History of India
Asked 2 months ago · Viewed 16 times
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के स्वरूप और प्रकृति को लेकर विभिन्न ब्रिटिश तथा भारतीय इतिहासकारों ने अपने-अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं। इस संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इतिहासकार सर जॉन सीले (Sir John Seeley) ने 1857 के विद्रोह को 'पूर्णतः देशभक्ति से रहित और स्वार्थी सैनिक विद्रोह' (A wholly unpatriotic and selfish mutiny) बताया था, जिसमें भारतीय जनता का कोई समर्थन नहीं था।
- 2. वी. डी. सावरकर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस घटना को सुनियोजित ढंग से लड़ा गया 'भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' करार दिया था।
- 3. बीडी सावरकर के विपरीत, इतिहासकार डॉ. आर. सी. मजूमदार (Dr. R. C. Majumdar) का यह निष्कर्ष था कि 'तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।'
- 4. टी.आर. होम्स (T. R. Holmes) के अनुसार 1857 का यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष' (A conflict between civilization and barbarism) था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप और प्रकृति को लेकर इतिहासकारों में गंभीर मतभेद रहे हैं। सर जॉन सीले और लॉरेंस जैसे ब्रिटिश इतिहासकारों ने इसे मात्र एक 'सैनिक विद्रोह' (Mutiny) माना। इसके विपरीत, वी. डी. सावरकर ने इसे पहला सुनियोजित स्वतंत्रता संग्राम कहा। डॉ. आर. सी. मजूमदार ने अपनी पुस्तक 'द सिपाही म्यूटिनी एंड द रिवोल्ट ऑफ 1857' में स्पष्ट रूप से लिखा कि यह न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था। वहीं, टी.आर. होम्स का यह कथन था कि यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष' था। इस प्रकार सभी चारों कथन पूर्णतः सत्य हैं। विकिपीडिया संदर्भ
अगला प्रश्न →
मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और अशोक के धम्म तथा शिलालेखों के संदर्भ…
← पिछला प्रश्न
19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित सामाजिक-धार्मिक…
Related Questions
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी की घटना के ऐतिहासिक संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी ब्राउन बैस मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी धार्मिक आक्रोश उत्पन्न किया।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरोध में बगावत करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों पर आक्रमण कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई।
3. बैरकपुर छावनी की इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार ने संपूर्ण भारतीय सेना से एनफील्ड राइफल का प्रयोग हमेशा के लिए वापस ले लिया और सभी सैनिकों को लिखित रूप में माफी मांगकर शांत किया।
4. मंगल पांडे द्वारा विद्रोह की शुरुआत करने के कुछ दिनों बाद ही रेजिमेंट के अन्य सिपाहियों ने भी उनका पूर्ण समर्थन करते हुए बैरकपुर के पूरे शस्त्रागार पर अधिकार कर लिया और अंग्रेजों को बंगाल से खदेड़ दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के नेतृत्व और उसके दमन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी अहमदुल्लाह शाह को 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, जिन्होंने ब्रिटिश सेना के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया था और कर्नल नील तथा कैंपबेल की सेनाओं को कड़ी टक्कर दी थी।
2. बरेली में रोहिल्ला सेना का नेतृत्व करते हुए खान बहादुर खान ने स्वतंत्र सरकार की स्थापना की थी, किंतु अंततः ब्रिटिश सेनापति सर कॉリン कैंपबेल द्वारा इस विद्रोह का पूर्ण दमन कर दिया गया।
3. इलाहाबाद में मौलवी लियाकत अली ने विद्रोह की बागडोर संभाली थी, और यहाँ ब्रिटिश अधिकारी कर्नल जेम्स नील ने अत्यधिक क्रूरता के साथ इस विद्रोह का दमन किया था।
4. फैजाबाद के मौलवी अहमदुल्लाह शाह को गिरफ्तार कर अंग्रेजों ने सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी थी, जबकि खान बहादुर खान और लियाकत अली युद्ध के मैदान में वीरगति को प्राप्त हुए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), प्रथम व द्वितीय गोलमेज सम्मेलन तथा गांधी-इरविन समझौते के ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के कराची अधिवेशन (1931) में गांधी-इरविन समझौते को औपचारिक रूप से अनुमोदित किया गया तथा इसी अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू द्वारा तैयार किए गए 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' प्रस्ताव को स्वीकार किया गया।
2. वर्ष 1931 में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया, और इसी सम्मेलन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने 'कम्युनल अवार्ड' (सांप्रदायिक पंचाट) की घोषणा की, जिसके तहत दलितों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल का प्रावधान किया गया था।
3. लार्ड इरविन और महात्मा गांधी के मध्य संपन्न हुए 'गांधी-इरविन समझौते' के तहत सरकार ने सभी राजनीतिक बंदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने और समुद्र तट के किनारे बसे लोगों को बिना कर के नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी।
4. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण के दौरान ब्रिटिश सरकार द्वारा 'दमनकारी अध्यादेशों' के माध्यम से कांग्रेस को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप जनवरी 1932 में महात्मा गांधी की पुनः गिरफ्तारी के साथ आंदोलन ने अपनी तीव्रता खो दी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय से पूर्व ब्रिटिश शासन की आर्थिक, राजनीतिक और प्रशासनिक नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया गया था, जिससे भारतीय शासक वर्ग और उनके आश्रितों में भारी असुरक्षा और असंतोष उत्पन्न हुआ।
2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों (विशेषकर 'एकतरफा मुक्त व्यापार' और भारी आयात शुल्क) के परिणामस्वरूप भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और सूती वस्त्र उद्योग पूरी तरह नष्ट हो गए, जिससे बड़ी संख्या में कारीगर और शिल्पकार बेरोजगार होकर कृषि पर निर्भर होने को मजबूर हो गए।
3. वर्ष 1856 में लॉर्ड डलहौजी द्वारा अवध का अधिग्रहण 'कुशासन' (Misgovernance) के आधार पर किया गया था, जिसके कारण न केवल वहाँ के नवाब को अपदस्थ किया गया, बल्कि हजारों सिपाही जो अवध की सेना से थे और ब्रिटिश सेना में सेवारत थे, अचानक 'भूमि राजस्व वृद्धि' और अन्य करों की मार के दायरे में आ गए।
4. ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार करने की खुली छूट देने और ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act), जिसके तहत पैतृक संपत्ति से बेदखल होने का भय समाप्त किया गया, ने पारंपरिक भारतीय समाज में यह गहरी आशंका पैदा की कि ब्रिटिश सरकार उनका धर्म परिवर्तन कराना चाहती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं?
→
महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.