभाव और बॉटलनेक प्रभाव से विविधता घटती है। कथन 3 सही है, वीजमैन के जर्मप्लाज्म सिद्धांत ने कायिक परिवर्तनों की वंशागति को असत्य सिद्ध किया। कथन 4 गलत है क्योंकि समजात अंग (Homologous organs) वे होते हैं जिनकी उत्पत्ति और मूल संरचना समान होती है लेकिन कार्य भिन्न होते हैं, और यह **विकिपीडिया संदर्भ** के अनुसार 'अपसारी विकास' (Divergent evolution) को दर्शाते हैं, जबकि अभिसारी विकास को 'समवृत्ति अंग' दर्शाते हैं। अतः सही संयोजन केवल 1, 2 और 3 है।
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण और पादप हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को 'पादप जगत का उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं लेकिन लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनका मुख्य पादप शरीर अगुणित युग्मकोद्भिद (Gametophyte) होता है।
2. C4 चक्र में प्राथमिक कार्बन डाइऑक्साइड स्थिरीकरण पर्णमध्योतक (Mesophyll) कोशिकाओं में 'PEP केस' एंजाइम द्वारा होता है, जिससे 4-कार्बन यौगिक (ऑक्जेलोएसेटिक एसिड) बनता है, और यह चक्र C3 पौधों की तुलना में उच्च तापमान और कम जल उपलब्धता वाले वातावरण में अधिक प्रभावी होता है।
3. ए abscisic acid (ABA) को 'तनाव हॉर्मोन' (Stress hormone) कहा जाता है क्योंकि यह प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों (जैसे जल की कमी) के दौरान रंध्रों (Stomata) को बंद करने को प्रेरित करता है और बीजों की प्रसुप्ति (Dormancy) को बढ़ावा देता है।
4. प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशीय अभिक्रिया के दौरान चक्रीय फोटोफास्फोरिलेशन (Cyclic photophosphorylation) केवल फोटोसिस्टम-I (PS-I) से संबंधित होता है, जिसमें जल के प्रकाशीय अपघटन की आवश्यकता नहीं होती है और इससे केवल ATP का निर्माण होता है, NADPH का नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) और प्रकाश के अपवर्तन तथा पूर्ण आंतरिक परावर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब प्रकाश की किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक होने पर किरण का अपवर्तन नहीं होता, बल्कि वह उसी माध्यम में वापस लौट जाती है, जिसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) कहते हैं।
2. एक उत्तल लेंस (Convex lens) को जब ऐसे पारदर्शी द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की अभिसारी (Converging) प्रकृति समाप्त हो जाती है और वह एक अपसारी (Diverging) लेंस की भाँति व्यवहार करने लगता है।
3. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि वस्तु की दूरी $u$ और प्रतिबिंब की दूरी $v$ है, तो रेखीय आवर्धन ($m$) का मान $m = \frac{v}{u}$ होता है, जबकि उत्तल दर्पण की फोकस दूरी को परिपाटी के अनुसार ऋणात्मक माना जाता है।
4. पूर्ण परावर्तक प्रिज्म (Total Reflecting Prism) का उपयोग प्रकाश की किरण को बिना किसी ऊर्जा हानि के 90° या 180° से मोड़ने के लिए किया जाता है, जिसके लिए प्रिज्म के अंदर आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से कम होना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न हार्मोनों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) के पश्च भाग (Neurohypophysis) से स्रावित होने वाला 'ऑक्सीटोसिन' (Oxytocin) हार्मोन प्रसव के दौरान गर्भाशय की चिकनी पेशियों के संकुचन को प्रेरित करता है तथा स्तन ग्रंथियों से दुग्ध निष्कासन (Milk ejection) को नियंत्रित करता है।
2. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) का मेडुला भाग 'एपिनेफ्रिन' और 'नॉरएपिनेफ्रिन' हार्मोन स्रावित करता है, जिन्हें 'आपातकालीन हार्मोन' या 'फ्लाइट और फाइट' (Fight or Flight) प्रतिक्रिया का संचालक कहा जाता है।
3. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'कैल्सीटोनिन' हार्मोन रक्त में कैल्शियम के स्तर को बढ़ाने का कार्य करता है, जबकि पैराथायराइड हार्मोन (PTH) रक्त में कैल्शियम आयनों के स्तर को कम करता है।
4. अग्न्याशय (Pancreas) की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं की बीटा कोशिकाएँ 'इंसुलिन' का स्रावण करती हैं, जो यकृत और कंकाल पेशियों में ग्लाइकोजेनिएसिस (Glycogenesis) की प्रक्रिया को बढ़ावा देकर रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब एक उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है और उसकी प्रकृति (अभिसारी से अपसारी) बदल जाती है।
2. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि वस्तु की दूरी $u$ और प्रतिबिंब की दूरी $v$ हो, तो अवतल दर्पण द्वारा वास्तविक प्रतिबिंब के निर्माण की स्थिति में आवर्धन ($m$) हमेशा धनात्मक होता है।
3. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) के लिए यह आवश्यक है कि प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जा रही हो और आपतन कोण माध्यम युग्म के क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए।
4. किसी समतल दर्पण के सामने यदि कोई वस्तु दर्पण की ओर $v$ वेग से गति करती है, तो दर्पण में बनने वाला उसका प्रतिबिंब वस्तु के सापेक्ष $2v$ वेग से वस्तु की ओर आता हुआ प्रतीत होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के नियमों और तापमान मापन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) ताप की अवधारणा को परिभाषित करता है, जिसके अनुसार यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्य में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।
2. कार्नोट इंजन (Carnot engine) की दक्षता केवल स्रोत (Source) और सिंक (Sink) के तापमान पर निर्भर करती है, और यह इस बात पर निर्भर नहीं करती कि कार्यकारी पदार्थ (Working substance) के रूप में किस गैस या द्रव का उपयोग किया जा रहा है।
3. जल का त्रिक बिंदु (Triple Point) वह विशिष्ट ताप और दाब है जिस पर शुद्ध जल, उसकी वापिसा (Vapour), द्रव जल और बर्फ (Solid ice) तीनों साम्य अवस्था में सह-अस्तित्व रखते हैं, और इसे केल्विन पैमाने के निर्धारण के लिए आधार माना जाता है।
4. स्थिर आयतन गैस तापमापी (Constant-volume gas thermometer) में गैस के दाब और तापमान के रैखिक संबंध का उपयोग किया जाता है, और यह तापमापी पारे के तापमापी की तुलना में अत्यधिक उच्च तापमान (जैसे 1000°C से अधिक) को मापने के लिए कम संवेदनशील और अशटीक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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