BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
9 views

विद्युत परिपथों और किर्चॉफ के नियमों (Kirchhoff's Laws) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किर्चॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम या KCL) आवेश संरक्षण (Conservation of Charge) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि (Junction) पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
  2. 2. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण (Conservation of Energy) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी बंद लूप में कुल विद्युत वाहक बलों का बीजगणितीय योग उस लूप के विभिन्न भागों में प्रतिरोधों और धाराओं के गुणनफल के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।
  3. 3. वीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge) एक ऐसा सर्किट है जिसका उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को मापने के लिए किया जाता है, और इसकी संतुलन अवस्था (Null condition) में गैल्वेनोमीटर से होकर बहने वाली धारा का मान शून्य होता है, जिसके लिए प्रतिबंध $P/Q = S/R$ (मानक प्रतीकों में) संतुष्ट होना अनिवार्य है।

उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। किर्चॉफ का धारा नियम (KCL) आवेश संरक्षण पर आधारित है जबकि वोल्टेज नियम (KVL) ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है। वीटस्टोन सेतु का उपयोग अत्यधिक सटीकता के साथ अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात करने में किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

एलपीजी (LPG) और सीएनजी (CNG) जैसे ईंधन तथा उनके रासायनिक घटकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, जिसे उच्च दबाव में आसानी से द्रवीकृत किया जाता है, और सुरक्षा की दृष्टि से इसमें गंध के लिए 'एथिल मर्कैप्टन' ($C_2H_5SH$) मिलाया जाता है। 2. संपीडित प्राकृतिक गैस (CNG) में मुख्य घटक मीथेन होता है, जो वायु की तुलना में हल्का होता है और इसके दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड तथा सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन न्यूनतम होता है, जिससे यह पर्यावरण अनुकूल ईंधन माना जाता है। 3. 'सीटेन संख्या' (Cetane Number) डीजल ईंधन की दहन गुणवत्ता और उसके 'अपस्फोटन-रोधी' (Anti-knocking) गुणों का माप होती है, जिसमें उच्च सीटेन संख्या वाला ईंधन इंजन में तेजी से और सुचारू रूप से प्रज्वलित होता है। 4. पेट्रोलियम शोधन के दौरान भंजक आसवन (Cracking) प्रक्रिया का उपयोग उच्च आणविक द्रव्यमान वाले भारी हाइड्रोकार्बन को कम आणविक द्रव्यमान वाले उपयोगी गैसोलीन में तोड़ने के लिए किया जाता है, जिसमें उच्च तापमान और उत्प्रेरक का उपयोग होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन और ईंधन के रासायनिक व्यवहार और उनके विशिष्ट गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एल्काइन्स (Alkynes) में कार्बन-कार्बन त्रिक बंध उपस्थित होने के कारण ये उच्च असंतृप्त यौगिक होते हैं, किंतु जलीय माध्यम में इनके सीमांत (Terminal) हाइड्रोजन परमाणु अम्लीय प्रकृति के होते हैं जिन्हें सोडियम धातु या अमोनियामय क्यूप्रस क्लोराइड विलयन द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है। 2. पेट्रोलियम के प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation) के दौरान प्राप्त होने वाले 'डीजल ईंधन' की गुणवत्ता का निर्धारण उसकी 'ऑक्टेन संख्या' (Octane Number) के आधार पर किया जाता है, जिसमें जितनी अधिक ऑक्टेन संख्या होगी, डीजल की स्फोटक-विरोधी (Anti-knock) क्षमता उतनी ही बेहतर होगी। 3. कोल गैस (Coal gas) मुख्य रूप से हाइड्रोजन, मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साइड का एक ज्वलनशील गैसीय मिश्रण है, जिसका उपयोग औद्योगिक ईंधन के रूप में किया जाता है। 4. बेन्जीन चक्र में उपस्थित सभी कार्बन-कार्बन बंधों की लंबाई एकल बंध और द्वि बंध के मध्य की होती है, जो इसकी अनुनादी संरचना (Resonance structure) और उच्च स्थायित्व को प्रदर्शित करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत गोलीय दर्पणों और लेंसों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी अवतल दर्पण (Concave mirror) के सामने जब वस्तु को उसके वक्रता केंद्र (Centre of curvature) और फोकस (Focus) के बीच रखा जाता है, तो बनने वाला प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा और वस्तु से आकार में बड़ा होता है। 2. उत्तल लेंस (Convex lens) की क्षमता धनात्मक होती है, और जब इस लेंस को किसी ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है और उसकी प्रकृति अभिसारी से बदलकर अपसारी (Diverging) हो जाती है। 3. लेंस निर्माता सूत्र (Lens maker's formula) के अनुसार, किसी पतले लेंस की फोकस दूरी लेंस के दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याओं और लेंस के पदार्थ के सापेक्षिक अपवर्तनांक पर निर्भर करती है, तथा यह प्रकाश के रंग (तरंगदैर्ध्य) से पूर्णतः स्वतंत्र होती है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग ने यह सिद्ध किया कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और उसका धनात्मक आवेश उसके केंद्र में एक अत्यंत सूक्ष्म आयतन में केंद्रित होता है, जिसे 'नाभिक' (Nucleus) कहा जाता है। 2. नील्स बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं विशिष्ट वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिनका कोणीय संवेग ($L$) $\frac{h}{2\pi}$ का पूर्ण गुणज होता है, अर्थात् $L = \frac{nh}{2\pi}$। 3. डी ब्रोग्ली की परिकल्पना के अनुसार, गतिमान इलेक्ट्रॉनों सहित सभी द्रव्य कण तरंग-कण द्वैतता (Wave-particle duality) प्रदर्शित करते हैं, और उनकी तरंगदैर्ध्य $\lambda = \frac{h}{mv}$ द्वारा दी जाती है। 4. हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत के अनुसार, एक ही समय में किसी सूक्ष्म कण की स्थिति और उसके संवेग का यथार्थ निर्धारण किया जा सकता है, बशर्ते माप के उपकरण पूर्ण रूप से शून्य त्रुटि वाले हों। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? एक अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब हमेशा कैसा होता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.