BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
7 views

भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के विकास और प्रमुख संगठनों के वैचारिक तथा संगठनात्मक स्वरूप के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1913 में स्थापित 'गदर पार्टी' ने अपने साप्ताहिक पत्र के माध्यम से ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुला विद्रोह का आह्वान किया था और लाला हरदयाल इसके प्रथम महामन्त्री थे, जबकि पार्टी का मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को के 'युगांतर आश्रम' में बनाया गया था।
  2. 2. हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) की स्थापना वर्ष 1924 में कानपुर में सचिंद्रनाथ सन्याल, रामप्रसाद बिस्मिल और जोगेश चंद्र चटर्जी द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य उत्तर भारत में एक संघीय गणराज्य की स्थापना करना था।
  3. 3. वर्ष 1928 में फिरोजशाह कोटला मैदान में आयोजित बैठक के दौरान चंद्रशेखर आजाद के प्रस्ताव पर HRA का नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया, जिसमें समाजवादी विचारधारा को संगठन का मुख्य आधार बनाया गया।
  4. 4. भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधानसभा में फेंके गए बम का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश अधिकारियों की हत्या करना था, और वे इस घटना के बाद मौके से फरार होने में सफल रहे थे तथा कभी गिरफ्तार नहीं हुए।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भकना द्वारा गदर पार्टी की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्यालय 'युगांतर आश्रम' था। वर्ष 1924 में कानपुर में सचिंद्रनाथ सन्याल, रामप्रसाद बिस्मिल और जोगेश चंद्र चटर्जी द्वारा हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) की स्थापना की गई। सितंबर 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में इस संगठन का नाम बदलकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) कर दिया गया। कथन 4 गलत है क्योंकि भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधानसभा में बम फेंकने का उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं बल्कि 'बहरे कानों को सुनाना' था, और वे अपनी गिरफ्तारी देने के उद्देश्य से मौके से भागे नहीं थे। विकिपीडिया संदर्भ
Share:

