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General Science
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र, रक्त वाहिकाओं और हृदय की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. महाधमनी (Aorta) से निकलने वाली कोरोनरी धमनियां हृदय की पेशियों को ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति करती हैं, और इनमें किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न होने पर 'मायोकार्डियल इंफार्क्शन' (हार्ट अटैक) की स्थिति पैदा हो जाती है।
- 2. यकृत पोर्टल तंत्र (Hepatic portal system) आंतों और यकृत के बीच का एक विशिष्ट संवहन तंत्र है, जो पाचन नली से अवशोषित पोषक तत्वों से भरपूर रक्त को सीधे यकृत में ले जाता है ताकि महाशिरा में प्रवेश करने से पहले उनका उपापचय हो सके।
- 3. रुधिर वाहिकाओं में रक्तचाप (Blood pressure) का मान सबसे अधिक धमनियों में होता है, जो वेंट्रिकुलर सिस्टोल के दौरान अधिकतम (प्रकुंचन दाब) और वेंट्रिकुलर डायस्टोल के दौरान न्यूनतम (अनुशिथिलन दाब) हो जाता है, जबकि केशिकाओं (Capillaries) में यह दाब शून्य या ऋणात्मक हो जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: कोरोनरी धमनियां, जो महाधमनी से निकलती हैं, हृदय की मांसपेशियों (मायोकार्डियम) को शुद्ध रक्त प्रदान करती हैं। इनमें रुकावट आने से हृदयाघात होता है। कथन 2 सही है: यकृत पोर्टल तंत्र आंतों से पोषकों से युक्त रक्त को पहले यकृत में ले जाता है। कथन 3 गलत है: केशिकाओं (Capillaries) में रक्तचाप कम जरूर हो जाता है, लेकिन यह कभी भी शून्य या ऋणात्मक नहीं होता; केशिकाओं के अंत में भी इसका न्यूनतम सकारात्मक मान बना रहता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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प्रकाश का वेग सबसे पहले किसने मापा?
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प्रकाशिकी (Optics) और प्रकाश के अपवर्तन तथा पूर्ण आंतरिक परावर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब प्रकाश की किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक होने पर किरण का अपवर्तन नहीं होता, बल्कि वह उसी माध्यम में वापस लौट जाती है, जिसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) कहते हैं।
2. एक उत्तल लेंस (Convex lens) को जब ऐसे पारदर्शी द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की अभिसारी (Converging) प्रकृति समाप्त हो जाती है और वह एक अपसारी (Diverging) लेंस की भाँति व्यवहार करने लगता है।
3. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि वस्तु की दूरी $u$ और प्रतिबिंब की दूरी $v$ है, तो रेखीय आवर्धन ($m$) का मान $m = \frac{v}{u}$ होता है, जबकि उत्तल दर्पण की फोकस दूरी को परिपाटी के अनुसार ऋणात्मक माना जाता है।
4. पूर्ण परावर्तक प्रिज्म (Total Reflecting Prism) का उपयोग प्रकाश की किरण को बिना किसी ऊर्जा हानि के 90° या 180° से मोड़ने के लिए किया जाता है, जिसके लिए प्रिज्म के अंदर आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण से कम होना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves) किस रूप में गमन करती हैं?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की झिल्ली पर ग्लाइकोप्रोटीन प्रकृति के एंटीजन (एग्लूटिनोजन) उपस्थित होते हैं, जबकि प्लाज्मा में प्राकृतिक रूप से विशिष्ट एंटीबॉडी (एग्लूटिनिन) पाए जाते हैं, और कार्ल लैंडस्टीनर ने एंटी-A और एंटी-B एंटीबॉडी की उपस्थिति के आधार पर ABO रक्त समूह प्रणाली की खोज की थी।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' (Bombay Phenotype) से ग्रसित व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर 'H एंटीजन' का पूर्णतः अभाव होता है, क्योंकि इनमें FUT1 जीन उत्परिवर्तित होता है, जिसके कारण वे किसी भी सामान्य ABO रक्त समूह (A, B, AB, O) के व्यक्ति को रक्त दे तो सकते हैं परंतु केवल बॉम्बे फेनोटाइप वाले व्यक्ति से ही रक्त प्राप्त कर सकते हैं।
3. Rh कारक का आनुवंशिक संचरण मुख्य रूप से एक बहु-युग्मविक (Multiple allele) प्रणाली द्वारा नियंत्रित होता है, और Rh-धनात्मक रक्त को Rh-ऋणात्मक व्यक्ति में पहली बार चढ़ाने पर प्लाज्मा में तीव्र गति से एंटी-D एंटीबॉडी का निर्माण होता है, जिससे तत्काल गंभीर हीमोलिटिक आधान प्रतिक्रिया (Hemolytic transfusion reaction) होती है।
4. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब Rh-ऋणात्मक माता का गर्भ Rh-धनात्मक भ्रूण से युक्त होता है, जिसमें प्रथम संतान सामान्य जन्म लेती है किंतु प्रसव के दौरान भ्रूण के Rh-धनात्मक एरिथ्रोसाइट्स माता के परिसंचरण में प्रवेश करके प्राथमिक प्रतिरक्षा अनुक्रिया को प्रेरित करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और चुम्बकत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार, किसी बंद परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से गुजरने वाले चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर के अनुक्रमानुपाती होता है।
2. लेंज का नियम (Lenz's law) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का एक प्रत्यक्ष परिणाम है, जो यह बताता है कि प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जिसके कारण वह स्वयं उत्पन्न होती है।
3. स्वप्रेरणा (Self-induction) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह कुंडली से गुजरने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करती है, और इसका एसआई मात्रक 'वेबर प्रति ऐम्पियर' या 'हेनरी' होता है।
4. भंवर धाराएँ (Eddy currents) किसी चालक के भीतर परिवर्तित चुंबकीय फ्लक्स के कारण उत्पन्न होने वाली प्रेरित चक्रीय धाराएँ हैं, जिनका उपयोग विद्युत ब्रेक (Magnetic braking) और प्रेरण भट्टी (Induction furnace) जैसी तकनीकों में किया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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