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History of India
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कांग्रेस के प्रारंभिक वर्षों (1885-1905) में नरम दल के नेताओं का यह दृढ़ विश्वास था कि ब्रिटिश शासन न्यायप्रिय है और वे ब्रिटिश संसद के प्रति 'राजभक्ति' रखते हुए प्रार्थना, याचिका और शिष्टमंडल (प्रार्थना और विरोध की राजनीति) के माध्यम से प्रशासनिक सुधार चाहते थे।
- 2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उत्पन्न स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के दौरान गरम दल के नेताओं (लाल-बाल-पाल और अरबिंदो घोष) ने इस आंदोलन के दायरे को केवल बंगाल तक सीमित रखने और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार को कलकत्ता तक ही प्रतिबंधित करने का समर्थन किया था।
- 3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) के प्रस्ताव को अपने मुख्य लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया, जिससे नरम और गरम दल के बीच वैचारिक तनाव कुछ समय के लिए टल गया।
- 4. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष पद के निर्वाचन को लेकर नरम दल और गरम दल के बीच हुए तीव्र मतभेद के कारण पार्टी में औपचारिक विभाजन हो गया, और रासबिहारी घोष को कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि कांग्रेस के शुरुआती दौर के नरमपंथी नेताओं (जैसे फिरोजशाह मेहता, सुरेंद्रनाथ बनर्जी, गोपाल कृष्ण गोखले) की ब्रिटिश न्यायप्रियता में अटूट आस्था थी और वे संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी माँगे रखते थे। कथन 2 गलत है क्योंकि गरम दल के नेताओं ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखने का तीव्र विरोध किया था, बल्कि वे इसे पूरे देश में एक जन-आंदोलन के रूप में फैलाना चाहते थे। कथन 3 सही है, वर्ष 1906 के कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी के अध्यक्ष बनने के कारण एक बड़ा विभाजन टल गया और उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में पहली बार 'स्वराज' शब्द का आधिकारिक प्रयोग किया था। कथन 4 सही है, सूरत अधिवेशन (1907) में वैचारिक मतभेदों और अध्यक्ष पद को लेकर हुए विवाद के कारण नरम और गरम दल अलग हो गए और रासबिहारी घोष अधिवेशन के अध्यक्ष बने थे। इस कालखंड के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के विद्रोह के संबंध में विभिन्न ब्रिटिश और भारतीय इतिहासकारों द्वारा दिए गए वक्तव्यों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. अशोक मेहता - "यह विद्रोह केवल एक सैनिक विद्रोह नहीं था, बल्कि यह एक राष्ट्रीय विद्रोह था जो विदेशी शासन के विरुद्ध जन असंतोष की अभिव्यक्ति था।"
2. जॉन सीले - "यह विद्रोह पूरी तरह से देशभक्तिहीन और स्वार्थी सैनिकों का एक ऐसा सिपाही विद्रोह था, जिसका भारतीय जनता से कोई सरोकार नहीं था।"
3. सर जेम्स आउट्राम और डब्ल्यू. टेलर - "यह विद्रोह मुसलमानों का षड्यंत्र था, जिसमें हिंदुओं ने उनका लाभ उठाया और ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेंकने का प्रयास किया।"
4. टी.आर. होम्स - "यह विद्रोह सभ्यता और बर्बरता के बीच का एक संघर्ष था, जिसमें अंग्रेजों ने भारतीय समाज को सुसंस्कृत बनाने का प्रयास किया।"
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारतीय समाज-सुधार आंदोलनों और उनके प्रणेताओं के वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्वामी विवेकानंद ने 1897 में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक मुक्ति प्राप्त करना था और इसने भौतिक उन्नति या सामाजिक कल्याण के कार्यों को पूर्णतः त्याग दिया था।
2. ज्योतिराव फुले द्वारा स्थापित 'सत्यशोधक समाज' ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों और पुरोहिती व्यवस्था का विरोध करते हुए शूद्रों तथा अति-शूद्रों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
3. गोपाल गणेश आगरकर ने 'सुधारक' नामक समाचार पत्र के माध्यम से अंधविश्वास, बाल विवाह और सामाजिक रूढ़ियों की कड़ी आलोचना की तथा सामाजिक सुधार को राजनीतिक स्वतंत्रता से अधिक प्राथमिकता दी।
4. एनी बेसेंट ने थियोसोफिकल सोसायटी के माध्यम से प्राचीन हिंदू धर्म और उसकी दार्शनिक परंपराओं का समर्थन करते हुए भारतीय पुनरुत्थान में योगदान दिया, किंतु उन्होंने जाति व्यवस्था और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं का पुरजोर समर्थन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति और उसके कारणों के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों के प्रसिद्ध मतों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. एस. एन. सेन (S.N. Sen) — "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।"
2. बेंजामिन डिजराएली (Benjamin Disraeli) — "यह विद्रोह केवल एक सिपाही विद्रोह नहीं था, बल्कि यह राष्ट्रीय विद्रोह था।"
3. वीर सावरकर (V.D. Savarkar) — "यह 1857 का विद्रोह सुनियोजित स्वतंत्रता संग्राम था।"
4. टी.आर. होम्स (T.R. Holmes) — "यह सभ्यता और बर्बरता (Barbarism and Civilization) के बीच का संघर्ष था।"
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन (1920-22) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया पद्धति' के अंतर्गत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी होती थी, जिसके विरुद्ध राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी ने चंपारण का दौरा किया था।
2. चंपारण जाँच समिति के समक्ष किसानों पर किए गए अवैध वित्तीय उत्पीड़न को सिद्ध करने के बाद, समिति ने सर्वसम्मति से बागान मालिकों द्वारा वसूले गए अवैध धन का 50 प्रतिशत हिस्सा किसानों को तत्काल वापस करने की सिफारिश की थी।
3. वर्ष 1920 में कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव चित्तरंजन दास (सी.आर. दास) द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसका उद्देश्य पंजाब और खिलाफत के अन्यायपूर्ण कृत्यों का निवारण करते हुए 'स्वराज' की प्राप्ति करना था।
4. असहयोग आंदोलन के दौरान चौरी-चौरा की हिंसक घटना (फरवरी 1922) के उपरांत बारदोली में हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में महात्मा गांधी ने इस आंदोलन को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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उन्नीसवीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों के दौरान स्थापित विभिन्न संगठनों और उनके संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. तत्त्वबोधिनी सभा - देवेंद्रनाथ टैगोर
2. आत्माराम पांडुरंग - प्रार्थना समाज
3. सत्यशोधक समाज - ज्योतिराव फुले
4. सर्वेंट ऑफ इंडिया सोसाइटी - गोपाल कृष्ण गोखले
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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