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अम्ल-क्षार सिद्धांतों (Acid-Base Theories) और लवणों के जल-अपघटन (Salt Hydrolysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ब्रॉन्स्टेड-लॉरी संकल्पना (Bronsted-Lowry concept) के अनुसार, एक अम्ल वह स्पीशीज है जो प्रोटॉन ($H^+$) दान करती है और उसका संयुग्मी क्षार (Conjugate base) उस अम्ल की तुलना में हमेशा एक प्रबल क्षार होता है।
- 2. 'लुईस अम्ल' (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज (अणु या आयन) हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकते हैं, जैसे कि $BF_3$, $AlCl_3$ और संक्रमण धातुओं के धनायन ($Fe^{3+}, Co^{2+}$ आदि)।
- 3. जब दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण (जैसे सोडियम एसीटेट, $CH_3COONa$) का जल-अपघटन किया जाता है, तो विलयन की प्रकृति क्षारीय हो जाती है क्योंकि एसीटेट आयन जल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रॉक्साइड आयन ($OH^-$) उत्पन्न करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि ब्रॉन्स्टेड-लॉरी सिद्धांत के अनुसार, यदि कोई अम्ल प्रबल है, तो उसका संयुग्मी क्षार दुर्बल होता है और इसके विपरीत, दुर्बल अम्ल का संयुग्मी क्षार प्रबल होता है। कथन 2 सही है क्योंकि लुईस संकल्पना के अनुसार इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने वाले अभिकर्मक लुईस अम्ल कहलाते हैं, और $BF_3$, $AlCl_3$ जैसे यौगिकों में अष्टक अधूरा होने के कारण ये लुईस अम्ल की तरह कार्य करते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि दुर्बल अम्ल ($CH_3COOH$) और प्रबल क्षार ($NaOH$) के लवण का जल-अपघटन होने पर परिणामी विलयन क्षारीय हो जाता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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यांत्रिकी (Mechanics) में गति के नियमों, जड़त्व और संरक्षित बलों के संदर्भ…
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी पिंड पर किया गया…
Related Questions
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मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और हॉर्मोन नियमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'सोमाटोसटिन' (Somatostatin) हॉर्मोन अग्र पीयूष ग्रंथि से वृद्धि हॉर्मोन (Growth Hormone) के स्रावण को प्रेरित करता है, जबकि 'थायरोट्रोपिन-रिलीजिंग हॉर्मोन' (TRH) प्रोलैक्टिन के स्रावण को भी उत्तेजित कर सकता है।
2. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland) के एड्रिनल मेडुला द्वारा स्रावित 'कैटेकोलामाइन्स' (एपिलीनफ्राइन और नॉरएपिनीफ्राइन) आपातकालीन हॉर्मोन कहलाते हैं, जो ग्लाइकोजेनोलिसिस, लाइपोलिसिस और हृदय स्पंदन दर में वृद्धि के माध्यम से 'फाइट-या-फ्लाई' प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं।
3. अग्नाशय की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं की अल्फा कोशिकाएँ (Alpha cells) 'ग््लुकागन' (Glucagon) हॉर्मोन स्रावित करती हैं, जो यकृत कोशिकाओं पर कार्य करके ग्लाइकोजेनोलिसिस को बढ़ावा देता है और रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम करने का मुख्य कार्य करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'भर्जन' (Roasting) की प्रक्रिया में अयस्क को वायु की अत्यधिक मात्रा की उपस्थिति में उसके गलनांक से नीचे के तापमान पर गर्म किया जाता है, जिसका मुख्य उपयोग मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों को उनके संगत ऑक्साइडों में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है।
2. सोडियम धातु को अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होने के कारण केरोसिन तेल के नीचे संग्रहित किया जाता है, जबकि सफेद फास्फोरस को खुली हवा में रखने पर वह स्वतः प्रज्वलित हो जाता है, इसलिए उसे सुरक्षित रखने के लिए जल के भीतर डुबोकर रखा जाता है।
3. 'थर्माइट प्रक्रम' (Thermite process) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग अपचायक के रूप में किया जाता है, जो आयरन (III) ऑक्साइड जैसे धातु ऑक्साइडों को अत्यधिक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया के माध्यम से अपचयित करके पिघली हुई अवस्था में मुक्त करता है, जिसका उपयोग रेल की पटरियों को जोड़ने में होता है।
4. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हरोल्ट प्रक्रम (Hall-Heroult process) का उपयोग किया जाता है, जिसमें शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूरोस्पार ($CaF_2$) के मिश्रण में घोलकर विद्युत अपघटन किया जाता है, जहाँ क्रायोलाइट विलायक का हिमांक कम करने और मिश्रण की विद्युत चालकता बढ़ाने का कार्य करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों (Colligative properties) और उत्प्रेरण के विशिष्ट सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर वाष्प दाब में अपेक्षित अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह एक अणुसंख्यक गुणधर्म है जो विलेय कणों की प्रकृति पर निर्भर करता है, न कि उनकी संख्या पर।
2. 'वांट हॉफ गुणांक' ($i$) का मान वैद्युत अपघट्यों (जैसे $NaCl$ या $CaCl_2$) के लिए उनके वियोजन (Dissociation) की मात्रा के कारण हमेशा एक से अधिक होता है, जबकि संघन या डाइमेराइजेशन (Dimerization) प्रदर्शित करने वाले विलेय के लिए इसका मान एक से कम होता है।
3. 'एन्जाइम उत्प्रेरण' के संदर्भ में, 'माइकलिस-मेंटेन का समीकरण' (Michaelis-Menten equation) एंजाइम-उत्प्रेरित अभिक्रिया के वेग और सब्सट्रेट की सांद्रता के बीच के संबंध को व्यक्त करता है, जिसमें अधिकतम वेग ($V_{max}$) तब प्राप्त होता है जब सभी एंजाइम अणु सब्सट्रेट के साथ संतृप्त हो जाते हैं।
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आवर्त सारणी के तत्वों के गुणों, आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है और प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective nuclear charge) बढ़ने के कारण प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मान में सामान्यतः वृद्धि होती है, हालांकि बेरिलियम ($Be$) और बोरॉन ($B$) तथा नाइट्रोजन ($N$) और ऑक्सीजन ($O$) के बीच इस सामान्य प्रवृत्ति में अपवाद देखे जाते हैं।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और किसी भी उदासीन गैसीय परमाणु द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर ऊर्जा का हमेशा उत्सर्जन ही होता है, चाहे परमाणु का आकार कुछ भी हो।
3. हैलोजन समूह में फ्लोरीन ($F$) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान अपने ही समूह के अगले तत्व क्लोरीन ($C l$) की तुलना में अधिक होता है, जिसका मुख्य कारण फ्लोरीन के छोटे आकार के कारण होने वाला अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षक (Interelectronic repulsion) बल है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हार्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं किंतु लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है, और इनमें मुख्य पादप शरीर गेमेटोफाइट (युग्मकोद्भिद्) होता है जो बीजाणुद्भिद (स्पोरोफाइट) पर पोषण के लिए आंशिक रूप से निर्भर रहता है।
2. C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की दर नगण्य होती है, जिसका मुख्य कारण यह है कि उनमें रुबिको (RuBisCO) एंजाइम बंडल शीथ कोशिकाओं में उच्च सांद्रता में पाया जाता है जहाँ कार्बन डाइऑक्साइड का सांद्रण मैलिक अम्ल के डीकार्बोक्सिलेशन द्वारा बढ़ जाता है।
3. ऑक्सिन (जैसे IAA) त्रेपोट्रॉपिज्म और फोटोट्रॉपिज्म की क्रियाओं को नियंत्रित करता है, जहाँ प्रकाश के विपरीत दिशा में ऑक्सिन का पार्श्व वितरण अधिक हो जाने के कारण त्रेपोट्रॉपिक वक्रता उत्पन्न होती है, जिसे डार्विन और उनके पुत्र द्वारा कैनरी ग्रास के कोलियोप्टाइल पर किए गए प्रयोगों से समझा गया था।
4. जिबरेलिन (Gibberellin) आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में internode (पर्वान्तर) के दीर्घीकरण को प्रेरित करके उनकी लंबाई बढ़ाते हैं, और ये बीज अंकुरण के दौरान एल्यूरोन परत पर प्रभाव डालकर अल्फा-एमाइलेज जैसे हाइड्रोलिटिक एंजाइमों के संश्लेषण को उत्प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कोशिका का ऊर्जा गृह किसे कहा जाता है?
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