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General Science
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नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) और श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब यूरेनियम-235 ($^{235}U$) के नाभिक पर एक मंद गति का न्यूट्रॉन (Thermal neutron) प्रहार करता है, तो यह विखंडित होकर बेरियम और क्रिप्टन जैसे हल्के नाभिक बनाता है तथा औसत रूप से 2 से 3 तीव्र न्यूट्रॉन मुक्त करता है।
- 2. नाभिकीय रिएक्टर में 'नियंत्रक छड़ें' (Control rods) जैसे कैडमियम या बोरॉन का उपयोग न्यूट्रॉन को पूरी तरह से अवशोषित करके श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित गति में रखने के लिए किया जाता है, जबकि 'मंदक' (Moderator) के रूप में भारी जल ($D_2O$) या ग्रेफाइट का उपयोग तीव्र न्यूट्रॉन की गति को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
- 3. 'क्रांतिक द्रव्यमान' (Critical Mass) विखंडनीय material की वह न्यूनतम मात्रा है जो श्रृंखला अभिक्रिया को स्व-संधारित (Self-sustaining) बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: जब यूरेनियम-235 पर थर्मल न्यूट्रॉन की बमबारी की जाती है, तो नाभिकीय विखंडन के फलस्वरूप बेरियम ($Ba$) और क्रिप्टन ($Kr$) बनते हैं और लगभग 2 से 3 नए न्यूट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। कथन 2 गलत है: मंदक (Moderator) का मुख्य कार्य तीव्र गति वाले न्यूट्रॉन की गति को *मंद* (धीमा) करना होता है, न कि बढ़ाना, ताकि वे आगे और विखंडन कर सकें। नियंत्रक छड़ें न्यूट्रॉन को अवशोषित करती हैं। कथन 3 सही है: क्रांतिक द्रव्यमान वह न्यूनतम मात्रा है जो निरंतर श्रृंखला अभिक्रिया को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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विटामिन C की कमी से?
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मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न हार्मोनल नियंत्रण प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पीयूष ग्रंथि का पश्च भाग (न्यूरोहाइपोफाइसिस) 'ऑक्सीटोसिन' और 'वैसोप्रेसिन' (ADH) हार्मोनों का संश्लेषण स्वयं करता है, जिनका स्रावण हाइपोटैलेमस के न्यूरोसेक्रेटरी तंत्र के नियंत्रण में होता है।
2. अधिवृक्क वल्पुट (Adrenal Cortex) द्वारा स्रावित 'एल्डोस्टेरॉन' (Aldosterone) एक मिनरलोकोर्टिकोइड है जो वृक्क नलिकाओं में सोडियम और जल के पुनरावशोषण को प्रेरित करता है तथा पोटैशियम और फॉस्फेट आयनों के उत्सर्जन को बढ़ावा देता है।
3. अग्न्याशय की लैंगरहैंस द्वीपिकाओं की बीटा कोशिकाएँ 'इंसुलिन' का स्रावण करती हैं, जो एक पेप्टाइड हॉर्मोन है और यकृत व वसा ऊतकों में ग्लाइकोजेनेसिस की प्रक्रिया को प्रेरित करके रक्त में ग्लूकोज के स्तर को कम करता है।
4. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'थायरोकैल्सीटोनिन' (TCT) हार्मोन रक्त में कैल्शियम आयनों के स्तर को बढ़ाता है, जिससे अस्थियों से कैल्शियम का विखनिजीकरण तेज हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन, समन्वय यौगिकों और अम्ल-क्षार सिद्धांतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फजान के नियमों (Fajans' rules) के अनुसार, आयनिक यौगिक में सहसंयोजक लक्षण तब अधिक होते हैं जब धनायन का आकार छोटा हो, ऋणायन का आकार बड़ा हो और धनायन पर आवेश का घनत्व उच्च हो।
2. कठोर-मृदु अम्ल-क्षार (HSAB) सिद्धांत के अनुसार, कठोर अम्ल (Hard acids) सामान्यतः छोटे आकार, उच्च धनात्मक आवेश और कम ध्रुवणनीयता वाले धनायन होते हैं जो कठोर क्षारों के साथ मजबूत और स्थिर संकुल बनाते हैं।
3. लुईस अम्ल संकल्पना के अंतर्गत, वे सभी स्पीशीज लुईस अम्ल के रूप में कार्य करती हैं जो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair of electrons) दान करने की प्रवृत्ति रखती हैं, जैसे अमोनिया ($NH_3$) और जल ($H_2O।$)
4. समइलेक्ट्रॉनिक (Isoelectronic) स्पीशीज के बीच, नाभिकीय आवेश ($Z$) में वृद्धि होने पर ऋणायनों के आकार में कमी आती है जबकि धनायनों का आकार बढ़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न हार्मोनल विकारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पीयूष ग्रंथि (Pituitary gland) का पश्च भाग (Neurohypophysis) 'ऑक्सीटोसिन' और 'वैसोप्रेसिन' (ADH) हार्मोनों का संश्लेषण और स्रावण दोनों स्वयं करता है, जिनका मुख्य नियंत्रण हाइपोटैलेमस के न्यूरोसेक्रेटरी तंत्र द्वारा होता है।
2. अधिवृक्क वल्पुट (Adrenal Cortex) द्वारा स्रावित 'कार्टिसोल' (Cortisol) एक ग्लूकोकॉर्टिकोइड है जो ग्लाइकोनियोजेनेसिस को प्रेरित करता है, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को दबाता है और शरीर में सूजन-रोधी (Anti-inflammatory) रूप में कार्य करता है।
3. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'कैल्सीटोनिन' (Calcitonin) और पैराथाइरॉइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'पैराथर्मोन' (PTH) दोनों मिलकर रक्त में कैल्शियम आयनों के होमियोस्टैसिस को विपरीत दिशाओं में नियंत्रित करते हैं।
4. यदि अधिवृक्क वल्पुट (Adrenal Cortex) का अल्पस्रावण हो जाए, तो इसके कारण 'कुशिंग सिंड्रोम' (Cushing's syndrome) नामक विकार उत्पन्न होता है, जिसमें रक्त शर्करा में अत्यधिक वृद्धि और शरीर पर वसा का असामान्य संचय होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर सकती हैं, जबकि लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म दान करने की प्रवृत्ति रखते हैं, और इनके मध्य उपसहसंयोजक बंध (Co-ordinate bond) का निर्माण होता है।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी सिद्धांत के अनुसार, एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में केवल एक प्रोटॉनों ($H^+$) का अंतर होता है, और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार हमेशा एक प्रबल क्षार होता है।
3. जल की आयनिक गुणनफल स्थिरांक ($K_w$) का मान ताप बढ़ने पर बढ़ता है, जिसके कारण शुद्ध जल का pH मान 298 K पर 7 होने के बावजूद उच्च तापमान पर उदासीन जल का pH मान 7 से कम हो जाता है, यद्यपि वह तब भी उदासीन ही रहता है क्योंकि $[H^+] = [OH^-]$ बना रहता है।
4. बफर विलयन (Buffer solution) वे विलयन होते हैं जो बाहर से थोड़ी मात्रा में अम्ल या क्षार मिलाने पर अपने pH परिवर्तन का कड़ा प्रतिरोध करते हैं, और अम्लीय बफर का एक उत्कृष्ट उदाहरण एसिटिक अम्ल ($CH_3COOH$) तथा सोडियम एसिटेट ($CH_3COONa$) का मिश्रण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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