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History of India
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चंपारण सत्याग्रह, खेड़ा सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर महात्मा गांधी ने बिहार के चंपारण का दौरा किया था, जहाँ यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया' प्रथा (जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध सफल सत्याग्रह का नेतृत्व किया।
- 2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह में, जहाँ फसल खराब हो जाने के कारण किसानों ने लगान माफी की मांग की थी, महात्मा गांधी ने नेतृत्व संभाला और इंदुलाल याग्निक, सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे युवा नेताओं ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप सरकार ने केवल उन्हीं किसानों से लगान वसूलने का निर्देश दिया जो इसे चुकाने में सक्षम थे।
- 3. फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की घटना के पश्चात महात्मा गांधी ने बारोली में कांग्रेस की बैठक बुलाई और ब्रिटिश सरकार द्वारा दमनकारी नीतियां वापस न लिए जाने के कारण असहयोग आंदोलन को राष्ट्रव्यापी स्तर पर और अधिक तीव्र करने की घोषणा की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
चंपारण सत्याग्रह (1917) महात्मा गांधी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह था, जहाँ किसानों को 'तीनकठिया' प्रणाली के तहत अपनी भूमि के 3/20वें भाग पर नील की खेती करने के लिए बाध्य किया जाता था। खेड़ा सत्याग्रह (1918) गुजरात के खेड़ा जिले में अकाल और फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश सरकार द्वारा भू-राजस्व वसूले जाने के विरोध में किया गया था, जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल और इंदुलाल याग्निक ने गांधीजी का भरपूर सहयोग किया था। इसके विपरीत, कथन 3 असत्य है क्योंकि फरवरी 1922 में 'चौरी-चौरा' हिंसा के कारण महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया था, न कि इसे और अधिक तीव्र करने की घोषणा की थी। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (विशेषकर पटना, दानापुर, आरा और मुजफ्फरपुर) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खाँ ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए इस जन-विद्रोह के दौरान अफीम के एक ब्रिटिश अधिकारी डॉ. लॉयल की हत्या कर दी गई थी।
2. दानापुर छावनी (Danapur Cantonment) के 7वीं, 8वीं और 40वीं देशी पैदल सेना के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और वे सोन नदी पार करके शाहाबाद जिले में प्रवेश कर गए थे, जहाँ उन्होंने बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व को स्वीकार किया था।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा क्षेत्र में विद्रोह के दौरान यूरोपीय अधिकारियों को भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था, तथा छपरा (सारण) में मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में स्थानीय विद्रोही सैनिकों और जमींदारों ने ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती दी थी।
4. आरा (शाहाबाद) में बाबू कुंवर सिंह द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ी गई अंतिम सफल सैन्य झड़प उनके गृह नगर जगदीशपुर में अप्रैल 1858 में लड़ी गई थी, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश सेना के कैप्टन ली ग्रांड को पूरी तरह पराजित किया था और इसके तुरंत बाद उनकी प्राकृतिक मृत्यु हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महात्मा गांधी के भारत आगमन के पश्चात उनके प्रारंभिक सत्याग्रहों (चंपारण, खेड़ा और असहयोग आंदोलन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकठिया पद्धति' थोपी गई थी, जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी होती थी।
2. खेड़ा सत्याग्रह (1918) में फसल पूरी तरह बर्बाद होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली जारी रखने पर, गांधीजी ने किसानों को 'नो-रेंट' (लगान न दें) अभियान चलाने की सलाह दी थी।
3. वर्ष 1920 में प्रारंभ किए गए असहयोग आंदोलन के दौरान पहली बार देश भर में विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई, जिसे रबीन्द्रनाथ टैगोर ने 'निष्ठा की बर्बादी' (Waste of time/clothes) करार देते हुए इसकी तीखी आलोचना की थी।
4. चौरी-चौरा कांड (5 फरवरी 1922) की हिंसा से क्षुब्ध होकर महात्मा गांधी ने बारदोली में कांग्रेस की बैठक बुलाई और असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की घोषणा कर दी, जिससे कई युवा नेताओं ने गहरी नाराजगी व्यक्त की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1857 के विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश नेता (जैसे नाना साहब, बेगम हजरत महल और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई) ने अपने-अपने सीमित क्षेत्रों और व्यक्तिगत हितों की रक्षा के लिए संघर्ष किया, जिसके कारण उनके पास संपूर्ण भारत के स्तर पर एक राष्ट्रव्यापी राजनीतिक दृष्टि और केंद्रीय समन्वित योजना का अभाव था।
2. विद्रोहियों के पास आधुनिक हथियारों, प्रशिक्षित सैन्य अनुशासन, संचार साधनों और कुशल सैन्य रणनीतिकारों की भारी कमी थी, जबकि ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक तकनीकी संसाधनों के साथ-साथ टेलीग्राफ और रेलवे जैसी अवसंरचना का अत्यधिक लाभ था।
3. देश के बड़े शिक्षित मध्य वर्ग, व्यापारियों और अधिकांश देशी रियाسतों के शासकों (जैसे हैदराबाद, पटियाला, सिंधिया और नेपाल के शासकों) ने विद्रोह का पुरजोर समर्थन किया, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश साम्राज्य को भारत से खदेड़ने में मदद मिली।
4. विद्रोहियों के पास कोई स्पष्ट भविष्य का सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक विजन नहीं था कि अंग्रेजों को हराने के बाद शासन व्यवस्था कैसे चलाई जाएगी, और कई स्थानों पर पुरानी सामंती व्यवस्था को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया गया, जिससे आम जनता का एक बड़ा वर्ग इनसे कटा हुआ महसूस करता रहा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और जातिगत कठोरताओं का विरोध किया, किंतु इसने पाश्चात्य उदारवादी विचारों और तर्कवाद को अपनाते हुए ईसाई धर्म के नैतिक सिद्धांतों (जैसे 'जीसस के उपदेश') को भी अपने वैचारिक ढांचे में शामिल किया था।
2. वर्ष 1867 में स्थापित 'प्रार्थना समाज' के संस्थापकों ने महाराष्ट्र की प्राचीन भक्ति परंपरा (जैसे संत ज्ञानेश्वर, एकनाथ और तुकाराम के विचार) को सामाजिक सुधार का आधार बनाया तथा जातिगत भेदभाव, बाल विवाह और अस्पृश्यता के उन्मूलन के लिए निरंतर संघर्ष किया।
3. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने वेदों की अचूकता और अपौरुषेयता का प्रतिपादन करते हुए मूर्तिपूजा, अवतारवाद, श्राद्ध और जन्मगत जाति व्यवस्था का समर्थन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के नेतृत्व तथा उनके दमन के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद: मौलवी अहमदुल्लाह शाह द्वारा नेतृत्व किया गया, जिन्हें अंततः पवाया के राजा के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा मार दिया गया।
2. बरेली: खान बहादुर खान ने रोहिलखंड में विद्रोह का नेतृत्व किया, जिन्हें बाद में ब्रिटिश सेनापति जनरल कैंपबेल द्वारा पराजित किया गया और फांसी दे दी गई।
3. इलाहाबाद: मौलवी लियाकत अली ने विद्रोह का नेतृत्व किया, जिन्हें बाद में ब्रिटिश सेनापति कर्नल नील द्वारा बुरी तरह पराजित कर इस महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र पर पुनः अधिकार कर लिया गया।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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