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History of India
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मुगल दरबार की भाषा:

Detailed Explanation

फारसी प्रशासनिक भाषा थी।
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरम दल और गरम दल काल के वैचारिक संघर्ष, प्रमुख अधिवेशनों तथा राष्ट्रवादी राजनीति के विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कांग्रेस के प्रारंभिक नरमपंथियों (जैसे गोपाल कृष्ण गोखले और सुरेन्द्रनाथ बनर्जी) का यह अटूट विश्वास था कि ब्रिटिश शासन भारत के हित में है और वे मुख्य रूप से '3P' (Prayer, Petition और Protest) की राजनीतिक कार्यपद्धति में विश्वास रखते थे। 2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में बंगाल तक सीमित स्वदेशी आंदोलन के प्रस्ताव का समर्थन किया गया, किंतु गरम दल के नेता पूरे देश में ब्रिटिश वस्तुओं और संस्थानों के बहिष्कार के प्रस्ताव को लागू करना चाहते थे, जिससे दोनों गुटों के बीच मतभेद उभर आए। 3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार आधिकारिक रूप से 'स्वराज' (Swaraj) शब्द को अपने मुख्य राजनीतिक लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया। 4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरमपंथियों और उग्रवादियों के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर तीव्र गतिरोध उत्पन्न हुआ, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस का विभाजन हो गया और रास बिहारी घोष को अध्यक्ष चुना गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक स्थानीय पुस्तक विक्रेता पीर अली खां ने किया था, जिसके परिणामस्वरूप अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारा गया था और बाद में अंग्रेजों ने पीर अली को सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया था। 2. दानापुर (Dinapur) छावनी के 7th, 8th और 40th नेटिव इन्फैंट्री के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया और सोन नदी पार कर आरा पहुंचकर बाबू कुंवर सिंह से जुड़ गए, जिन्होंने इस संयुक्त सेना का नेतृत्व संभाला। 3. मुजफ्फरपुर और छपरा (सारण) क्षेत्रों में विद्रोह का नेतृत्व स्थानीय जमींदारों और यूरोपीय विरोधी तत्वों ने किया था, जहाँ मोहम्मद हुसैन खां और वाजिद अली जैसे नेताओं ने अंग्रेजों के संचार साधनों और प्रशासनिक चौकियों को नष्ट कर दिया था। 4. तिरहुत और छपरा क्षेत्र में कमिश्नर विलियम टेलर और मेजर विंसेंट आयर ने अत्यधिक नरमी की नीति अपनाते हुए विद्रोही नेताओं के साथ समझौता किया और उन्हें बिहार की प्रांतीय सरकार में मंत्री पद की पेशकश की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत आने वाला प्रथम पुर्तगाली यात्री वास्को डी गामा मई 1498 में कालीकट पहुँचा था, जहाँ स्थानीय शासक ज़ुमोरीन (सामुतिरि) ने उसका स्वागत किया था, जबकि इस समुद्री मार्ग की खोज में अरब व्यापारियों ने पुर्तगालियों का भरपूर सहयोग किया था क्योंकि वे हिंद महासागर के व्यापार में अपनी एकाधिकार को और मजबूत करना चाहते थे। 2. फ्रांसिस्को डी अल्मीडा भारत का प्रथम पुर्तगाली गवर्नर बनकर आया था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (नीला पानी नीति) का अनुसरण किया, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर को पुर्तगाली झील में बदलना और अरबों एवं वेनेशियन व्यापारियों के व्यापारिक एकाधिकार को तोड़ना था। 3. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 में बीजापुर के सुल्तान यूसुफ आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नियंत्रण में लिया और पुर्तगालियों को स्थानीय भारतीय महिलाओं से विवाह करने के लिए प्रोत्साहित किया। 4. नुनिओ दा कुन्हा ने 1530 में पुर्तगालियों की राजधानी को कोचिन से बदलकर गोवा स्थानांतरित किया, तथा उसने हुगली और बेसिन के क्षेत्रों में पुर्तगाली प्रभाव का विस्तार किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और सुभाष चंद्र बोस द्वारा पुनर्गठित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में समानांतर सरकारों की स्थापना की गई थी, जिनमें बलिया (चित्तू पाण्डेल), ताम्रलिक्त (मिदनापुर) की 'जातीय सरकार', तथा सतारा में नाना पाटील के नेतृत्व में 'प्रति सरकार' सबसे लंबी अवधि तक चलने वाली समानांतर सरकार थी। 2. जापान के सहयोग से सिंगापुर में वर्ष 1943 में आज़ाद हिंद फौज (इंडियन नेशनल आर्मी) का सर्वोच्च नेतृत्व संभालने के बाद सुभाष चंद्र बोस ने 'दिल्ली चलो' और 'जय हिंद' का नारा दिया तथा सिंगापुर में ही 'अस्थाई आज़ाद भारत सरकार' (आर्ज़ि-हुकूमत-ए-हिन्द) के गठन की घोषणा की। 3. आज़ाद हिंद फौज के अधिकारियों पर ब्रिटिश सरकार द्वारा दिल्ली के लाल किले में चलाए गए ऐतिहासिक मुकदमों के दौरान उनके बचाव पक्ष के मुख्य कानूनी सलाहकार भूलाभाई देसाई थे, और इस बचाव समिति में तेज बहादुर सप्रू, कैलाश नाथ काटजू, अरुणा आसफ अली तथा जवाहरलाल नेहरू भी शामिल थे। 4. फॉरवर्ड ब्लॉक के संस्थापक सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस के त्रिपुरी अधिवेशन (1939) में महात्मा गांधी समर्थित पट्टाभी सीतारमैया को पराजित किया था, किंतु कांग्रेस कार्यसमिति के गठन के विवाद के कारण उन्होंने अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया, जिसके उपरांत महात्मा गांधी के सुझाव पर तुरंत मौलाना আবুল कलाम आजाद को नया कांग्रेस अध्यक्ष चुना गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? महात्मा गांधी के प्रारंभिक भारतीय सत्याग्रहों — चंपारण, खेड़ा और असहयोग आंदोलन — के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह (1917) के दौरान राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर गांधीजी ने तिनकथा प्रणाली के विरोध में आवाज उठाई थी, जिसमें किसानों को अपनी जमीन के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करना आवश्यक था। 2. खेड़ा सत्याग्रह (1918) में फसल के पूर्ण रूप से बर्बाद होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली माफ न किए जाने पर गांधीजी ने किसानों का नेतृत्व किया, जहाँ वल्लभभाई पटेल और इंदुलाल याग्निक ने उनके प्रमुख सहयोगियों के रूप में कार्य किया। 3. वर्ष 1920 में प्रारंभ किए गए असहयोग आंदोलन के दौरान नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस द्वारा असहयोग के प्रस्ताव की पुष्टि की गई, जिसमें विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के साथ-साथ अदालतों, स्कूलों और विधान परिषदों के त्याग का आह्वान किया गया था। 4. चौरी-चाचौरा की हिंसक घटना (फरवरी 1922) के उपरांत बारडोली में आयोजित कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की, जिसका उस समय देश के सभी युवा और वरिष्ठ नेताओं ने बिना किसी मतभेद के पूर्ण समर्थन किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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