BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
9 views

धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'भर्जन' (Roasting) वह प्रक्रिया है जिसमें अयस्क को वायु की अत्यधिक मात्रा में उसके गलनांक बिंदु से नीचे गर्म किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप सल्फाइड अयस्क ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं और वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं।
  2. 2. थर्माइट वेल्डिंग (Thermite welding) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग एक शक्तिशाली अपचायक के रूप में किया जाता है, जो फेरिक ऑक्साइड ($Fe_2O_3$) के साथ तीव्र अभिक्रिया करके पिघला हुआ लोहा उत्पन्न करता है, क्योंकि एल्युमिनियम की ऑक्सीजन के प्रति बंधुता आयरन से बहुत अधिक होती है।
  3. 3. 'जिंकोसाइट' (Zincite) और 'कैलेमीन' (Calamine) दोनों ही जिंक के प्रमुख अयस्क हैं, जिनमें से कैलेमीन एक कार्बोनेट अयस्क है जिसके निष्कर्षण के लिए निस्तापन (Calcination) प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन सही हैं। भर्जन (Roasting) में सल्फाइड अयस्कों को वायु की उपस्थिति में गर्म किया जाता है ताकि वे ऑक्साइड में बदल सकें। थर्माइट प्रक्रिया में एल्युमिनियम अपनी उच्च अभिक्रियाशीलता के कारण फेरिक ऑक्साइड को अपचायित करके पिघला हुआ लोहा देता है। कैलेमीन ($ZnCO_3$) एक कार्बोनेट अयस्क है, जिसे वायु की अनुपस्थिति में गर्म करके ऑक्साइड में बदला जाता है (निस्तापन)। धातु और उनके यौगिकों के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

भौतिक राशियों, उनके विमीय सूत्रों और मात्रकों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक ($G$): विमीय सूत्र $[M^{-1} L^3 T^{-2}]$ और SI मात्रक $N \cdot m^2 \cdot kg^{-2}$ 2. श्यानता गुणांक ($\eta$): विमीय सूत्र $[M^1 L^{-1} T^{-1}]$ और SI मात्रक $kg \cdot m^{-1} \cdot s^{-1}$ 3. प्लांक नियतांक ($h$): विमीय सूत्र $[M^1 L^2 T^{-1}]$ और SI मात्रक $J \cdot s$ 4. पृष्ठ तनाव ($S$): विमीय सूत्र $[M^1 L^0 T^{-2}]$ और SI मात्रक $N \cdot m^{-2}$ उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों की जटिल जैव-रासायनिक संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) की सतह पर पाए जाने वाले ABO रक्त समूह के प्रतिजन (Antigens) सीधे प्रोटीन के रूप में संश्लेषित नहीं होते हैं, बल्कि यह ओलिगोसैक्राइड श्रृंखलाएँ होती हैं जिनका निर्माण ग्लाइकोसिलट्रांसफेरेज एंजाइमों द्वारा एक पूर्ववर्ती 'H-एंटीजन' पर शर्करा इकाइयों के जुड़ने से होता है। 2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$ फिनोटाइप) वाले व्यक्तियों में FUT1 जीन के उत्परिवर्तन के कारण H-एंटीजन का पूर्णतः अभाव होता है, जिसके परिणामस्वरूप उनके प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B एंटीबॉडी के साथ-साथ एक विशिष्ट 'एंटी-H' एंटीबॉडी भी उपस्थित होती है, जो उन्हें किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (जैसे O, A, B, AB) से रक्त प्राप्त करने से रोकती है। 3. Rh-असंगतता (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति में, प्रथम गर्भधारण के दौरान माँ के शरीर में बनने वाली प्रारंभिक एंटी-Rh एंटीबॉडी मुख्य रूप से उच्च आणविक भार वाली $IgM$ प्रकार की होती हैं, जो प्लेसेंटा को आसानी से पार कर लेती हैं और प्रथम Rh-धनात्मक शिशु को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। 