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General Science
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कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाते हुए उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा (कुल ऊर्जा) ऋणात्मक होती है, जो इस बात को दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी से गुरुत्वाकर्षण रूप से बंधा हुआ है।
- 2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary satellite) की कक्षीय चाल पृथ्वी की अपनी अक्ष पर घूर्णन चाल से अधिक होती है, और यह विषुवत वृत्त के तल में पश्चिम से पूर्व की ओर परिक्रमण करता है।
- 3. जब कोई उपग्रह अपनी कक्षा में गति करते हुए थोड़ा सा नीचे आता है, तो उसकी स्थितिज ऊर्जा में कमी होती है किंतु उसकी गतिज ऊर्जा में इतनी वृद्धि हो जाती है कि उसकी कुल ऊर्जा बढ़ जाती है और वह पृथ्वी की ओर गिरने लगता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि किसी गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में परिक्रमण करने वाले उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा ($E = K + U$) ऋणात्मक होती है, जहाँ गतिज ऊर्जा धनात्मक और स्थितिज ऊर्जा ऋणात्मक होती है (परंतु स्थितिज ऊर्जा का परिमाण गतिज ऊर्जा से दोगुना होता है)। ऋणात्मक कुल ऊर्जा यह सिद्ध करती है कि निकाय बद्ध (Bound system) है। कथन 2 गलत है क्योंकि भू-स्थिर उपग्रह की कक्षीय चाल लगभग 3.07 किमी/सेकंड होती है और इसका आवर्तकाल ठीक 24 घंटे होता है ताकि यह पृथ्वी के घूर्णन के साथ मेल खा सके, न कि इसकी चाल पृथ्वी के घूर्णन से अधिक होती है। कथन 3 गलत है क्योंकि यदि उपग्रह घर्षण के कारण थोड़ा नीचे आता है, तो ऊर्जा संरक्षण के अनुसार स्थितिज ऊर्जा घटने से गतिज ऊर्जा बढ़ती है और कुल ऊर्जा और अधिक ऋणात्मक (यानी कम) हो जाती है, जिससे उसका वेग बढ़ जाता है और वह वायुमंडलीय खिंचाव के कारण और नीचे आ जाता है। अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में क्रमिक वृद्धि होती है, जिसके फलस्वरूप परमाणु त्रिज्या में निरंतर कमी आती है, किंतु समूह-18 के उत्कृष्ट गैसों की परमाणु त्रिज्या (वांडरवाल्स त्रिज्या) उनके ठीक पहले आने वाले हैलोजन तत्वों की सहसंयोजक त्रिज्या की तुलना में बड़ी होती है।
2. ऑक्सीजन की तुलना में नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (First Ionization Enthalpy) का मान अधिक होता है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के 2p कक्षकों का अर्ध-पूर्ण (Half-filled) होना है।
3. आवर्त सारणी में फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण आने वाला नया इलेक्ट्रॉन पहले से उपस्थित 2p इलेक्ट्रונים से अधिक प्रतिकर्षण अनुभव करता है।
4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के कारण 4d और 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम और हाफ़िज़ियम) की परमाणु और आयनिक त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिसका मुख्य कारण 4f कक्षकों का दुर्बल आवरण प्रभाव (Shielding effect) है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic radius) सामान्यतः घटती है, क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective nuclear charge) में वृद्धि होती है जो बाहरी इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर अधिक दृढ़ता से आकर्षित करती है।
2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron gain enthalpy) का ऋणात्मक मान हैलोजन समूह में नीचे जाने पर (फ्लोरिन से आयोडीन तक) लगातार बढ़ता है, क्योंकि परमाणु आकार में वृद्धि के साथ आने वाले इलेक्ट्रॉन का नाभिक द्वारा आकर्षण अधिक प्रभावी हो जाता है।
3. आयनन एन्थैल्पी (Ionisation enthalpy) का मान किसी परमाणु की गैसीय अवस्था में उसके सबसे बाहरी कोश से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा को दर्शाता है, और इसका मान नाइट्रोजन के लिए ऑक्सीजन की तुलना में अधिक होता है क्योंकि नाइट्रोजन में अर्ध-पूरित (Half-filled) $p$-कक्षक का अतिरिक्त स्थायित्व होता है।
4. विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) पॉलिंग पैमाने पर मापी जाने वाली एक ऐसी प्रवृत्ति है जिसमें सहसंयोजक बंध में बंधे हुए इलेक्ट्रॉन युग्म को कोई परमाणु अपनी ओर आकर्षित करता है, और आवर्त सारणी में फ्लोरिन सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइपोथैलेमस द्वारा उत्पादित 'ऑक्सीटोसिन' हॉर्मोन तंत्रिका-पश्च पीयूष ग्रंथि (Neurohypophysis) द्वारा संचयित और रक्त में विमोचित किया जाता है, जो प्रसव के दौरान गर्भाशय की चिकनी पेशियों के तीव्र संकुचन और स्तनपान के समय दुग्ध निष्कासन (Milk ejection reflex) को प्रेरित करता है।
2. अधिवृक्क वल्कुट (Adrenal Cortex) के जोना ग्लोमेरुलोसा क्षेत्र से स्रावित होने वाला 'कॉर्टिसोल' (Cortisol) एक ग्लूकोकॉर्टिकॉइड है, जो ग्लाइकोजेनोलिसिस, ग्लूकोनियोजेनेसिस और प्रोटीन-वसा के अपघटन को प्रेरित करके रक्त में शर्करा के स्तर को बढ़ाता है तथा प्रतिरक्षा प्रणाली का दमन करता है।
3. अग्नाशय की लैंगरहैंस की द्वीपिका (Islets of Langerhans) की डेल्टा कोशिकाएं 'सोमैटोस्टैटिन' (Somatostatin) हॉर्मोन का स्राव करती हैं, जो अल्फा और बीटा कोशिकाओं से क्रमशः ग्लूकागॉन और इंसुलिन के स्राव को स्थानीय रूप से संदमित (Inhibit) करता है।
4. पीयूष ग्रंथि का अग्र भाग (Adenohypophysis) 'प्रोलैक्टिन' (Prolactin) का स्राव करता है, जो स्तन ग्रंथियों के विकास और दुग्ध उत्पादन को सीधे नियंत्रित करता है, तथा हाइपोथैलेमस से स्रावित होने वाला 'डोपामीन' (PIH) इस हॉर्मोन के स्राव को उत्तेजित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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आणविक भार क्या है?
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सबसे सक्रिय धातु?
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