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History of India
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में सोलह महाजनपदों और मगध साम्राज्य के उदय की प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों की सूची मिलती है, जिनमें से अधिकांश महाजनपद उत्तर भारत के गंगा के मैदान और उसके सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित थे और इनमें वज्जी तथा मल्ल जैसे महाजनपद गणतंत्रात्मक व्यवस्था (गण/संघ) के अंतर्गत आते थे।
- 2. मगध साम्राज्य के उत्कर्ष का मुख्य भौगोलिक कारण इसकी राजधानी राजगीर (गिरिव्रज) का पाँच पहाड़ियों से घिरा होना और इसकी सामरिक स्थिति थी, तथा बाद में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाए जाने से यह गंगा और सोन जैसी प्रमुख नदियों के जलमार्गों के माध्यम से व्यापारिक और सैन्य नियंत्रण में अत्यधिक सुदृढ़ हो गया।
- 3. हर्यंक वंश के शासक बिम्बिसार ने अपने साम्राज्य विस्तार के लिए वैवाहिक संबंधों की नीति अपनाई, और कौशल, मल्ल तथा लिच्छवि राजवंशों की राजकुमारियों से विवाह कर अपनी स्थिति मजबूत की, तथा अवध के राजा प्रद्योत के बीमार पड़ने पर अपने राजवैद्य जीवक को उनकी सेवा में भेजा था।
- 4. शिशुनाग वंश के संस्थापक शिशुनाग ने प्रतापी शासक के रूप में अवध साम्राज्य को पूरी तरह मगध में मिला लिया और अपनी विजयों के क्रम में वत्स तथा कौशल को भी मगध साम्राज्य का अभिन्न अंग बना दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न के कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सही हैं क्योंकि अंगुत्तर निकाय और भगवती सूत्र में सोलह महाजनपदों का उल्लेख मिलता है, मगध की भौगोलिक स्थिति अत्यंत सामरिक थी और बिम्बिसार ने वैवाहिक संबंधों तथा जीवक को भेजने की नीति अपनाई थी। किंतु कथन 4 गलत है क्योंकि शिशुनाग ने अवंती (न कि अवध) और वत्स को मगध में मिलाया था। इस ऐतिहासिक कालखंड के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के पल्लव, चालुक्य एवं चोल राजवंशों के राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के कन्नौज सभा के दौरान महायान बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार को प्रमुखता दी गई थी, तथा ह्वेनसांग ने इस बात का उल्लेख किया है कि इस सभा की अध्यक्षता स्वयं हर्षवर्धन ने की थी और इसमें विभिन्न संप्रदायों के विद्वानों ने भाग लिया था।
2. पल्लव शासक महेन्द्रवर्मन प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का अनुयायी होने के बावजूद संत अप्पर (थिरुनुनावुक्करासर) के प्रभाव में आकर शैव धर्म स्वीकार किया था, तथा उसने त्रिचिरापल्ली और महाबलीपुरम में कई प्रसिद्ध चट्टानों को काटकर मंदिर (रैंक-कट टेम्पल) बनवाए।
3. चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस ऐतिहासिक विजय का विस्तृत विवरण कांचीपुरम के मुक्तेश्वर मंदिर के अभिलेख में मिलता है, जिसे रविचर्ति द्वारा रचित किया गया था।
4. तंजावुर के प्रसिद्ध राजराजेश्वर (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण राजराज चोल प्रथम के शासनकाल में हुआ था, जो द्रविड़ वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है और इसके शिखर पर स्थित विशाल कलश को एक ही पाषाण खंड को तराशकर बनाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वारंगल के किस शासक ने मलिक काफूर को अपनी सोने की मूर्ति गले में जंजीर डालकर भेंट की थी?
