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History of India
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, स्थापत्य कला और उत्तराधिकार के संघर्षों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जहाँगीर के शासनकाल में उस्ताद ईसा और मास्टर अहमद के मुख्य वास्तुशिल्प मार्गदर्शन में स्थापत्य कला में संगेमरमर का प्रयोग अत्यधिक बढ़ गया तथा पित्रा दुर्रा (Pietra Dura) जड़ाऊ कला का प्रारंभिक और व्यापक उपयोग ताजमहल से भी पहले 'इत्मद-उद-दौला के मकबरे' में किया गया था, जिसका निर्माण नूरजहाँ द्वारा करवाया गया था।
- 2. शाहजहाँ के शासनकाल के उत्तरार्ध में उसके पुत्रों के बीच हुए उत्तराधिकार के युद्धों में 'धर्मات का युद्ध' (1658) निर्णायक था, जिसमें औरंगजेब ने दारा शिकोह को पराजित किया था, जबकि इस युद्ध से पूर्व औरंगजेब ने मुराद बख्श के साथ गठबंधन किया था।
- 3. औरंगजेब ने अपने शासनकाल के शुरुआती वर्षों में संगीत पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था और शाही दरबार में संगीतकारों एवं गायकों के प्रवेश को निषेध कर दिया था, किंतु इसके बावजूद मुगल इतिहास में फारसी भाषा में संगीत पर सबसे अधिक पुस्तकें और ग्रंथ औरंगजेब के ही शासनकाल में लिखे गए थे।
- 4. बाबर ने अपनी आत्मकथा 'तुझुक-ए-बाबरी' (बाबरनामा) की रचना अपनी राजभाषा फारसी में की थी, जिसमें उसने तत्कालीन भारत की राजनीतिक स्थिति, सामाजिक दशा, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों का अत्यंत सजीव एवं प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि इत्मद-उद-दौला के मकबरे (नूरजहाँ द्वारा निर्मित) में पहली बार पूर्णतः संगमरमर का उपयोग और पित्रा दुर्रा (रत्न जड़ाऊ कला) का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया गया था। कथन 2 सही है; उत्तराधिकार के युद्धों में धर्मट और सामूगढ़ के युद्धों में औरंगजेब ने दारा शिकोह को पराजित किया था तथा इस दौरान उसने मुराद के साथ समझौता किया था। कथन 3 सही है क्योंकि औरंगजेब ने व्यक्तिगत रूप से संगीत पर प्रतिबंध लगाया था, परंतु विडंबना यह है कि फारसी में संगीत पर सबसे अधिक ग्रंथ इसी के काल में रचे गए। कथन 4 गलत है क्योंकि बाबर ने अपनी आत्मकथा 'तुझुक-ए-बाबरी' की रचना फारसी में नहीं, बल्कि अपनी मातृभाषा **चगताई तुर्की** में की थी। मुगल सम्राटों के शासन और संस्कृति के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के ऐतिहासिक संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी के चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्वितीय को पराजित किया था और इस विजय के उपरांत 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी, तथा उसके शासनकाल में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने पल्लव वंश की राजधानी कांचीपुरम की यात्रा की थी।
2. बादामी के चालुक्य वंश के सबसे प्रतापी शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत विवरण ऐहोल प्रशस्ति में मिलता है, जिसे चालुक्य दरबारी कवि रविकीर्ति ने संस्कृत भाषा में रचित किया था।
3. चोल राजवंश के प्रतापी शासक राजराज प्रथम ने अपनी सुदृढ़ नौसैनिक शक्ति के बल पर मालदीव द्वीपों को विजित किया और श्रीलंका के उत्तरी भाग पर अधिकार कर लिया, तथा तंजावुर में प्रसिद्ध राजराजेश्वर (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण करवाया जो द्रविड़ वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
4. हर्षवर्धन के प्रशासन के दौरान प्रांतों को 'भुक्ति' कहा जाता था, जिसके प्रमुख को 'उपरिक' कहा जाता था, और हर्ष के साम्राज्य में बौद्ध धर्म की हीनयान शाखा को विशेष राजकीय संरक्षण प्राप्त था, जिसके तहत कन्नौज में महामोक्ष परिषद का आयोजन किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गदर पार्टी और इसके क्रांतिकारी कार्यक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सोहन सिंह भकना द्वारा स्थापित 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' नामक संगठन ने ही आगे चलकर 'गदर पार्टी' का रूप लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से भारत से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था।
2. लाला हरदयाल द्वारा सैन फ्रांसिस्को से प्रकाशित साप्ताहिक पत्र 'गदर' का मुख्य पृष्ठ हमेशा 'अंग्रेजी राज का कच्चा चिट्ठा' शीर्षक के तहत प्रकाशित होता था, जिसमें ब्रिटिश नीतियों की आर्थिक और राजनीतिक असफलता रेखांकित की जाती थी।
