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History of India
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल और गरम दल के काल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1905 में बंगाल के विभाजन के निर्णय की घोषणा के पश्चात उग्रवादी (गरम दल) नेताओं ने इस आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखने के बजाय इसे संपूर्ण भारत में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के रूप में विस्तारित करने की मांग की थी।
  2. 2. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के विभाजन का मुख्य कारण कांग्रेस के अध्यक्ष पद के निर्वाचन को लेकर उपजा विवाद था, जहाँ नरमपंथी रास बिहारी घोष को अध्यक्ष बनाना चाहते थे जबकि गरमपंथी लाला लाजपत राय या बाल गंगाधर तिलक को इस पद पर देखना चाहते थे।
  3. 3. मार्லி-मिंटो सुधार (1909) के तहत मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorates) की व्यवस्था की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय आंदोलन की बढ़ती एकता को कमजोर करना और 'फूट डालो और राज करो' की नीति को संस्थागत रूप देना था।
  4. 4. वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस के दोनों गुटों (नरम दल और गरम दल) के बीच पुनः एकता स्थापित हुई, जिसकी मध्यस्थता में एनी बेनी और बाल गंगाधर तिलक के साथ-साथ मुस्लिम लीग के साथ ऐतिहासिक लखनऊ समझौता भी संपन्न हुआ।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इतिहास में नरम दल (1885-1905) और गरम दल (1905-1919) का काल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। 1905 के बंगाल विभाजन के बाद उग्रवादी नेताओं (लाल-बाल-पाल और अरविंद घोष) ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को पूरे देश में फैलाने का आग्रह किया। वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में वैचारिक मतभेदों और अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस का विभाजन हो गया, जहाँ रास बिहारी घोष अध्यक्ष चुने गए। वर्ष 1909 के मार्ले-मिंटो सुधारों द्वारा सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व की शुरुआत की गई। अंततः, 1916 के लखनऊ अधिवेशन में एनी बेनी और तिलक के प्रयासों से दोनों दल पुनरावृत्त हुए। इस संदर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मुगल दरबार की भाषा: 1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (1 नवंबर 1858) के प्रावधानों एवं दूरगामी परिणामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम द्वारा 'डबल गवर्नमेंट' (बोर्ड ऑफ कंट्रोल और कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स) की प्रणाली को समाप्त कर दिया गया तथा भारत के शासन का संपूर्ण नियंत्रण ब्रिटिश कैबिनेट के एक सदस्य 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) को सौंप दिया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (India Council) का गठन किया गया। 2. इलाहाबाद दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा उद्घाटित क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में यह आधिकारिक रूप से घोषित किया गया कि ब्रिटिश साम्राज्य अब अपने भौगोलिक विस्तार की नीति (व्यपगत सिद्धांत और राज्य-हरण की नीति) को त्यागता है और भारतीय राजाओं के दत्तक पुत्र लेने के अधिकार को मान्यता देता है। 3. घोषणा में यह भी आश्वस्त किया गया कि लोक सेवाओं (Civil Services) में प्रवेश और उच्च पदों पर नियुक्तियों के समय नस्ल, रंग या धर्म को आधार नहीं बनाया जाएगा, तथा भारतीयों को उनकी योग्यता के अनुसार निष्पक्ष रूप से अवसर दिए जाएंगे। 4. इस घोषणा के उपरांत ब्रिटिश प्रशासनिक नीति में उदारवादी सुधारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई, जिसके तहत सेना के पुनर्गठन में भारतीय सैनिकों का अनुपात बढ़ाकर उन्हें सभी सामरिक रूप से संवेदनशील और उच्च पदों पर नियुक्त किया गया ताकि भविष्य में ऐसा कोई विद्रोह दोबारा न हो सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए भारत सरकार अधिनियम 1858 और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (1 नवंबर 1858) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के तहत भारत के नियंत्रण के लिए ब्रिटिश मंत्रिमंडल में 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) के नए पद का सृजन किया गया, जिसे सहायता प्रदान करने के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (Council of India) का गठन किया गया, जिसके आधे सदस्यों की नियुक्ति ब्रिटिश संसद द्वारा और आधे सदस्यों की नियुक्ति क्राउन द्वारा की जाती थी। 2. इलाहाबाद में आयोजित दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ी गई क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतों के साथ पूर्व में की गई संधियों और अनुबंधों का सम्मान करेगी और भविष्य में किसी भी भारतीय राज्य का विलय नहीं किया जाएगा। 3. घोषणा में यह भी स्पष्ट किया गया कि धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा तथा नस्ल, जन्म या धर्म के भेदभाव के बिना सभी भारतीयों को उनकी योग्यता के आधार पर उच्च सरकारी सेवाओं में नियुक्त किया जाएगा। 4. विद्रोह के बाद सेना का पुनर्गठन करते हुए ब्रिटिश सरकार ने बंगाल प्रेसिडेंसी में यूरोपीय और भारतीय सैनिकों का अनुपात 1:2 कर दिया, जबकि मद्रास और बॉम्बे प्रेसिडेंसी में यह अनुपात 1:3 रखा गया, ताकि भविष्य में इस प्रकार के सैन्य विद्रोहों को रोका जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 19वीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित 'प्रार्थना समाज' (Prarthana Samaj) और 'आत्मीय सभा' के वैचारिक तथा संस्थागत विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1815 में राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' ने एकेश्वरवाद के प्रचार और मूर्तिपूजा के विरोध का समर्थन किया, जबकि वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में स्थापित 'प्रार्थना समाज' का मुख्य उद्देश्य अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और दलित उत्थान जैसे सामाजिक सुधारों पर विशेष बल देना था। 2. प्रार्थना समाज के प्रमुख संस्थापक नेताओं में आत्माराम पांडुरंग, न्यायमूर्त्ति महादेव गोविंद रानाडे और आर. जी. भंडारकर शामिल थे, जिन्होंने महाराष्ट्र में धार्मिक रूढ़िवादिता के विरुद्ध बौद्धिक चेतना जगाई और 'डेक्कन एजुकेशन सोसायटी' जैसी संस्थाओं की नींव रखने में भी योगदान दिया। 3. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' और प्रार्थना समाज दोनों ने ही वेदों की अभ्रान्तता (Infallibility) के सिद्धांत को पूर्णतः स्वीकार किया था और वे वेदों को सर्वोच्च एवं अंतिम धार्मिक सत्ता मानते थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ की रेजिडेंसी के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व संभाला था और अंत में अंग्रेजों के समक्ष आत्मसमर्पण करने के बजाय नेपाल चली गई थीं। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित किया था और अंग्रेजों ने उनकी गिरफ्तारी पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। 3. बेगम हजरत महल के विद्रोह का दमन करने के बाद ब्रिटिश कमांडर कैंपबेल ने लखनऊ पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह को रुहेलखंड के एक स्थानीय राजा द्वारा विश्वासघात किए जाने के कारण अंग्रेजों ने मौत के घाट उतार दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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