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बिहार में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके छोटे भाई अमर सिंह की युद्ध रणनीतियों तथा प्रशासनिक दृष्टिकोण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरा पर अधिकार करने के पश्चात वीर कुंवर सिंह ने अपनी सैन्य कमजोरी को भाँपते हुए ब्रिटिश सेना के विरुद्ध परंपरागत युद्ध पद्धति का त्याग कर छापामार (गोरिल्ला) युद्ध प्रणाली को अपनाया और आजमगढ़ तथा बलिया तक ब्रिटिश सेना को पराजित किया।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के उपरांत अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों और कैमूर की पहाड़ियों से अंग्रेजी सेना के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व जारी रखा तथा ब्रिटिश सत्ता के समानांतर एक स्थानीय प्रशासन (सरकार) स्थापित किया।
3. अमर सिंह द्वारा संचालित इस समानांतर प्रशासन और गोरिल्ला युद्ध का दमन करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने मेजर जनरल डगलस और लेफ्टिनेंट कर्नल इंnis को विशेष रूप से नियुक्त किया था, जिन्होंने कैमूर की पहाड़ियों में कड़े संघर्ष के बाद इस प्रतिरोध को समाप्त किया।
4. अमर सिंह वर्ष 1858 के अंत में ब्रिटिश सेना के साथ हुई एक अंतिम निर्णायक झड़प में वीरगति को प्राप्त हुए थे, जिसके साथ ही बिहार में 1857 के विद्रोह की अंतिम संगठित ज्वाला बुझ गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दक्षिण भारत के राजवंशों और हर्षवर्द्धन के काल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने शासनकाल में 'मत्तविलासं प्रहसन' नामक प्रसिद्ध संस्कृत नाटक की रचना की थी, और आरंभ में जैन धर्म के अनुयायी होने के बाद संत अप्पर (तिरुनावुक्करासर) के प्रभाव में आकर उन्होंने शैव धर्म अपना लिया था।
2. चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय की ऐहोल प्रशस्ति के अनुसार, उसने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्द्धन को पराजित किया था, जिससे हर्ष का दक्षिण भारत की ओर विस्तार का सपना अधूरा रह गया। इस प्रशस्ति की रचना जैन कवि रवि कीर्ति ने की थी।
3. चोल प्रशासन के संदर्भ में, 'वरियम' (Variyam) उन वार्षिक समितियों को कहा जाता था जो सिंचाई, उद्यान, स्वर्ण और न्याय जैसे विभिन्न प्रशासनिक विभागों का संचालन करती थीं, और इन समितियों के सदस्यों के चयन के लिए 'कुडवोलाई' (Kudavolai) नामक पर्ची-डालकर चुनाव की अनूठी पद्धति का पालन किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व एवं संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वीर कुंवर सिंह ने आरा और जगदीशपुर में विद्रोह की कमान संभालने के बाद ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सफल गोरिल्ला युद्ध रणनीति अपनाई तथा आजमगढ़ और बलिया क्षेत्र में अंग्रेजों को कड़ी चुनौती देते हुए गंगा नदी पार करने में सफलता प्राप्त की थी।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु (अप्रैल 1858) के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष को जारी रखा और कैमूर की पहाड़ियों (रोहतास क्षेत्र) को अपना मुख्य केंद्र बनाकर ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ एक समानांतर सरकार और प्रभावी प्रतिरोध का संचालन किया था।
3. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इस लंबे संघर्ष को दबाने के लिए ब्रिटिश सेना को मेजर जनरल डगलस और कमिश्नर विलियम टेलर के नेतृत्व में भारी सैन्य अभियानों का सहारा लेना पड़ा था, तथा अमर सिंह को पकड़ने के बाद सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
4. जगदीशपुर में विद्रोह के दौरान वीर कुंवर सिंह ने ब्रिटिश सेनापति कैप्टन डनबर की संयुक्त सेना को बुरी तरह पराजित किया था, जिससे संपूर्ण बिहार और उत्तर प्रदेश के विद्रोही सैनिकों में भारी उत्साह का संचार हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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