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History of India
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों के वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित ब्रह्म समाज ने एकेश्वरवाद का समर्थन किया और वेदों की अचूकता या अपौरुषेय होने के सिद्धांत को खारिज करते हुए तर्कवाद और सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर जोर दिया।
- 2. स्वामी दयानंद सरस्वती ने पाखंड खंडिनी पताका फहराई और 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए वेद को सभी ज्ञान का स्रोत माना, किंतु उन्होंने जाति व्यवस्था के जन्मजात स्वरूप का समर्थन करते हुए जन्म के आधार पर श्रेष्ठता को स्वीकार किया।
- 3. महाराष्ट्र में स्थापित 'प्रार्थना समाज' के संस्थापकों ने मुख्यतः अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह, स्त्री शिक्षा और दलित उत्थान जैसे सामाजिक सुधारों पर अपना ध्यान केंद्रित किया, और यह समाज मुख्य रूप से केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से स्थापित हुआ था।
- 4. स्वामी विवेकानंद ने 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना के माध्यम से केवल प्राचीन धार्मिक अनुष्ठानों और तपस्या के पुनरुत्थान पर बल दिया, जबकि वे आधुनिक विज्ञान, पाश्चात्य शिक्षा और सामाजिक सेवा को धर्म का विरोधी मानते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि राजा राममोहन राय ने विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार एकेश्वरवाद का प्रचार किया और वेदों की अचूकता को नहीं माना। कथन 2 गलत है क्योंकि स्वामी दयानंद सरस्वती ने जन्म आधारित जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध किया था और कर्म आधारित वर्ण व्यवस्था को सही माना था। कथन 3 सही है, प्रार्थना समाज की स्थापना केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से 1867 में हुई थी। कथन 4 गलत है क्योंकि स्वामी विवेकानंद ने व्यावहारिक वेदांत और समाज सेवा को अपने दर्शन का मुख्य आधार बनाया था, वे विज्ञान और पश्चिम की तकनीकी प्रगति के विरोधी नहीं थे।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके छोटे भाई अमर सिंह द्वारा संचालित सैन्य अभियानों एवं प्रतिरोध के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वीर कुंवर सिंह ने जगदीशपुर से विद्रोह का नेतृत्व करते हुए दानापुर के विद्रोही सिपाहियों के साथ मिलकर आरा पर अधिकार कर लिया था, तथा ब्रिटिश सेना के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध रणनीति का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और रीवा तक अपने सैन्य अभियानों का विस्तार किया था।
2. ब्रिटिश सेनाओं द्वारा पीछा किए जाने के दौरान गंगा नदी पार करते समय वीर कुंवर सिंह की बांह में गोली लग गई थी, जिसके कारण उन्होंने स्वयं अपनी तलवार से अपनी बांह काटकर गंगा नदी में अर्पित कर दी थी।
3. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के पश्चात् उनके भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष को समाप्त नहीं किया, बल्कि कैमूर की पहाड़ियों से अंग्रेजी सेना के खिलाफ एक प्रभावी समानांतर प्रतिरोध और सरकार विरोधी प्रशासन का सफलतापूर्वक संचालन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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औरंगजेब के समय में किस हिंदू राजा ने "शिवाजी महाराज" और मुगलों के बीच "पुरंदर की संधि" करवाई थी?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली में हुए घटनाक्रम और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचकर मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किए जाने के पश्चात, जफर ने आरंभ में इस विद्रोह का नेतृत्व करने में अत्यधिक संकोच दिखाया और अनिच्छा व्यक्त की थी।
2. दिल्ली में विद्रोहियों का वास्तविक सैन्य नेतृत्व और प्रशासनिक नियंत्रण एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर्स' (Court of Administrators) के हाथों में था, जिसमें लगभग 10 सिपाही और 6 नागरिक सदस्य शामिल थे, जो सम्राट के नाम पर निर्णय लेते थे।
3. दिल्ली पर पुन: अधिकार करने के उद्देश्य से अंग्रेजी सेनाओं का नेतृत्व करने वाले जनरल जॉन निकलसन की कश्मीरी गेट पर संघर्ष के दौरान मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद मेजर जनरल आर्किड विल्सन के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने दिल्ली पर पुनः नियंत्रण स्थापित किया और बहादुर शाह जफर को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार कर लिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में वर्धन राजवंश और दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की राजनीतिक, प्रशासनिक तथा सांस्कृतिक प्रवृत्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल में कन्नौज की सभा और प्रयाग की महामोक्षपरिषद का प्रमुख उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म के प्रचार के साथ-साथ विभिन्न संप्रदायों के बीच दार्शनिक समन्वय स्थापित करना था, और इसी काल में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भारत की यात्रा की थी।
2. बादामी (वातापी) के चालुक्य वंश के सबसे प्रतापी शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका सजीव और ऐतिहासिक विवरण एहोले प्रशस्ति में मिलता है जिसकी रचना उसके दरबारी कवि रविकीर्ति ने की थी।
3. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने वातापी पर अधिकार कर लिया था और 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी, तथा महाबलीपुरम में प्रसिद्ध रथ मंदिरों (सप्त पगोडा) का निर्माण कार्य उसी के काल में प्रारंभ हुआ था।
4. राजराज प्रथम और राजेंद्र प्रथम के अधीन चोल साम्राज्य ने अपनी नौसेना के बल पर न केवल संपूर्ण दक्षिण भारत और श्रीलंका पर नियंत्रण स्थापित किया, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रीविजय साम्राज्य पर भी सफल सैन्य अभियान चलाए, तथा चोलों की स्थानीय स्वशासन प्रणाली 'उत्तरमेरूर अभिलेख' में विशेष रूप से वर्णित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले नेताओं तथा उनके दमन से संबंधित ब्रिटिश अधिकारियों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद — मौलवी अहमदullah शाह (नेतृत्व) एवं कर्नल नील (दमन)
2. बरेली — खान बहादुर खान (नेतृत्व) एवं सर 콜िन कैंपबेल (दमन)
3. इलाहाबाद — लियाकत अली (नेतृत्व) एवं जनरल नील (दमन)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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