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History of India
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित सामाजिक-धार्मिक सुधार संगठनों और उनके संस्थापकों/प्रमुख कार्यकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सत्यशोधक समाज (1873) — ज्योतिराव फुले द्वारा स्थापित, जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अति-शूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व से मुक्त कराना और सामाजिक समता स्थापित करना था।
  2. 2. आर्य समाज (1875) — स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा बॉम्बे में स्थापित, जिसका मूल मंत्र 'वेदों की ओर लौटो' था और इसने शुद्धि आंदोलन के माध्यम से हिंदू धर्म में वापसी का मार्ग प्रशस्त किया।
  3. 3. साधारण ब्रह्म समाज (1878) — आनंदमोहन बोस, शिवनाथ शास्त्री और द्विजनाथ गांगुली द्वारा स्थापित, जो केशव चंद्र सेन की अल्पायु में पुत्री के विवाह और रूढ़िवादी कृत्यों के विरोध में मूल ब्रह्म समाज से अलग होकर बना था।
  4. 4. सेवा सदन (1885) — रामाबाई रानाडे और पंडित रमाबाई द्वारा पुणे में स्थापित, जिसका मुख्य उद्देश्य उच्च जाति की बाल विधवाओं को शिक्षित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना था।

उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

Detailed Explanation

युग्म 1, 2 और 3 सही सुमेलित हैं। सत्यशोधक समाज की स्थापना 1873 में ज्योतिराव फुले ने की थी। आर्य समाज की स्थापना 1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा बॉम्बे में की गई थी। साधारण ब्रह्म समाज की स्थापना 1878 में केशव चंद्र सेन के प्रगतिशील अनुयायियों (जैसे आनंदमोहन बोस और शिवनाथ शास्त्री) द्वारा की गई थी क्योंकि केशव चंद्र सेन ने अपनी नाबालिग पुत्री का विवाह कूचबिहार के राजा से कर दिया था, जिससे ब्रह्म समाज में वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो गया था। किंतु युग्म 4 सही सुमेलित नहीं है क्योंकि 'सेवा सदन' की स्थापना वर्ष 1885 में नहीं बल्कि 1908 में बंबई में रमाबाई रानाडे और सेवा राम जी द्वारा की गई थी (पंडित रमाबाई ने 'शारदा सदन' की स्थापना की थी)। इसके बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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Related Questions

→ मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था और अशोक के धम्म तथा शिलालेखों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में राज्य के 'सप्तांग सिद्धांत' का प्रतिपादन किया गया है, जिसके अनुसार राजा (स्वामी) सर्वोच्च अंग है, तथा इसमें राज्य के सात अंगों — स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, बलय, मित्र और कोश — का विस्तृत विवरण मिलता है। 2. अशोक के अधिकांश शिलालेखों और स्तंभ लेखों में प्राकृत भाषा तथा ब्राह्मी लिपि का प्रयोग किया गया है, किंतु उत्तर-पश्चिम भारत (वर्तमान पाकिस्तान क्षेत्र) से प्राप्त शाहबाजगढ़ी और मानसेहरा के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में, जबकि कंधार (अफ़ग़ानिस्तान) से प्राप्त द्विभाषी अभिलेख यूक्रीनी (ग्रीक) और अरामइक् लिपि में उत्कीर्ण हैं। 3. अशोक के 'धम्म महामात्र' (Dhamhamahamatta) नामक अधिकारियों की नियुक्ति उनके राज्याभिषेक के चौदहवें वर्ष में की गई थी, जिनका मुख्य कार्य विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच धार्मिक सहिष्णुता का प्रचार करना, कल्याणकारी कार्य करना और कैदियों के रिहाई या उनकी सजा को कम करने की सिफारिश करना था। 4. मौर्य प्रशासन में प्रांतीय शासन व्यवस्था के तहत साम्राज्य चार प्रमुख प्रांतों में विभाजित था, जिनकी राजधानियाँ तक्षशिला, उज्जैन, सौराष्ट्र और सुवर्णगिरि थीं, तथा इन प्रांतों का प्रशासन 'कुमार' या 'आर्यपुत्र' नामक राजवंश के राजकुमारों द्वारा संचालित किया जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी की घटना के ऐतिहासिक संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी ब्राउन बैस मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी धार्मिक आक्रोश उत्पन्न किया। 2. बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरोध में बगावत करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों पर आक्रमण कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई। 3. बैरकपुर छावनी की इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार ने संपूर्ण भारतीय सेना से एनफील्ड राइफल का प्रयोग हमेशा के लिए वापस ले लिया और सभी सैनिकों को लिखित रूप में माफी मांगकर शांत किया। 4. मंगल पांडे द्वारा विद्रोह की शुरुआत करने के कुछ दिनों बाद ही रेजिमेंट के अन्य सिपाहियों ने भी उनका पूर्ण समर्थन करते हुए बैरकपुर के पूरे शस्त्रागार पर अधिकार कर लिया और अंग्रेजों को बंगाल से खदेड़ दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय से पूर्व ब्रिटिश शासन की आर्थिक, राजनीतिक और प्रशासनिक नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया गया था, जिससे भारतीय शासक वर्ग और उनके आश्रितों में भारी असुरक्षा और असंतोष उत्पन्न हुआ। 2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों (विशेषकर 'एकतरफा मुक्त व्यापार' और भारी आयात शुल्क) के परिणामस्वरूप भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और सूती वस्त्र उद्योग पूरी तरह नष्ट हो गए, जिससे बड़ी संख्या में कारीगर और शिल्पकार बेरोजगार होकर कृषि पर निर्भर होने को मजबूर हो गए। 3. वर्ष 1856 में लॉर्ड डलहौजी द्वारा अवध का अधिग्रहण 'कुशासन' (Misgovernance) के आधार पर किया गया था, जिसके कारण न केवल वहाँ के नवाब को अपदस्थ किया गया, बल्कि हजारों सिपाही जो अवध की सेना से थे और ब्रिटिश सेना में सेवारत थे, अचानक 'भूमि राजस्व वृद्धि' और अन्य करों की मार के दायरे में आ गए। 4. ईसाई मिशनरियों को भारत में धर्म प्रचार करने की खुली छूट देने और ब्रिटिश सरकार द्वारा वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act), जिसके तहत पैतृक संपत्ति से बेदखल होने का भय समाप्त किया गया, ने पारंपरिक भारतीय समाज में यह गहरी आशंका पैदा की कि ब्रिटिश सरकार उनका धर्म परिवर्तन कराना चाहती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपदों' और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुट् निकाय और भगवती सूत्र जैसे बौद्ध और जैन ग्रंथ प्राचीन भारत के सोलह महाजनपदों की सूची प्रदान करते हैं, जिनमें वज्जी और मल्ला जैसे महाजनपद 'गणसंघ' (राजतंत्र के स्थान पर कुलीनतंत्रात्मक या गणतांत्रिक व्यवस्था) के उदाहरण थे। 2. मगध साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) थी, जो पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण प्राकृतिक रूप से अत्यंत सुरक्षित थी, और बाद में उदयीन द्वारा इसे पाटलिपुत्र स्थानांतरित कर दिया गया जो गंगा, सोन और गंडक नदियों के संगम पर स्थित होने के कारण सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण थी। 3. हर्यक वंश के संस्थापक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने वैवाहिक संबंधों (जैसे कौशल, वैशाली और मद्र कुल के राजघराने से संबंध) और अंग महाजनपद को जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की, जबकि उसके पुत्र अजातशत्रु (कुणिक) ने रथमूसल और महाकंटकपाणि जैसे नवीन सैन्य हथियारों का उपयोग कर वज्जी संघ पर विजय प्राप्त की थी। 4. मगध के उत्कर्ष का एकमात्र कारण इसकी उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और समीपवर्ती जंगलों से प्रचुर मात्रा में प्राप्त हाथियों की उपलब्धता थी, क्योंकि मगध के शासकों ने कभी भी लौह अयस्क भंडारों का सैन्य या आर्थिक उपयोग नहीं किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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