BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
6 views

मौर्योत्तर काल और गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन राजवंश द्वारा ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि अनुदान देने की प्रथा का बड़े पैमाने पर आरंभ किया गया, जिससे सामंतवाद के बीज पड़े और प्रशासनिक अधिकारों का विकेंद्रीकरण होने लगा।
  2. 2. गुप्त काल में 'भूमि छिद्र न्याय' (Bhumichhidra Nyaya) की अवधारणा के अंतर्गत बंजर या अप्रयुक्त भूमि को जोतने वाले को कर से मुक्त स्थायी स्वामित्व प्रदान किया जाता था, जिसका उल्लेख विभिन्न ताम्रपत्र अभिलेखों में मिलता है।
  3. 3. गुप्त साम्राज्य की स्वर्ण मुद्राएँ, जिन्हें 'दिनार' कहा जाता था, कुषाणों की स्वर्ण मुद्राओं की तुलना में सोने की शुद्धता और वजन में अधिक श्रेष्ठ थीं, और गुप्त काल के संपूर्ण इतिहास में इन सिक्कों की शुद्धता और गुणवत्ता में कभी कोई गिरावट नहीं आई।
  4. 4. गुप्तोत्तर काल में श्रेणियों (Guilds) या शिल्पियों के संगठनों का प्रभाव और अधिक सुदृढ़ हो गया, तथा मंदसोर अभिलेख से यह स्पष्ट होता है कि रेशम बुनकरों की एक श्रेणी ने अपनी पारंपरिक व्यावसायिक गतिविधियों को छोड़कर पूरी तरह से सेना में भर्ती होना स्वीकार कर लिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि मौर्योत्तर काल में सातवाहन राजाओं ने धार्मिक उद्देश्यों के लिए कर-मुक्त भूमि अनुदान (अग्रहार) देने की प्रथा शुरू की थी। कथन 2 सही है, गुप्त काल में 'भूमि छिद्र न्याय' का अर्थ ऐसी भूमि से था जो पहली बार जोती जाती थी और उस पर कृषक का स्वामित्व होता था। कथन 3 गलत है क्योंकि गुप्त साम्राज्य के उत्तरार्ध में (विशेषकर स्कंदगुप्त के बाद) आर्थिक संकट और हूणों के आक्रमणों के कारण स्वर्ण मुद्राओं (दिनार) में सोने की शुद्धता घटने लगी थी और तांबे की मिलावट बढ़ने लगी थी। कथन 4 गलत है क्योंकि मंदसोर अभिलेख (Silk Weavers Guild inscription) के अनुसार रेशम बुनकरों की श्रेणी ने रेशम बुनने का व्यवसाय छोड़कर लाट विषय से मंदसौर आकर रेशम के अलावा अन्य व्यवसायों (जैसे तेलकी दुकान या धनुर्विद्या) को अपनाया था, न कि पूरी तरह सेना में भर्ती होना स्वीकार किया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में प्राचीन भारत के महाजनपद काल और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें वज्जी संघ आठ कुलों का एक संघ था और इसकी राजधानी वैशाली प्राचीन विश्व के शुरुआती गणतंत्रों में से एक थी। 2. मगध के उत्थान में उसकी भौगोलिक स्थिति का बहुत बड़ा योगदान था; राजगीर (राजगृह) जैसी प्राकृतिक रूप से सुरक्षित पाँच पहाड़ियों से घिरी राजधानी और उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी वाले क्षेत्रों के समीप होने के कारण इसे सैन्य एवं आर्थिक सुदृढ़ता प्राप्त हुई। 3. हर्यक वंश के संस्थापक बिम्बिसार ने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए वैवाहिक संबंधों की नीति अपनाई और कौशल, मद्र तथा लिच्छवि राजवंशों के साथ संबंध स्थापित किए, तथा अवंती के राजा प्रद्योत के बीमार पड़ने पर अपने राजवैद्य जीवक को उनकी सेवा में भेजा था। 4. शिशुनाग वंश के शासक कालाशोक के शासनकाल में ही पाटलिपुत्र में बौद्ध धर्म की द्वितीय संगीति का आयोजन किया गया था, जिसमें बौद्ध संघ दो प्रमुख संप्रदायों—स्थविर और महासंघिक—में विभाजित हो गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मौर्योत्तर काल तथा गुप्त साम्राज्य के दौरान आर्थिक संरचना, सिक्कों के प्रचलन और भूमि अनुदान व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गुप्त काल में कुषाण काल की तुलना में सोने के सिक्कों (दीनार) की प्रचुरता तो अवश्य मिलती है, किंतु उनकी शुद्धता में निरंतर गिरावट आई तथा उत्तर-गुप्त काल तक आते-आते सोने के सिक्कों का प्रचलन लगभग समाप्त हो गया और व्यापार में मुद्राहीनता (Monetization decline) की स्थिति उत्पन्न हो गई। 2. सातवाहन काल से आरंभ हुई ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को भूमि अनुदान (Agrahara) देने की प्रथा गुप्त काल में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गई, जिसके परिणामस्वरूप प्रशासनिक एवं आर्थिक विकेंद्रीकरण को बढ़ावा मिला और स्थानीय किसानों पर सामंती नियंत्रण मजबूत हुआ। 3. गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था में आंतरिक व्यापार का भारी पतन हो चुका था, जिसके कारण श्रेणियों (Guilds/Shrenis) का महत्व पूरी तरह समाप्त हो गया और नगरों (जैसे पाटलिपुत्र और वैशाली) का क्षय होने लगा, जैसा कि फाह्यान और ह्वेनसांग के विवरणों से स्पष्ट होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध हुए संघर्ष और उसके दमन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी अहमदुल्लाह शाह को 'डंका शाह' भी कहा जाता था, और उनके दमन के लिए ब्रिटिश अधिकारी कर्नल नील और बाद में जनरल कैंपबेल ने मुख्य भूमिका निभाई थी। 2. बरेली में रोहिल्ला सेना का नेतृत्व करते हुए खान बहादुर खान ने अपनी स्वतंत्र सरकार स्थापित की थी, किंतु अंततः ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने इस विद्रोह को कुचलकर बरेली पर पुनः अधिकार कर लिया। 3. इलाहाबाद (प्रयागराज) में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले लियाकत अली ने कलेक्ट्रेट पर अधिकार कर लिया था, और ब्रिटिश जनरल नील ने यहाँ अत्यंत क्रूरतापूर्वक दमन चक्र चलाते हुए सैकड़ों लोगों को फाँसी पर लटका दिया था। 4. खान बहादुर खान को अंग्रेजों द्वारा जीवित पकड़ लिया गया था और उन्हें युद्धबंदी के रूप में लंदन भेज दिया गया था, जहाँ उनकी प्राकृतिक मृत्यु हुई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? चंपारण सत्याग्रह, खेड़ा सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर महात्मा गांधी ने बिहार के चंपारण का दौरा किया था, जहाँ यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया' प्रथा (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध सफल सत्याग्रह का नेतृत्व किया। 2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में, जहाँ फसल खराब हो जाने के कारण किसानों ने लगान माफी की मांग की थी, महात्मा गांधी ने नेतृत्व संभाला और इंदुलाल याग्निक, सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे युवा नेताओं ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप सरकार ने केवल उन्हीं किसानों से लगान वसूलने का निर्देश दिया जो इसे चुकाने में सक्षम थे। 3. फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की घटना के पश्चात महात्मा गांधी ने बारोली में कांग्रेस की बैठक बुलाई और ब्रिटिश सरकार द्वारा दमनकारी नीतियां वापस न लिए जाने के कारण असहयोग आंदोलन को राष्ट्रव्यापी स्तर पर और अधिक तीव्र करने की घोषणा की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? मौर्य साम्राज्य के प्रशासन, आर्थिक नियंत्रण और सामाजिक जीवन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार, मौर्यकालीन केंद्रीय प्रशासन में कर संग्रह और राजकीय आय के निर्धारण का सर्वोच्च उत्तरदायित्व 'समाहर्त्ता' नामक अधिकारी का था, जबकि राजकोष और अभिलेखागार का मुख्य संरक्षक 'सन्निधातृ' कहलाता था। 2. मेगस्थनीज द्वारा वर्णित 'इंडिका' के अनुसार, पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन तीस सदस्यों की एक नगर परिषद द्वारा चलाया जाता था, जो छह समितियों में विभाजित थी, और इनमें से पाँचवीं समिति का मुख्य कार्य विक्रय वस्तुओं पर लगाए जाने वाले कर (मूल्य का दसवां भाग) के रूप में कर चोरी करने वालों को मृत्युदंड देना था। 3. अशोक के अपने धम्म महामात्रों की नियुक्ति के माध्यम से समाज में नैतिक संहिता को बढ़ावा दिया गया, किंतु उनके 'स्तंभ लेख IV' से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने न्याय प्रशासन में एकरूपता लाते हुए मृत्युदंड प्राप्त कैदियों को क्षमादान देने या उनकी सजा माफ करने के लिए तीन दिन का अतिरिक्त 'जीवन-दान' अवकाश प्रदान किया था। 4. मौर्य काल में राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण वाले उद्योगों (जैसे खान, वस्त्र और मदिरा उत्पादन) में कार्यरत श्रमिकों और कारीगरों के नियमन के लिए अर्थशास्त्र में कड़े दंडों का विधान था, और विदेशी व्यापारियों के आवागमन व गतिविधियों की निगरानी के लिए अलग से 'अतिथियों' (विदेशी पर्यटकों/व्यापारियों) के विभाग की व्यवस्था थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.