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General Science
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मानव शरीर के परिसंचरण और श्वसन तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मानव हृदय का 'पेसमेकर' कहे जाने वाला सिनोआट्रियल नोड (SAN) दाएं आलिंद की दीवार में स्थित होता है, जो स्वतः उत्तेजित होने की क्षमता रखता है और हृदय में विद्युत आवेग उत्पन्न करके संकुचन की दर को नियंत्रित करता है।
- 2. फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary artery) एकमात्र ऐसी धमनी है जो ऑक्सीजन-विहीन (विऑक्सीकृत) रक्त को हृदय के दाएं निलय से फेफड़ों तक ले जाती है, जबकि फुफ्फुसीय शिरा फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त को बाएं आलिंद में लाती है।
- 3. जब हम गहरी सांस लेते हैं, तो पसलियां ऊपर और बाहर की ओर गति करती हैं तथा डायाफ्राम चपटा हो जाता है, जिसके कारण वक्षीय गुहा का आयतन कम हो जाता है और फेफड़ों के भीतर का वायुदाब वायुमंडल की तुलना में अधिक हो जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: सिनोआट्रियल नोड (SAN) को हृदय का प्राकृतिक पेसमेकर कहा जाता है जो दाएं आलिंद के ऊपरी कोने पर स्थित होता है और स्वतः लयबद्ध उत्तेजनाएं उत्पन्न करता है। कथन 2 सही है: फुफ्फुसीय धमनी शरीर की एकमात्र ऐसी धमनी है जिसमें विऑक्सीकृत रक्त प्रवाहित होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि गहरी सांस लेने (अंतःश्वसन) के दौरान डायाफ्राम के चपटे होने और पसलियों के ऊपर उठने से वक्षीय गुहा का आयतन **बढ़** जाता है, जिससे फेफड़ों के भीतर का वायुदाब वायुमंडल की तुलना में **कम** हो जाता है, और हवा फेफड़ों के अंदर आ जाती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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विलयन और उत्प्रेरण (Solutions and Catalysis) की रासायनिक गतिकी तथा ऊष्मागतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हेनरी का नियम (Henry's law) यह बताता है कि किसी तरल में गैस की विलेयता उस गैस के आंशिक दाब के व्युत्क्रमानुपाती होती है, बशर्ते तापमान स्थिर रहे और गैस तरल के साथ कोई रासायनिक अभिक्रिया न करे।
2. 'विषमांगी उत्प्रेरण' (Heterogeneous catalysis) के 'अधिष्ोषण सिद्धांत' (Adsorption theory) के अनुसार, उत्प्रेरक की सतह पर अभिकारकों का भौतिक या रासायनिक अधिशोषक होना अभिक्रिया वेग को बढ़ाता है क्योंकि इससे सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) का मान कम हो जाता है।
3. विशिष्ट उत्प्रेरक विष (Catalytic poison) वे पदार्थ होते हैं जो किसी उत्प्रेरक की सतह पर दृढ़ता से अधिशोषित होकर उसकी सक्रियता को पूरी तरह से समाप्त या कम कर देते हैं, जिससे उत्प्रेरकीय अभिक्रिया अवरुद्ध हो जाती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर में पोषण और जैव-रासायनिक उपापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राइबोफ्लेविन (विटामिन $B_2$) का सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'फ्लैविन एडेनिन डाइन्यूक्लियोटाइड' (FAD) और 'फ्लैविन मोनोन्यूक्लियोटाइड' (FMN) है, जो क्रेब्स चक्र के दौरान सक्सीनेट डीहाइड्रोजनेज एंजाइम को उत्प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
2. साइनोकोबालामिन (विटामिन $B_{12}$) में कोबाल्ट धातु आयन उपस्थित होता है, और इसके अवशोषण के लिए आमाशय की पार्श्व कोशिकाओं (Parietal cells) द्वारा स्रावित 'इन्ट्रींसिक फैक्टर' (Intrinsic factor) अनिवार्य होता है।
3. एस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन $C$) एक जल-विलेय विटामिन है जो कोलेजन संश्लेषण के दौरान प्रोलिन और लाइसिन अवशेषों के हाइड्रॉक्सीलेशन के लिए उत्तरदायी प्रो-कोलेजन हाइड्रोक्सिलाइज एंजाइम को अपचयित अवस्था (Reduced state) में बनाए रखता है।
4. विटामिन D (कैल्सीफेरोल) एक जल-विलेय विटामिन है जिसका संश्लेषण सूर्य के पराबैंगनी विकिरणों द्वारा त्वचा में होता है, और यह आंत से कैल्शियम तथा फॉस्फेट के अवशोषण को पूरी तरह से रोकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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