Related Questions

मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, स्थापत्य कला और उत्तराधिकार के संघर्षों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जहाँगीर के शासनकाल में उस्ताद ईसा और मास्टर अहमद के मुख्य वास्तुशिल्प मार्गदर्शन में स्थापत्य कला में संगेमरमर का प्रयोग अत्यधिक बढ़ गया तथा पित्रा दुर्रा (Pietra Dura) जड़ाऊ कला का प्रारंभिक और व्यापक उपयोग ताजमहल से भी पहले 'इत्मद-उद-दौला के मकबरे' में किया गया था, जिसका निर्माण नूरजहाँ द्वारा करवाया गया था। 2. शाहजहाँ के शासनकाल के उत्तरार्ध में उसके पुत्रों के बीच हुए उत्तराधिकार के युद्धों में 'धर्मات का युद्ध' (1658) निर्णायक था, जिसमें औरंगजेब ने दारा शिकोह को पराजित किया था, जबकि इस युद्ध से पूर्व औरंगजेब ने मुराद बख्श के साथ गठबंधन किया था। 3. औरंगजेब ने अपने शासनकाल के शुरुआती वर्षों में संगीत पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था और शाही दरबार में संगीतकारों एवं गायकों के प्रवेश को निषेध कर दिया था, किंतु इसके बावजूद मुगल इतिहास में फारसी भाषा में संगीत पर सबसे अधिक पुस्तकें और ग्रंथ औरंगजेब के ही शासनकाल में लिखे गए थे। 4. बाबर ने अपनी आत्मकथा 'तुझुक-ए-बाबरी' (बाबरनामा) की रचना अपनी राजभाषा फारसी में की थी, जिसमें उसने तत्कालीन भारत की राजनीतिक स्थिति, सामाजिक दशा, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों का अत्यंत सजीव एवं प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत किया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? बिहार में 1857 के महान विद्रोह के दौरान वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के सैन्य अभियानों तथा संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बाबू कुंवर सिंह ने दानापुर के विद्रोही सिपाहियों के साथ मिलकर 25 जुलाई 1857 को आरा पर अधिकार कर लिया था, और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध अपने अभियानों के दौरान उन्होंने अंग्रेजों को पराजित करते हुए उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और बलिया तक के क्षेत्रों में सफल सैन्य गतिविधियाँ संचालित की थीं। 2. ब्रिटिश सेनापति मेजर विंसेंट आयर के नेतृत्व में आरा को पुनः अंग्रेजों के अधीन करने के पश्चात कुंवर सिंह ने अपनी रणनीति बदलते हुए मध्य भारत और अवध की ओर प्रस्थान किया, तथा नाना साहब की सेना के साथ मिलकर लखनऊ और कानपुर के क्षेत्रों में अंग्रेजों के विरुद्ध निर्णायक लड़ाइयाँ लड़ीं। 3. बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु (26 अप्रैल 1858) के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने कैमूर की पहाड़ियों (रोहतास के जंगलों) से ब्रिटिश सेना के विरुद्ध लंबे समय तक गुरिल्ला (छापामार) युद्ध का सफल संचालन जारी रखा था, और एक समानांतर सरकार स्थापित कर अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था। 4. अमर सिंह को ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर अंततः कलकत्ता की जेल में सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया गया था, जिससे बिहार में 1857 का यह सशस्त्र प्रतिरोध पूरी तरह समाप्त हो गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस महान विद्रोह का कोई केंद्रीय संगठन, सर्वमान्य अखिल भारतीय नेता और एक सुनिश्चित राजनीतिक योजना का अभाव था, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के विद्रोही नेता अपने-अपने स्थानीय हितों और सीमाओं से बंधे रहे तथा उनमें आपस में कोई प्रभावी सामरिक समन्वय स्थापित नहीं हो सका। 2. भारतीय समाज का एक बहुत बड़ा शिक्षित वर्ग, आधुनिक व्यापारी समुदाय और अधिकांश देशी रियासतों के शासक (जैसे सिंधिया, होलकर और हैदराबाद के निज़ाम) या तो इस विद्रोह से तटस्थ रहे या ब्रिटिश सरकार को सक्रिय सैन्य व आर्थिक सहायता प्रदान की। 3. विद्रोही सैनिकों के पास आधुनिक हथियारों, कड़े सैन्य अनुशासन और संचार के आधुनिक साधनों का भारी अभाव था, जबकि ब्रिटिश सेना के पास टेलीग्राम और रेलवे जैसी उन्नत तकनीक व श्रेष्ठ सैन्य नेतृत्व उपलब्ध था। 4. विद्रोहियों के पास एक स्पष्ट, आधुनिक और वैकल्पिक सामाजिक-आर्थिक तथा राजनीतिक विजन था, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश राज को समाप्त करने के बाद एक आधुनिक लोकतांत्रिक संविधान के निर्माण का विस्तृत खाका तैयार किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और 'क्वीन विक्टोरिया की शाही घोषणा' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया गया तथा भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया, जिसके प्रशासन के संचालन के लिए ब्रिटेन में एक नए पद 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) का सृजन किया गया जो ब्रिटिश कैबिनेट का एक सदस्य था। 2. भारत के राज्य सचिव की सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'इंडिया काउंसिल' (भारत परिषद) का गठन किया गया, जिसके अधिकांश सदस्यों के लिए यह अनिवार्य किया गया कि वे कम से कम 10 वर्ष तक भारत में सेवा कर चुके हों या ब्रिटिश भारत में निवास कर चुके हों। 3. क्वीन विक्टोरिया की 1 नवंबर 1858 की घोषणा (जिसे इलाहाबाद के दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया था) के माध्यम से भारतीय नरेशों (देशी रियासतों) के साथ की गई संधियों और समझौतों का सम्मान करने का आश्वासन दिया गया तथा भविष्य में ब्रिटिश साम्राज्य के किसी भी प्रकार के क्षेत्रीय विस्तार (Annexation Policy) की नीति को समाप्त करने की औपचारिक घोषणा की गई। 4. इस घोषणा में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया कि भारत के सभी निवासियों को उनकी नस्ल, धर्म या रंग के भेदभाव के बिना उनकी योग्यता के आधार पर सभी लोक सेवाओं (सरकारी पदों) में समान रूप से नियुक्त किया जाएगा, और इस नीति को तुरंत प्रभाव से लागू कर सिविल सेवा परीक्षाओं में भारतीयों के लिए प्रवेश के मार्ग पूरी तरह बाधा-मुक्त कर दिए गए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य और उनके प्रशासनिक एवं राजस्व सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. शिवाजी की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में मंत्रिपरिषद को 'अष्टप्रधान' कहा जाता था, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे सम्राट के प्रति उत्तरदायी होता था और इनमें से 'पंडितराव' और 'न्यायाधीश' को छोड़कर शेष सभी मंत्रियों को आवश्यकता पड़ने पर सैन्य अभियानों का नेतृत्व भी करना पड़ता था। 2. शिवाजी ने दक्कन में मलिक अंबर की राजस्व व्यवस्था के आधार पर भूमि की पैमाइश कराकर भू-राजस्व निर्धारित किया था, जिसमें प्रारंभिक वर्षों में उपज का 33 प्रतिशत भाग राज्य की आय के रूप में लिया जाता था, जिसे बाद में बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया था। 3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के प्रमुख बाह्य कर थे, जहाँ 'चौथ' पड़ोसी मुगल क्षेत्रों की कुल आय का 25 प्रतिशत हिस्सा इस बात के बदले वसूला जाता था कि मराठा सेना उन क्षेत्रों पर आक्रमण नहीं करेगी, जबकि 'सरदेशमुखी' 10 प्रतिशत का एक अतिरिक्त कर था जिसे शिवाजी संपूर्ण महाराष्ट्र और अपने पैतृक अधिकारों के दावे के रूप में वसूलते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.