BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
22 views

आणविक भार क्या है?

Detailed Explanation

कुल भार।
Share:

Related Questions

रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आयनिक यौगिकों के क्रिस्टल जालक में विपरीत आवेशित आयनों के बीच प्रबल स्थिरवैद्युत आकर्षण बल कार्य करते हैं, जिसके कारण ये ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं, किंतु गलित अवस्था या जलीय विलयन में इनके आयन गति के लिए स्वतंत्र हो जाने के कारण ये विद्युत का सुचालक बन जाते हैं। 2. कठोर-मृदु अम्ल-क्षार (HSAB) सिद्धांत के अनुसार, कठोर अम्ल वे होते हैं जिनका आकार छोटा, धनात्मक आवेश उच्च और ध्रुवणनीयता कम होती है, तथा वे प्राथमिकता से कठोर क्षारों के साथ अधिक स्थायी और मजबूत यौगिक का निर्माण करते हैं। 3. जब किसी दुर्बल अम्ल (जैसे एसिटिक अम्ल $CH_3COOH$) का उदासीनीकरण प्रबल क्षार (जैसे सोडियम हाइड्रोक्साइड $NaOH$) के साथ किया जाता है, तो प्राप्त लवण का जलीय विलयन जलीय जल-अपघटन के कारण अम्लीय प्रकृति का हो जाता है। 4. बफर विलयन वे विलयन होते हैं जो बाहरी मात्रा में प्रबल अम्ल या प्रबल क्षार मिलाने पर भी अपने pH मान में परिवर्तन का प्रभावी विरोध करते हैं, और अम्लीय बफर का एक उत्कृष्ट उदाहरण अमोनियम क्लोराइड ($NH_4Cl$) एवं अमोनियम हाइड्रोक्साइड ($NH_4OH$) का मिश्रण है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? आवर्त सारणी के तत्वों के विभिन्न आवर्ती गुणों और रासायनिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी परमाणु की 'द्वितीय आयनन एन्थैल्पी' (Second Ionization Enthalpy) का मान हमेशा उसकी 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' से अधिक होता है, क्योंकि उदासीन परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन निकल जाने के बाद बचे हुए इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है और आकार छोटा हो जाता है। 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान सभी हैलोजन तत्वों में क्लोरीन के लिए सर्वाधिक ऋणात्मक होता है, न कि फ्लोरीन के लिए, जिसका मुख्य कारण फ्लोरीन के बहुत छोटे आकार के कारण आने वाले अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन पर होने वाला अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षण (Interelectronic repulsion) है। 3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'लैंथेनाइड आकुंचन' (Lanthanoid Contraction) के प्रभावस्वरूप, छठी अवधि के संक्रमण तत्वों (जैसे Hafnium) की परमाणु त्रिज्या और रासायनिक गुण पाँचवीं अवधि के उनके ठीक ऊपर वाले तत्वों (जैसे Zirconium) की तुलना में भिन्न हो जाते हैं और कोई समानता नहीं दर्शाते। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों (Colligative properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure), हिमांक अवनमन और क्वथनांक उन्नयन सभी अणुसंख्यक गुणधर्म हैं, जो विलयन में उपस्थित विलेय के कणों की कुल संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि उनकी रासायनिक प्रकृति पर। 2. वैनट Hoff गुणांक ($i$) का मान वास्तविक कणों की कुल संख्या तथा वियोजन या संघनन से पहले के कणों की कुल संख्या का अनुपात होता है, और किसी वैद्युत अपघट्य के पूर्ण वियोजन की स्थिति में $i$ का मान उसमें उत्पन्न होने वाले कुल आयनों की संख्या के बराबर होता है। 3. विषमांगी उत्प्रेरण (Heterogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारकों की भौतिक अवस्थाएँ भिन्न होती हैं, और इस प्रक्रम की क्रियाविधि मुख्य रूप से 'अधिषोषण सिद्धांत' (Adsorption theory) पर आधारित है, जिसमें अभिकारक उत्प्रेरक की सतह पर अधिशोषित होकर सक्रिय संकुल बनाते हैं। 4. एंजाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अत्यधिक विशिष्ट और उच्च तापमान (लगभग 310K-370K) पर सबसे अधिक प्रभावी होते हैं, तथा किसी भी स्थिति में तापमान बढ़ाने पर एंजाइम की उत्प्रेरक सक्रियता अनंन्त काल तक बढ़ती जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? मानव शरीर को प्रभावित करने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके विशिष्ट रोगजनकों (Pathogens), संचरण के तरीकों और उनके नैदानिक लक्षणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डिप्थीरिया (Diphtheria) एक गंभीर जीवाणु जनित संक्रमण है जो 'कोरीनेबैक्टीरियम डिप्थिरियाई' (Corynebacterium diphtheriae) के कारण होता है, और यह मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हुए गले में एक विशिष्ट भूरे रंग की झिल्ली (Pseudomembrane) बनाता है जो सांस लेने में अवरोध उत्पन्न करती है। 2. जापानी एन्सेफलाइटिस (Japanese Encephalitis) एक विषाणु जनित रोग है जिसका संचरण मुख्य रूप से 'क्यूलेक्स' (Culex) प्रजाति की संक्रमित मादा मच्छरों के काटने से होता है, और यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को सीधे प्रभावित करते हुए मस्तिष्क की सूजन का कारण बनता है। 3. ट्रैकोमा (Trachoma) एक क्रोनिक क्लैमाइडियल संक्रमण है जो 'क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस' (Chlamydia trachomatis) के कारण होता है, और यह नेत्रश्लेष्मला (Conjunctiva) तथा कॉर्निया को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाकर स्थायी अंधेपन का कारण बन सकता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में वृद्धि होती है, जिसके कारण परमाणु त्रिज्या में निरंतर कमी आती है, किंतु समूह-18 के उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) की वांडरवाल्स त्रिज्या उनके पूर्ण भरे कक्षकों के कारण उनके ठीक पहले आने वाले हैलोजन तत्वों की तुलना में अधिक होती है। 2. आवर्त सारणी में फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन और पहले से उपस्थित 2p कक्षकीय इलेक्ट्रॉनों के बीच अंतःइलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण (Inter-electronic repulsion) कम हो जाता है। 3. संक्रमण तत्वों (d-ब्लॉक के तत्व) की प्रथम संक्रमण श्रेणी में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ परमाणु त्रिज्याओं में होने वाला संकुचन बहुत कम होता है, जिसका मुख्य कारण 3d कक्षकों का आवरण प्रभाव (Shielding effect) अत्यंत दुर्बल होना है। 4. किसी परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) एक आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ती है और वर्ग में नीचे जाने पर घटती है, तथा पॉलिंग पैमाने पर फ्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता सभी तत्वों में सर्वाधिक होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.