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History of India
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वैदिक सभ्यता एवं वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में पुरोहितों को दक्षिणा के रूप में मुख्य रूप से गायें और घोड़े दिए जाते थे, जबकि कृषि भूमि के निजी स्वामित्व या उसके क्रय-विक्रय का कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिलता है।
- 2. उत्तर वैदिक काल में लोहे के व्यापक प्रयोग (जिसे 'कृष्ण अयस्क' कहा गया है) के कारण कृषि अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई, जिससे कबीलाई समाज ('जन') के स्थान पर बड़े क्षेत्रीय राज्यों या जनपदों का उदय हुआ।
- 3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि से जुड़ी सभी प्रमुख क्रियाओं—जुताई, बुआई, कटाई और मड़ाई का विस्तृत विवरण मिलता है, तथा इसी ग्रंथ में विदेह माधव की कथा के माध्यम से आर्यों के सदा नीरा (गंडक नदी) की ओर पूर्वी प्रसार का उल्लेख है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वैदिक सभ्यता और साहित्य भारतीय इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कालखंड है। ऋग्वैदिक काल मुख्यतः एक कबीलाई, पशुपालक और अर्द्ध-घुमक्कड़ समाज था जहाँ भूमि पर सामूहिक स्वामित्व था और राजा या पुरोहित को उपहार व दक्षिणा के रूप में गायें और घोड़े दिए जाते थे। उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व) तक आते-आते पश्चिम उत्तर प्रदेश और दोआब क्षेत्र में लोहे के व्यापक प्रयोग ने कृषि को स्थायी और उन्नत बना दिया, जिससे 'जन' जनपद में परिवर्तित हो गए। इस काल के ब्राह्मण ग्रंथों, विशेषकर शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों अवस्थाओं (जुताई, बुआई, कटाई, मड़ाई) का उल्लेख मिलता है तथा विदेह माधव की कथा के जरिए आर्य संस्कृति के गंडक नदी की घाटी तक विस्तार का प्रमाण मिलता है। अतः तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं।
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गुप्त साम्राज्य (Golden Age) के प्रशासनिक संगठन, आर्थिक व्यवस्था और सांस्कृतिक उपलब्धियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में सर्वोच्च न्यायिक शक्ति सम्राट के पास होती थी, और इस काल में पहली बार दीवानी (Civil) और फौजदारी (Criminal) कानूनों का स्पष्ट रूप से संहिताबद्ध (Codified) वर्गीकरण किया गया, जिसके अंतर्गत चोरी और साहूकारी से संबंधित नियमों को कठोर बनाया गया।
2. गुप्त सम्राटों ने इतिहास में सबसे अधिक मात्रा में स्वर्ण मुद्राएँ (दीनार) जारी कीं, किंतु कुषाण राजवंश की तुलना में इन गुप्त स्वर्ण मुद्राओं में शुद्ध सोने की मात्रा काफी कम थी और मिलावट का स्तर अधिक था, जो व्यापारिक पतन को दर्शाता है।
3. गुप्त प्रशासन में प्रांतीय शासन को 'भुक्ति' कहा जाता था, जिसके प्रमुख को 'उपरिक' कहा जाता था, और भुक्तियों का विभाजन 'विषय' (ज़िलों) में होता था, जिनका प्रशासन 'विषयपति' द्वारा चलाया जाता था जो स्थानीय नगरीय निकायों के साथ मिलकर कार्य करते थे।
4. गुप्त काल में बौद्ध धर्म के स्थान पर ब्राह्मण धर्म (भागवत धर्म) का अत्यधिक उत्थान हुआ, किंतु इसके बावजूद नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों को गुप्त शासकों द्वारा भारी राजकीय अनुदान प्रदान किया गया था ताकि बौद्ध दर्शन का भी प्रसार हो सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके स्वरूप के संबंध में विभिन्न ब्रिटिश एवं भारतीय इतिहासकारों द्वारा दिए गए मतों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. वी. डी. सावरकर - "यह सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम था।"
2. टी. आर. होम्स - "यह बर्बरता और सभ्यता के बीच का संघर्ष था।"
3. सर जॉन सीले - "यह केवल एक देशभक्तिहीन और स्वार्थी सैनिक विद्रोह था।"
4. लॉरेंस और सीले - "यह मुसलमानों का एक षड्यंत्र था जिसके तहत हिंदुओं को आगे किया गया था।"
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सुमेलित हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से लेकर सूरत विभाजन (1907) तक के कालखंड के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक उदारवादी (नरम दल) नेताओं का मुख्य विश्वास 'ब्रिटिश न्यायप्रियता' में था और उन्होंने औपनिवेशिक स्वराज (Colonial Self-Government) को संवैधानिक तरीकों से प्राप्त करने का लक्ष्य रखा था, किंतु उन्होंने कभी भी ब्रिटिश शासन के आर्थिक शोषण के सिद्धांत (Drain of Wealth) की खुली आलोचना नहीं की।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उग्रवादी (गरम दल) नेताओं—बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल और अरविंद घोष—ने इस आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखने के बजाय पूरे देश में 'स्वदेशी', 'बॉयकॉट' (बहिष्कार) और 'राष्ट्रीय शिक्षा' के रूप में फैलाने पर जोर दिया।
3. सूरत अधिवेशन (1907) में कांग्रेस के मंच से गरम दल के नेता रास बिहारी घोष को अध्यक्ष बनाने के प्रस्ताव को लेकर नरम दल और गरम दल के बीच तीव्र मतभेद उत्पन्न हो गए, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस में ऐतिहासिक विभाजन हो गया और संगठन पर नरमपंथियों का नियंत्रण स्थापित हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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गुप्त साम्राज्य और मौर्योत्तर काल के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्योत्तर काल में सातवाहन शासकों द्वारा बड़े पैमाने पर शुरू की गई भूमि-अनुदान (Land Grants) की प्रथा को गुप्त काल में धार्मिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी व्यापक विस्तार मिला, जिससे सामंतवाद (Feudalism) के अंकुर फूटे।
2. गुप्त काल में व्यापारिक गतिविधियों के प्रसार के फलस्वरूप तांबे के सिक्कों की तुलना में सोने के सिक्के (दीनार) अत्यधिक मात्रा में जारी किए गए, और गुप्त स्वर्ण सिक्कों में सोने की शुद्धता कुषाण काल के सिक्कों की तुलना में सर्वत्र सर्वोत्तम एवं अत्यधिक उच्च कोटि की थी।
3. गुप्तकालीन प्रांतीय प्रशासन में प्रांतों को 'भुक्ति' कहा जाता था, जिसके शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी को 'उपरिक' कहा जाता था, जबकि जिला प्रशासन को 'विषय' कहा जाता था और इसके प्रमुख अधिकारी को 'विषयपति' कहा जाता था।
4. मंदसौर प्रशस्ति अभिलेख में रेशम बुनकरों की एक ऐसी श्रेणी (Guild) का उल्लेख मिलता है जो लाट विषय (गुजरात) से प्रवास करके मंदसौर में बसी और अपनी पारंपरिक रेशम की कला को छोड़कर राजनीति तथा सेना में उच्च पदों पर आसीन हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विजयनगर में स्थानीय प्रशासन की "आयगार व्यवस्था" (Ayagar System) का संबंध किससे था?
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