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History of India
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वैदिक सभ्यता और साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में पुरोहितों को दक्षिणा के रूप में मुख्य रूप से गायें और घोड़े दिए जाते थे, जबकि कृषि भूमि के निजी स्वामित्व या उसके क्रय-विक्रय का कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिलता है।
- 2. उत्तर वैदिक काल में लोहे के व्यापक प्रयोग (कृष्ण अयस) के कारण कृषि अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई, जिससे 'जन' के स्थान पर बड़े क्षेत्रीय राज्यों या जनपदों का उदय हुआ और गोत्र व्यवस्था सामाजिक संस्था के रूप में स्थापित हुई।
- 3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि से जुड़ी सभी प्रमुख क्रियाओं—जुताई, बुआई, कटाई और मड़ाई का विस्तृत विवरण मिलता है, तथा इसी ग्रंथ में विदेह माधव की कथा के माध्यम से आर्यों के सदा नीरा (गंडक नदी) की ओर पूर्वward प्रसार का उल्लेख है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वैदिक काल भारतीय इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है। ऋग्वैदिक काल मुख्यतः कबीलाई और पशुपालक समाज था जहाँ भूमि पर सामूहिक स्वामित्व था और राजा को 'जनस्य गोपा' कहा जाता था। उत्तर वैदिक काल में लोहे की खोज और उसके प्रयोग से कृषि मुख्य आर्थिक आधार बन गई, जिससे स्थायी बस्तियों और जनपदों का विकास हुआ। शतपथ ब्राह्मण में कृषि कर्मकांडों के साथ-साथ गंडक नदी तक आर्य संस्कृति के विस्तार का प्रसिद्ध आख्यान मिलता है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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बंगाल विभाजन एवं उससे उत्पन्न स्वदेशी आंदोलन (1905) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा सर्वप्रथम जुलाई 1905 में की गई थी, और इसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया।
2. 16 अक्टूबर 1905 को जिस दिन बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, उस दिन पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, लोगों ने उपवास रखा, नंगे पाँव जुलूस निकाले और रवीन्द्रनाथ टैगोर के आह्वान पर एक-दूसरे की कलाई पर 'राखी बांधी' गई जो आपसी भाईचारे और एकता का प्रतीक बनी।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और आत्मनिर्भरता के नारे के तहत बंगाल में राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई, किंतु इस पूरे आंदोलन के दौरान मुस्लिम बहुसंख्यक वर्ग और मुस्लिम लीग ने शुरू से अंत तक इस आंदोलन में खुलकर बढ़-चढ़कर भाग लिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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छठी शताब्दी ईसा पूर्व के 'सोलह महाजनपद' और 'मगध साम्राज्य के उदय' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपद की सूची मिलती है, जिसमें मल्ल और वज्जी संघ जैसे महाजनपद राजतंत्रात्मक शासन प्रणाली के स्थान पर गणतांत्रिक (Republic) व्यवस्था के अंतर्गत संचालित होते थे।
2. मगध साम्राज्य के उत्कर्ष में उसकी भौगोलिक और सामरिक स्थिति की महत्वपूर्ण भूमिका थी; इसकी प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी एक सुरक्षित प्राकृतिक दुर्गीकृत घाटी में स्थित थी और बाद में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाए जाने से यह गंगा, सोन और गंडक नदियों के जलमार्गों के नियंत्रण के कारण व्यापार और सैन्य संचालन में सर्वोपरि हो गई।
3. हर्यक वंश के शासक बिम्बिसार (श्रेणिक) ने वैवाहिक संबंधों (जैसे कौशला देवी और चेलना से विवाह) और अंग राज्य के विजय के माध्यम से मगध की स्थिति को सुदृढ़ किया, किंतु उसके उत्तराधिकारी अजातशत्रु (कुणिक) ने वज्जी संघ को हराने के लिए कभी भी कूटनीतिक चालों या वसकार नामक मंत्री का सहयोग नहीं लिया था।
4. शिशुनाग वंश के संस्थापक शिशुनाग ने अवंती राज्य को मगध साम्राज्य में मिला लिया और मगध की प्रतिद्वंद्विता को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया, तथा बाद में नंद वंश के संस्थापक महापदमनंद ने 'एकराट' और 'सर्वक्षत्रान्तक' की उपाधि धारण करते हुए कलिंग सहित विशाल क्षेत्र पर अपना आधिपत्य स्थापित किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के वैचारिक आधार और उनके संस्थापकों/सुधारकों के दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) और 'ब्रह्म समाज' (1828) का मुख्य उद्देश्य मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद का खंडन करते हुए उपनिषदों के अद्वैतवादी वेदांत पर आधारित एकेश्वरवाद की स्थापना करना था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए पाश्चात्य संस्कृति और आधुनिक शिक्षा का पूर्णतः बहिष्कार किया तथा वेदों की अचूकता और infallibility को अस्वीकार कर दिया।
3. वर्ष 1875 मेंMadam Blavatsky और कर्नल ओल्काट द्वारा स्थापित 'थियोसोफिकल सोसाइटी' ने प्राचीन हिंदू धर्म, दर्शन, पुनर्जन्म और कर्म के सिद्धांतों को वैश्विक स्तर पर पुनर्जीवित करने का प्रयास किया और बाद में एनी बेसेंट के नेतृत्व में इसने भारत में तीव्र गति पकड़ी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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1857 के महान विद्रोह के विभिन्न केंद्रों और उन्हें दबाने वाले ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली - जॉन निकलसन और विलियम हडसन
2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और हेनरी लॉरेंस
3. कानपुर - सर कॉलिन कैंपबेल और जनरल हैवलॉक
4. झांसी और ग्वालियर - ह्यूरोज
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और ब्रिटिश विचारकों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध वक्तव्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. "यह राष्ट्रीय विद्रोह नहीं था, न ही यह प्रथम, न ही लोकप्रिय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।" — आर. सी. मजूमदार
2. "यह विशुद्ध रूप से एक सिपाही विद्रोह था, जिसके पीछे कोई देशभक्ति नहीं थी और न ही यह किसी सुनियोजित राष्ट्रीय षड्यंत्र का परिणाम था।" — सर जॉन सीले
3. "यह बर्बरता और सभ्यता के बीच का एक भयानक युद्ध था, जिसमें अंग्रेजों को क्रूरता से कुचलना आवश्यक था।" — टी. आर. होम्स
4. "यह धर्म का युद्ध था, जिसे अंग्रेजों के विरुद्ध मजहबी उन्माद के कारण लड़ा गया था।" — एल. ई. आर. रीस (L. E. R. Rees)
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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