4. रुधिर स्कंदन (Blood Coagulation) की आंतरिक प्रणाली (Intrinsic pathway) की शुरुआत तब होती है जब रक्त वाहिका के उपकला आवरण की क्षति के बाद संपर्क कारकों (Contact factors) जैसे कि फैक्टर XII और प्रीकैलिक्रिन की सक्रियता होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? विटामिन C की कमी से? मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों (Blood Groups) के जैव-रासायनिक एवं immunotoxicolgical संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एंटीबॉडी 'एग्लूटीनिन' (Agglutinin) प्लाज्मा में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले प्रोटीन हैं, और एंटी-A तथा एंटी-B एंटीबॉडी मुख्य रूप से IgM प्रकार के होते हैं, जो आकार में बड़े होने के कारण प्लेसेंटा को पार करके गर्भ में पल रहे शिशु तक नहीं पहुँच पाते हैं। 2. 'बॉम्बे रक्त समूह' (Bombay Blood group या $O_h$) से ग्रसित व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर H-एंटीजन का पूर्णतः अभाव होता है क्योंकि उनमें FUT1 (Fucosyltransferase 1) जीन का म्यूटेशन होता है, जिससे वे किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति से रक्त ले सकते हैं। 3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-धनात्मक (Rh⁺) पिता और एक Rh-ऋणात्मक (Rh⁻) माता से उत्पन्न होने वाला पहला Rh-धनात्मक शिशु प्रसव के दौरान माँ के संपर्क में आता है, जिससे माँ के शरीर में एंटी-Rh एंटीबॉडी का निर्माण होता है जो अगले गर्भस्थ शिशु को प्रभावित करता है। 4. रक्त का थक्का जमने (Blood Coagulation) की प्रक्रिया में 'प्रोथ्रोम्बिन एक्टीवेटर' (Prothrombin activator) का निर्माण आंतरिक और बाह्य दोनों मार्गों का अंतिम साक्षात् बिंदु है, जो कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) की उपस्थिति में निष्क्रिय प्रोथ्रोम्बिन को सक्रिय थ्रॉम्बिन में रूपांतरित करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? यूकेरियोटिक कोशिकाओं में कोशिका विभाजन (Cell Division) और कोशिका चक्र (Cell Cycle) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कोशिका चक्र की 'एस-अवस्था' (S-phase) के दौरान डीएनए का प्रतिकृतियन (Replication) होता है, जिसके परिणामस्वरूप यदि कोशिका में जी-1 अवस्था ($ ext{G}_1 ext{ phase}$) में डीएनए की मात्रा '2C' थी, तो एस-अवस्था के पश्चात यह मात्रा बढ़कर '4C' हो जाती है, किंतु गुणसूत्रों की संख्या (Ploidy level) अपरिवर्तित रहती है। 2. सूत्री विभाजन (Mitosis) की 'मेटाफेज' (Metaphase) अवस्था में गुणसूत्र अपने अधिकतम संकुचित रूप में दिखाई देते हैं, और इस दौरान स्पिंडल फाइबर (तर्कु तंतु) गुणसूत्र के सेंट्रोमियर पर स्थित 'काइनेटोकोर' (Kinetochore) प्रोटीन संरचना से जुड़ जाते हैं। 3. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की पैचिटीन (Pachyneteen/Pachytene) उप-अवस्था में समजात गुणसूत्रों के गैर-भ्रातृ गुणसूत्रिका (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय होता है, जिसे 'क्रॉसिंग ओवर' कहा जाता है और यह 'रिकॉम्बिनेज' एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होता है। 4. अर्धसूत्री विभाजन के दौरान समजात गुणसूत्रों का पृथक्करण और युग्मकों (Gametes) में गुणसूत्रों की संख्या का आधा होना हमेशा 'एनाफेज-II' (Anaphase-II) के दौरान होता है, जबकि एनाफेज-I में केवल सिस्टर क्रोमैटिड्स अलग होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.