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History of India
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दिल्ली में स्थित "मोठ की मस्जिद" (Moth ki Masjid) का निर्माण किसने करवाया था?

Detailed Explanation

मियां भुआ ने सिकंदर लोदी के काल में मोठ की मस्जिद बनवाई थी।
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मध्यकालीन भारत के सूफी आंदोलनों और उनकी विभिन्न विचारधाराओं एवं सिलसिलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चिश्ती सिलसिले के संतों ने राज्य के राजनीतिक मामलों और राजकीय संरक्षण (पैट्रोनटेज) से पूरी तरह दूरी बनाए रखी, तथा शेख निजामुद्दीन औलिया ने स्पष्ट रूप से सुल्तानों के दरबार में जाने से इंकार करते हुए 'मेरे घर के दो दरवाजे हैं, यदि सुल्तान एक से प्रवेश करेगा तो मैं दूसरे से बाहर चला जाऊंगा' की नीति अपनाई। 2. सुहरावर्दी सिलसिले के संतों ने चिश्ती संतों के विपरीत राजकीय सहायता, जागीरों और बड़े पदों को स्वीकार करने में कोई परहेज नहीं किया, तथा इस सिलसिले का मुख्य कार्यक्षेत्र सिंध और मुल्तान का क्षेत्र था। 3. कादिरिया सिलसिले के संस्थापक अब्दुल कादिर जिलानी थे, और भारत में इस सिलसिले के प्रसार का श्रेय शाह नियाज और मियाँ मीर को जाता है, जिन्होंने मुगल राजकुमार दारा शिकोह को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया था। 4. नक्सबंदी सिलसिले की स्थापना ख्वाजा बाकी بالله ने भारत में की थी, और इस सिलसिले के सबसे प्रसिद्ध संत शेख अहमद सरहिंदी (मुजद्दिद-अलिसानी) ने अकबर की धार्मिक सहिष्णुता और 'दीन-ए-इलाही' नीति की कड़ी आलोचना करते हुए रूढ़िवादी इस्लाम के पुनरुत्थान पर जोर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? विजयनगर के सोने के सिक्कों को क्या कहा जाता था? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर क्षेत्र में रानी लक्ष्मीबाई तथा तात्या टोपे के सैन्य अभियानों, रणनीतिक चालों और अंतिम संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज द्वारा झांसी की दुर्भेद्य किलेबंदी की घेराबंदी किए जाने पर, रानी लक्ष्मीबाई ने कड़ा प्रतिरोध किया और तात्या टोपे की सेना द्वारा बेतवा नदी के तट पर सहायता के लिए पहुँचने पर अंग्रेजों को भारी क्षति पहुँचाई, किंतु अंततः तात्या टोपे की पराजय के बाद उन्हें झांसी छोड़नी पड़ी। 2. झांसी के पतन के उपरांत रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने कालपी में मिलकर एक संयुक्त मोर्चा बनाया, और कालपी के युद्ध में पराजित होने के बाद वे ग्वालियर की ओर बढ़े, जहाँ ग्वालियर के सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया अंग्रेजों का पक्ष छोड़कर विद्रोहियों से आ मिले। 3. ग्वालियर पर अधिकार करने के पश्चात विद्रोहियों ने नाना साहब को पेशवा घोषित कर दिया और ग्वालियर के किले को अपना सैन्य केंद्र बनाया, जहाँ 18 जून 1858 को ब्रिटिश सेना के साथ हुए निर्णायक युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं। 4. ग्वालियर के पतन के बाद तात्या टोपे ने रानी के बलिदान से प्रेरणा लेते हुए मध्य भारत और राजस्थान के जंगलों में प्रवेश किया, जहाँ उन्होंने छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare) की नीति अपनाई और अंततः नरवर के एक स्थानीय जागीरदार मानसिंह के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों द्वारा पकड़े जाने पर शिवपुरी में उन्हें फांसी दे दी गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 1857 के महान विद्रोह की असफलता के प्रमुख कारणों और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विद्रोहियों के पास किसी केंद्रीय संगठन, एकसमान राजनीतिक दृष्टिकोण और अखिल भारतीय स्तर के सर्वमान्य सर्वोच्च नेता का पूर्ण अभाव था, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के नेता अपने स्थानीय हितों और सीमाओं से बंधे रहे। 2. अधिकांश भारतीय रियाسतों और बड़े राजाओं (जैसे सिंधिया, होलकर, और हैदराबाद के निजाम) ने विद्रोह का साथ देने के बजाय ब्रिटिश सत्ता का सक्रिय समर्थन किया, जिसे इतिहासकारों ने ब्रिटिश साम्राज्य के लिए 'तूफान में बांध का काम' (breakwater) करने वाली दीवार कहा है। 3. आधुनिक सैन्य तकनीक, कुशल संचार के साधन (टेलीग्राफ और रेलवे) और अनुशासित सैन्य संगठन का सुदृढ़ लाभ ब्रिटिश पक्ष के पास था, जबकि विद्रोही सिपाहियों के पास हथियारों की भारी कमी और आपसी समन्वय का अभाव था। 4. शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारियों और आधुनिक बुद्धिजीवियों ने 1857 के विद्रोह में सबसे आगे बढ़कर सक्रिय रूप से भाग लिया और ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ इसे एक अखिल भारतीय आधुनिक राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम का सफल वैचारिक नेतृत्व प्रदान किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश सेनापति सर ह्यू रोज़ ने झाँसी की घेराबंदी की, जिसके उपरांत रानी लक्ष्मीबाई अपनी सेना के साथ कालपी पहुँचीं और वहाँ तात्या टोपे के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कड़ा प्रतिरोध किया। 2. कालपी के युद्ध में पराजय के बाद रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और सिंधिया राजवंश के शासक जयाजीराव सिंधिया को अपने पक्ष में करते हुए ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया। 3. ग्वालियर के पतन और संघर्ष के अंतिम चरण में रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे नेपाल की तराई में सुरक्षित निकल जाने में सफल रहे और कभी अंग्रेजों के हाथ नहीं आए। 4. तात्या टोपे को उनके एक जमींदार मित्र मान सिंह के विश्वासघात के कारण ब्रिटिश सेना द्वारा पकड़ लिया गया और अंततः अप्रैल 1859 में शिवपुरी में उन्हें सार्वजनिक रूप से फाँसी पर लटका दिया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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