3. प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ होने पर गदर पार्टी के क्रांतिकारियों ने 'गदर दी गूँज' और अन्य पैम्फलेट्स के माध्यम से विदेशों में रह रहे भारतीयों से भारत लौटकर ब्रिटिश सेना के भारतीय सैनिकों को बगावत के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया था।
4. गदर आंदोलन की गुप्त योजनाओं का समय से पूर्व लीक हो जाना और ब्रिटिश खुफिया तंत्र द्वारा इसे प्रभावी ढंग से कुचल दिए जाने के कारण वर्ष 1915 का 'गदर षड्यंत्र' सफल नहीं हो सका था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर महात्मा गांधी ने चंपारण का दौरा किया था, जहाँ तिनकैया पद्धति के अंतर्गत यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी ज़मीन के 3/20 वें हिस्से पर नील की अनिवार्य खेती कराई जाती थी।
2. चंपारण कृषि अधिनियम (1918) के पारित होने के बाद तिनकैया प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और बागान मालिकों द्वारा किसानों से अवैध रूप से वसूले गए धन का 50 प्रतिशत हिस्सा वापस लौटाने का आदेश दिया गया था।
3. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में, फसल के पूर्ण रूप से बर्बाद हो जाने के बावजूद ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा भू-राजस्व वसूलने के निर्णय के विरोध में महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल ने किसानों का नेतृत्व किया, जिसमें विट्ठलभाई पटेल और इंदुलाल याग्निक का भी महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ था।
4. खेड़ा सत्याग्रह के दौरान सरकार द्वारा यह गुप्त निर्देश जारी किया गया था कि भू-राजस्व की वसूली केवल उन्हीं किसानों से की जाए जो भुगतान करने में सक्षम हैं, और इसी आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने पहली बार भारत में सविनय अवज्ञा (Civil Disobedience) का सफल प्रयोग किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन, गांधी-इरविन समझौते और गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गांधी-इरविन समझौते (5 मार्च 1931) के तहत वायसराय इरविन ने उन सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करना स्वीकार कर लिया था जिन पर हिंसा के गंभीर आरोप थे या जो हत्या के मामलों में सजा काट रहे थे।
2. कराची में आयोजित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1931 के अधिवेशन में गांधी-इरविन समझौते को समर्थन प्रदान किया गया था, और इसी अधिवेशन में महात्मा गांधी ने प्रसिद्ध यह कथन कहा था कि "गांधी मर सकता है, परंतु गांधीवाद हमेशा जीवित रहेगा।"
3. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में भाग लेने के लिए महात्मा गांधी 'एस.एस. राजपूताना' नामक जहाज से लंदन गए थे, जहाँ उन्होंने न केवल कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, बल्कि 'कम्युनल अवार्ड' के मुद्दे पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ हुए समझौते के तहत पृथक् निर्वाचन प्रणालियों को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया था।
4. वर्ष 1932 में जब महात्मा गांधी यरवदा जेल में थे, तब ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड द्वारा घोषित 'कम्युनल अवार्ड' के विरोध में उन्होंने आमरण अनशन शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप डॉ. अंबेडकर और गांधीजी के समर्थकों के बीच 'पूना पैक्ट' पर हस्ताक्षर हुए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के कला, प्रशासन और राजनीतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महाबलीपुरम के प्रसिद्ध रथ मंदिरों का निर्माण पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महमल्ल) के शासनकाल में हुआ था, और ये सभी मंदिर एकात्म (Monolithic) चट्टानों को काटकर बनाए गए हैं।
2. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसकी जानकारी हमें कालिदास की प्रसिद्ध रचना 'हर्षचरित' से मिलती है।
3. चोल राजवंश की स्थानीय स्वशासन प्रणाली, विशेषकर उत्तरमेरूर अभिलेखों में वर्णित ग्राम सभाओं और चुनावों की कार्यप्रणाली, उनकी प्रशासनिक उत्कृष्टता का एक अनूठा उदाहरण थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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