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General Science
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मानव शरीर के रक्त परिसंचरण तंत्र, रक्त वाहिकाओं की क्रियाविधि और कार्डियक चक्र (Cardiac Cycle) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. महाधमनी (Aorta) से निकलने वाली दैहिक धमनियों की भित्तियाँ शिराओं की तुलना में अधिक मोटी और अधिक पेशीय होती हैं, क्योंकि उन्हें हृदय के निलय (Ventricles) द्वारा उच्च दाब पर पंप किए गए रक्त के झटकों को सहन करना पड़ता है और रक्त प्रवाह को नियंत्रित करना होता है।
- 2. हृदय चक्र के दौरान, जब निलय का संकुचन (Ventricular systole) शुरू होता है, तो त्रिवलनी (Tricuspid) और द्विवलनी (Mitral) वाल्व रक्त के दबाव के कारण बंद हो जाते हैं, जिससे हृदय की पहली ध्वनि 'लब' (Lub) उत्पन्न होती है, जबकि अर्धचंद्राकार वाल्व (Semilunar valves) इस समय खुले रहते हैं ताकि रक्त धमनियों में जा सके।
- 3. कोरोनरी साइनस (Coronary sinus) अशुद्ध रक्त को सीधे दाएं आलिंद (Right atrium) में लाता है, और यह रक्त मुख्य रूप से स्वयं हृदय की पेशीय दीवार (Myocardium) से अपशिष्ट और कार्बन डाइऑक्साइड युक्त होकर आता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि महाधमनी और दैहिक धमनियों की दीवारें अधिक मोटी, इलास्टिक और पेशीय होती हैं ताकि वे उच्च रक्त दाब को सहन कर सकें। कथन 2 गलत है क्योंकि निलय के संकुचन (Ventricular systole) की शुरुआत में त्रिवलनी और द्विवलनी वाल्व बंद होने से 'लब' ध्वनि तो उत्पन्न होती है, लेकिन इस चरण में अर्धचंद्राकार वाल्व (Semilunar valves) भी बंद रहते हैं (जब तक कि निलय का दाब धमनियों के दाब से अधिक नहीं हो जाता) और फिर रक्त को बाहर धकेलने के लिए वे खुलते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि हृदय की अपनी मांसपेशियों (मायोकार्डियम) से डीऑक्सीजनेटेड रक्त को कोरोनरी साइनस के माध्यम से सीधे दाएं आलिंद में वापस लाया जाता है। मानव परिसंचरण तंत्र के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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यांत्रिक तरंगें (Mechanical Waves) संचरण के लिए किसका उपयोग करती हैं?
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि किसी गतिमान सूक्ष्म कण की स्थिति और उसके संवेग का एक साथ यथार्थ निर्धारण करना असंभव है, तथा दोनों में अनिश्चितता का गुणनफल $\Delta x \cdot \Delta p_x \ge \frac{h}{4\pi}$ के बराबर या उससे अधिक होता है।
2. पाऊँ का अपवर्जन नियम (Pauli Exclusion Principle) के अनुसार, किसी परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं का मान सर्वसम (एक समान) हो सकता है, बशर्ते उनका चक्रण (Spin) विपरीत दिशा में हो।
3. आफबाऊ नियम (Aufbau Principle) के अनुसार, परमाणु में इलेक्ट्रॉनों का भरना ऊर्जा के बढ़ते क्रम में होता है, जिसमें किसी कक्षक के लिए ऊर्जा का निर्धारण $(n + l)$ नियम द्वारा किया जाता है, और जिस कक्षक के लिए $(n + l)$ का मान कम होता है, उसकी ऊर्जा कम होती है।
4. हुंड का अधिकतम बहुलकता नियम (Hund's Rule of Maximum Multiplicity) यह बताता है कि समभ्रंश कक्षकों (Degenerate orbitals) में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक प्रारंभ नहीं होता जब तक कि प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन न आ जाए और उनके चक्रण समदिश (Parallel) न हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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आनुवंशिकी और जैव विकास (Genetics and Evolution) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लैमार्कवाद (Lamarckism) के मूल सिद्धांतों में 'उपार्जित लक्षणों की वंशागति' (Inheritance of acquired characters) और 'अंगों का उपयोग व अनुपयोग' शामिल हैं, जिसका खंडन अगस्त वीज़मैन (August Weismann) ने अपने 'जननद्रव्य की निरंतरता के सिद्धांत' (Theory of Continuity of Germplasm) के माध्यम से किया था।
2. ह्यूगो डी व्रीस (Hugo de Vries) द्वारा प्रतिपादित 'उत्परिवर्तन सिद्धांत' (Mutation Theory) के अनुसार, जैव विकास क्रमिक और दिशात्मक परिवर्तन के माध्यम से होता है, न कि अचानक और बड़े परिवर्तनों (सॉल्टेशन) के द्वारा।
3. प्राकृतिक चयन (Natural Selection) के 'विदारक' या 'विभाजक चयन' (Disruptive Selection) प्रारूप में औसत फेनोटाइप के जीवों के विरुद्ध चयन होता है और दोनों चरम फेनोटाइप्स के जीवों को प्राथमिकता मिलती है, जिससे अंततः एक ही आबादी दो अलग-अलग जातियों में विभाजित हो सकती है।
4. हार्डी-वीनबर्ग संतुलन (Hardy-Weinberg Equilibrium) के अनुसार, यदि किसी यादृच्छिक रूप से संगमित होने वाली बड़ी आबादी में विकास संबंधी बल (जैसे उत्परिवर्तन, चयन और आनुवंशिक अपवाह) सक्रिय हों, तब भी एलील आवृत्तियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपरिवर्तित रहती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न जनन-मूत्र मार्ग (Urogenital) या संक्रामक रोगों और उनके कारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'सिफिलिस' (Syphilis) एक जीवाणु जनित यौन संचारित संक्रमण (STI) है जो 'ट्रिपोनेमा पैलिडम' (Treponema pallidum) नामक सर्पिलाकार जीवाणु (Spirochete) के कारण होता है, और इसके प्राथमिक चरण में जननांगों पर दर्द रहित अल्सर या 'चांक्र' (Chancre) बनता है।
2. 'गोनोरिया' (Gonorrhea) एक विषाणु जनित संक्रमण है जो 'नाइसेरिया गोनोरिया' (Neisseria gonorrhoeae) नामक वायरस के कारण होता है, जो मूत्र मार्ग में तीव्र जलन और स्राव उत्पन्न करता है।
3. 'ह्यूमन पैपिलोमा वायरस' (HPV) एक डीएनए विषाणु है जिसके कुछ उच्च-जोखिम वाले प्रभेद (जैसे HPV-16 और HPV-18) महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा (Cervical cancer) के मुख्य कारणों में से एक माने जाते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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