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History of India
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वैदिक साहित्य और समाज के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitr) शब्द का शाब्दिक अर्थ गाय दुहने वाली पुत्री से था, जो यह दर्शाता है कि इस समाज में पशुधन (विशेषकर गाय) का अत्यधिक आर्थिक और सामाजिक महत्व था।
  2. 2. उत्तर वैदिक काल में लिखित 'शतपथ ब्राह्मण' में कृषि की चारों क्रियाओं—जुताई, बुआई, कटाई और मड़ाई—का विस्तृत वर्णन मिलता है, जो इस काल में घुमक्कड़ पशुपालन से स्थायी कृषि अर्थव्यवस्था की ओर पूर्ण संक्रमण को प्रमाणित करता है।
  3. 3. वैदिककालीन राजनीतिक संस्थाओं में 'सभा' और 'समिति' का विशेष उल्लेख मिलता है, जहाँ 'सभा' सामान्य ग्रामवासियों की एक साधारण लोक संस्था थी जिसमें महिलाओं (नरिष्टा) के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध था, जबकि 'समिति' राजा के निर्वाचन में भाग लेने वाली एक कुलीन वर्ग की केंद्रीय संस्था थी।
  4. 4. ऋग्वेद के दसवें मंडल के 'पुरुष सूक्त' में सर्वप्रथम चतुर्वर्ण व्यवस्था (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) की उत्पत्ति का ब्रह्मांडीय संदर्भ मिलता है, जो उत्तर वैदिक काल तक आते-आते कर्म आधारित से अधिक कठोर जन्म आधारित सामाजिक संप्रभुता में परिवर्तित हो गई।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

वैदिक काल भारतीय इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार समाज, संस्कृति और अर्थव्यवस्था में गहरा परिवर्तन आया। कथन 1 सही है क्योंकि ऋग्वैदिक काल में गाय (अघन्या) को सबसे पवित्र और मूल्यवान धन माना जाता था, और पुत्री को 'दुहितृ' कहा जाता था। कथन 2 सही है, शतपथ ब्राह्मण में कृषि की विभिन्न अवस्थाओं का विस्तृत वर्णन मिलता है जो उत्तर वैदिक काल में कृषि प्रधान संस्कृति के उभार को दर्शाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि ऋग्वेद में 'सभा' कुलीन या वृद्ध लोगों की संस्था थी और 'समिति' सामान्य जनसभा थी, तथा ऋग्वैदिक काल में महिलाओं (जैसे सभा और समिति में भाग लेने वाली 'नरिष्टा') को इन संस्थाओं में प्रवेश की अनुमति थी; उन पर पूर्ण प्रतिबंध उत्तर वैदिक काल में लगा था। कथन 4 सही है, पुरुष सूक्त में चारों वर्णों की उत्पत्ति का उल्लेख है जो आगे चलकर जन्म पर आधारित हो गया। अतः विकल्प (a) सही है।
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