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General Science
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मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) के नियमन और फीडबैक तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन' (GnRH) अग्र पीयूष ग्रंथि को ल्यूटिनाइजिंग हॉर्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (FSH) का स्रावण करने के लिए प्रेरित करता है, जो आगे चलकर जननांगों से सेक्स हॉर्मोन के उत्पादन को नियंत्रित करता है।
  2. 2. पीयूष ग्रंथि के पश्च भाग (Neurohypophysis) से स्रावित 'ऑक्सीटोसिन' (Oxytocin) एक पेप्टाइड हॉर्मोन है जो प्रसव के दौरान गर्भाशय की चिकनी पेशियों के संकुचन को तेज करता है और दुग्ध स्स्रावण (Milk ejection) के लिए स्तन ग्रंथियों की मायोएपिथेलियल कोशिकाओं को उत्तेजित करता है।
  3. 3. अधिवृक्क वल्कुट (Adrenal Cortex) से निकलने वाला 'कोर्टिसोल' (Cortisol) एक ग्लूकोकॉर्टिकॉइड है, जो कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा चयापचय को नियंत्रित करता है तथा प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाकर (Immunosuppression) सूजनरोधी प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन मानव अंतःस्रावी तंत्र और हॉर्मोनल नियंत्रण के संबंध में पूर्णतः सत्य हैं। हाइपोथैलेमस मास्टर ग्रंथि (पीयूष ग्रंथि) के कार्यों को नियंत्रित करता है। अग्र पीयूष ग्रंथि से गोनाडोट्रोपिन (LH और FSH) का स्रावण GnRH द्वारा नियंत्रित होता है। ऑक्सीटोसिन प्रसव और दुग्ध निष्कासन में मुख्य भूमिका निभाता है, जबकि कोर्टिसोल एक प्रमुख तनाव हॉर्मोन और ग्लूकोकॉर्टिकॉइड है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत लेंसों, दर्पणों और प्रकाशीय परिघटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब किसी उत्तल लेंस (Convex lens) को ऐसे पारदर्शी द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की अभिसारी (Converging) प्रकृति उलट जाती है और वह एक अपसारी (Diverging) लेंस की भाँति व्यवहार करने लगता है। 2. पानी के अंदर स्थित वायु का बुलबुला प्रकाश की किरणों को अभिसरित (Converge) करता है, क्योंकि पानी का अपवर्तनांक वायु की तुलना में अधिक होता है, जिससे बुलबुला एक उत्तल लेंस की तरह कार्य करता है। 3. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि वस्तु की वास्तविक दूरी $u$ और प्रतिबिंब की दूरी $v$ है, तो वास्तविक प्रतिबिंब के लिए रेखीय आवर्धन ($m$) का मान ऋणात्मक होता है, जबकि आभासी प्रतिबिंब के लिए यह धनात्मक होता है। 4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की परिघटना के लिए प्रकाश की किरण का विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाना अनिवार्य है, तथा आपतन कोण का मान माध्यम के क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों, उनके सूक्ष्मजीवितीय कारकों तथा नैदानिक परीक्षणों (Diagnostic Tests) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. क्षय रोग (Tuberculosis) के निदान के लिए किया जाने वाला 'मोंटौक्स परीक्षण' (Mantoux test) एक प्रकार का त्वचा परीक्षण (Skin test) है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस के विरुद्ध सेल-मीडिएटेड इम्युनिटी की उपस्थिति को दर्शाता है, किंतु यह सक्रिय संक्रमण और पूर्व टीकाकरण या पुरानी ठीक हो चुकी संक्रमण के बीच भेद करने में विफल रहता है। 2. एड्स (AIDS) के संपुष्टि (Confirmatory) परीक्षण के रूप में 'वेस्टर्न ब्लॉट' (Western blot) विधि का उपयोग किया जाता है, जिसमें वायरल प्रोटीन्स को जेल वैद्युतकणसंचलन (Gel electrophoresis) द्वारा अलग करके रोगी के सीरम में मौजूद विशिष्ट एंटीबॉडीज़ की पहचान की जाती है, 3. एन्टामोएबा हिस्टोलिटिका (Entamoeba histolytica) एक परजीवी प्रोटोजोआ है जो मनुष्य की बड़ी आंत में संक्रमण फैलाकर 'अमीबायसिस' या अमीबी पेचिश उत्पन्न करता है, और इसके गंभीर मामलों में यह आंतों की दीवार को भेदकर यकृत (Liver) में गंभीर फोड़ा (Liver abscess) भी बना सकता है। 4. टाइफाइड बुखार के परीक्षण के लिए प्रयुक्त 'विडाल परीक्षण' (Widal test) एक प्रतिजन-प्रतिपिंड (Antigen-Antibody) प्रतिक्रिया पर आधारित एग्लूटीनेशन परीक्षण है, जो 'साल्मोनेला टाइफी' के 'O' और 'H' एंटीजेंस का पता लगाता है, और संक्रमण के पहले सप्ताह में इसकी संवेदनशीलता शत-प्रतिशत सटीक होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? विद्युत चुंबकीय प्रेरण और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) का परिमाण उस परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन की समय-दर के सीधे समानुपाती होता है। 2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जो यह बताता है कि प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है। 3. जब किसी लंबी परिनालिका (Solenoid) में प्रवाहित धारा के मान को परिवर्तित किया जाता है, तो उसके भीतर स्व-प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है, और इस घटना को 'स्वप्रेरकत्व' (Self-inductance) कहते हैं जिसका SI मात्रक 'वेबर प्रति ऐम्पियर' या 'हेनरी' है। 4. भंवर धाराएँ (Eddy currents) किसी चालक के भीतर परिवर्तित चुंबकीय फ्लक्स के कारण उत्पन्न होने वाली गोलाकार प्रेरित धाराएँ हैं, और इनका उपयोग केवल ट्रांसफॉर्मर के क्रोड में ऊर्जा हानि को बढ़ाने के लिए किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? यांत्रिकी (Mechanics) और ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी संरक्षी बल (Conservative Force) द्वारा किया गया कार्य पथ पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि यह केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, और इस प्रकार के बल के अंतर्गत एक बंद पथ में किया गया कुल कार्य सदैव शून्य होता है। 2. 'कार्य-ऊर्जा प्रमेय' (Work-Energy Theorem) के अनुसार, किसी वस्तु पर सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है, और यह प्रमेय केवल संरक्षी बलों के लिए ही मान्य है, असांरक्षी बलों जैसे घर्षण बल के लिए नहीं। 3. जब कोई निकाय प्रत्यास्थ टक्कर (Elastic Collision) से गुजरता है, तो न केवल रैखिक संवेग संरक्षित रहता है, बल्कि कुल गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है, बशर्ते इस प्रक्रिया में कोई भी यांत्रिक ऊर्जा ऊष्मा या ध्वनि के रूप में क्षय न हो। 4. अपकेंद्री बल (Centrifugal Force) एक वास्तविक बल है जो जड़त्वीय निर्देश तंत्र (Inertial Frame of Reference) में वृत्ताकार गति कर रहे पिंड पर केंद्र की ओर कार्य करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? छाल?
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