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विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राउल्ट के नियम (Raoult's law) के अनुसार, किसी वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलयन में उपस्थित विलेय के मोल अंश (Mole fraction) के ठीक बराबर होता है।
- 2. 'सजातीय उत्प्रेरण' (Homogeneous catalysis) वह प्रक्रिया है जिसमें उत्प्रेरक और अभिकारक दोनों एक ही भौतिक अवस्था (जैसे कि सभी द्रव या सभी गैस) में होते हैं, जबकि 'विषमांगी उत्प्रेरण' (Heterogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक अलग-अलग भौतिक अवस्थाओं में होते हैं, जिसमें अधिकांशतः ठोस उत्प्रेरक और गैसीय अभिकारक प्रयुक्त होते हैं।
- 3. ऋणात्मक उत्प्रेरण (Negative catalysis) के अंतर्गत उत्प्रेरक किसी रासायनिक अभिक्रिया के वेग को बढ़ाने के लिए उसकी सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को अत्यधिक बढ़ा देता है, जिससे अभिकारकों के लिए ऊर्जा अवरोध पार करना कठिन हो जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि राउल्ट के नियम के अनुसार किसी वाष्पशील विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन का वाष्प दाब कम हो जाता है और वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल अंश के बराबर होता है। कथन 2 सही है क्योंकि सजातीय उत्प्रेरण में उत्प्रेरक और अभिकारक समान प्रावस्था (Phase) में होते हैं, जबकि विषमांगी उत्प्रेरण में वे भिन्न प्रावस्थाओं में होते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि 'ऋणात्मक उत्प्रेरक' रासायनिक अभिक्रिया के वेग को **घटाते** हैं, और ऐसा वे सक्रियण ऊर्जा को **बढ़ाकर** करते हैं जिससे ऊर्जा अवरोध अधिक हो जाता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves) और अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse waves) की भौतिक प्रकृति तथा माध्यम में उनके संचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुदैर्ध्य तरंगों में माध्यम के कणों का कंपन तरंग संचरण की दिशा के समानांतर होता है, जिसके कारण माध्यम में संपीड़न (Compressions) और विरलन (Rarefactions) क्षेत्रों का निर्माण होता है, और यह तरंगें ठोस, द्रव तथा गैस तीनों माध्यमों में संचरित हो सकती हैं।
2. अनुप्रस्थ तरंगों में माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के लंबवत कंपन करते हैं, जिससे श्रृंग (Crests) और गर्त (Troughs) बनते हैं, और यह तरंगें केवल ठोस तथा द्रवों की सतह पर ही उत्पन्न की जा सकती हैं क्योंकि गैसों में इनके संचरण के लिए आवश्यक अपरूपण प्रत्यास्थता (Shear elasticity) का अभाव होता है।
3. किसी गैस में ध्वनि तरंगों की चाल लाप्लास के संशोधन के अनुसार केवल गैस के दाब और घनत्व पर निर्भर करती है, जिसके अंतर्गत न्यूटन के इस isothermal (समतापीय) परिकल्पना को संशोधित किया गया कि ध्वनि का संचरण एक रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रिया है।
4. डॉप्लर प्रभाव (Doppler effect) के अनुसार, यदि ध्वनि स्रोत और श्रोता के बीच की दूरी कम हो रही है, तो श्रोता द्वारा सुनी गई ध्वनि की आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से कम प्रतीत होती है, चाहे गति स्रोत की हो या श्रोता की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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शुद्ध सोना कितने कैरेट का होता है?
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परमाणु भट्ठी में मंदक के रूप में किसका प्रयोग होता है?
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गुरुत्वाकर्षण और उपग्रहों की गति (Gravitation) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केपलर के ग्रहों की गति के द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) के अनुसार, किसी ग्रह को सूर्य से मिलाने वाली रेखा समान समय अंतरालों में समान क्षेत्रफल तय करती है, जो मुख्य रूप से कोणीय संवेग संरक्षण (Conservation of angular momentum) के नियम का ही एक प्रत्यक्ष परिणाम है।
2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) की पृथ्वी की सतह से ऊँचाई लगभग 36,000 किलोमीटर होती है, और यह विषुवत वृत्त के तल में पश्चिम से पूर्व की ओर पृथ्वी की परिक्रमा करता है, जिसका परिक्रमण काल ठीक 24 घंटे होता है।
3. पृथ्वी तल से ऊपर जाने पर गुरुत्वीय त्वरण ($g$) का मान घटता है, जबकि पृथ्वी के भीतर गहराई में जाने पर भी $g$ का मान लगातार घटता जाता है और पृथ्वी के ठीक केंद्र पर इसका मान शून्य हो जाता है।
4. किसी उपग्रह के अंदर कृत्रिम गुरुत्वाकर्षण उत्पन्न करने या भारहीनता की स्थिति से निपटने के लिए, उपग्रह को एक निश्चित कोणीय वेग से अपनी अक्ष के परितः घूर्णन (Rotation) कराना आवश्यक होता है, जिससे उत्पन्न अपकेन्द्रीय बल अंतरिक्ष यात्री को फर्श पर दबाव बनाने में सहायता करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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ऊष्मागतिकी और तापमापी (Thermodynamics and Thermometry) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) ताप की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह बताता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्य (Thermal equilibrium) में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।
2. 'स्थिर आयतन गैस तापमापी' (Constant-volume gas thermometer) अत्यधिक संवेदनशील और सटीक होते हैं क्योंकि गैसों का दाब ताप के साथ रैखिक रूप से परिवर्तित होता है, और चार्ल्स के नियम के अनुसार नियत आयतन पर किसी गैस का दाब उसके परमताप के सीधे आनुपातिक होता है।
3. जल का त्रिक बिंदु (Triple point of water), जिस पर बर्फ, द्रव जल और जलवाष्प सह-अस्तित्व में होते हैं, का मान 273.16 K होता है, और इसका उपयोग केल्विन ताप पैमाने को परिभाषित करने के लिए एक निश्चित संदर्भ बिंदु के रूप में किया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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