BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
7 views

बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक संप्रदायों, संघ व्यवस्था तथा उनके ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बौद्ध धर्म के 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (प्रतीतसमुत्पाद) का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि प्रत्येक घटना या वस्तु किसी कारण और प्रत्यय से उत्पन्न होती है (इदं प्रत्ययता), जबकि जैन धर्म का 'स्याद्वाद' या 'सप्तभंगीनय' यह मानता है कि ज्ञान सापेक्ष होता है और किसी भी वस्तु के बारे में एक साथ अंतिम सत्य नहीं कहा जा सकता।
  2. 2. बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित की गई थी, जबकि चोर, हत्यारे, ऋणी, और दास (यदि वे अपने स्वामी से अनुज्ञा प्राप्त न कर सकें) को संघ में प्रवेश की अनुमति नहीं थी।
  3. 3. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार वस्त्र का त्याग करना अनिवार्य नहीं है, तथा उनके ग्रंथों में बारह अंगों और बारह उपांगों का संकलन मिलता है, जबकि दिगंबर संप्रदाय के अनुयायी पूर्ण मुक्ति के लिए वस्त्र त्याग को आवश्यक मानते हैं और उनका दावा है कि मूल चौदह पूर्व ग्रंथ लुप्त हो चुके हैं।
  4. 4. महात्मा बुद्ध ने अपने जीवनकाल में ही देवदत्त के कहने पर बौद्ध संघ का पूर्ण नियंत्रण उसे सौंप दिया था और संघ में महिलाओं के प्रवेश के लिए उन्होंने बिना किसी संकोच के प्रथम प्रयास में ही अपनी माता महाप्रजापति गौतमी को वैशाली में अनुमति दे दी थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि बौद्ध धर्म का 'प्रतीत्यसमुत्पाद' कारणता के नियम पर आधारित है और जैन धर्म का 'स्याद्वाद' (सप्तभंगीनय) ज्ञान की सापेक्षता को दर्शाता है। कथन 2 सही है क्योंकि बौद्ध संघ में संघ में प्रवेश (प्रब्ज्या) के लिए न्यूनतम आयु 15 वर्ष थी और सामाजिक तथा कानूनी अयोग्यताओं (जैसे चोर, दास, ऋणी) वाले व्यक्तियों को वर्जित किया गया था। कथन 3 सही है क्योंकि श्वेतांबर संप्रदाय श्वेत वस्त्र धारण करता है और उनके पास आगम साहित्य (12 अंग, 12 उपांग आदि) सुरक्षित हैं, जबकि दिगंबर संप्रदाय नग्नता को आवश्यक मानता है और प्राचीन पूर्व ग्रंथों के लुप्त होने का मत रखता है। कथन 4 गलत है क्योंकि बुद्ध ने देवदत्त को संघ का नियंत्रण कभी नहीं सौंपा था (देवदत्त ने संघ में फूट डालने का प्रयास किया था), तथा महिलाओं (महाप्रजापति गौतमी) के संघ में प्रवेश के लिए बुद्ध ने शुरुआत में मना कर दिया था और आनंद के विशेष अनुरोध पर वैशाली में कठोर शर्तों के साथ अनुमति दी थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Share:

Related Questions

प्रसिद्ध हास्य कवि "तेनालीराम रामकृष्ण" किसके दरबार की शोभा बढ़ाते थे? उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों के वैचारिक दृष्टिकोण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पुरोहितवाद की कड़ी आलोचना करते हुए एकेश्वरवाद और वेदों की अचूकता (अपौरुषेयता) को अपने धर्म का एकमात्र आधार बनाया था। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और मध्यकालीन पुराणों तथा पौराणिक हिंदू धर्म की रूढ़ियों को खारिज करते हुए शुद्धि आंदोलन के माध्यम से हिंदू धर्म से धर्मांतरित व्यक्तियों की वापसी का समर्थन किया। 3. केशव चंद्र सेन के ब्रह्म समाज से अलग होने के पश्चात आनंद मोहन बोस और शिवनाथ शास्त्री ने वर्ष 1878 में 'साधारण ब्रह्म समाज' की स्थापना की, जो ब्रह्म समाज के भीतर बाल विवाह और जातिगत भेदभाव जैसी सामाजिक कुरीतियों के प्रति अधिक कठोर और प्रगतिशील दृष्टिकोण रखता था। 4. प्रार्थना समाज की स्थापना वर्ष 1867 में बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर के सहयोग से की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित हुआ, और इस आंदोलन की शुरुआत के साथ ही महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' (Do or Die) का आह्वान किया था। 2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1939 में त्रिपुरी संकट के उपरांत कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने के बाद 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की स्थापना की थी, तथा वे भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के भीतर रहकर इस आंदोलन के मुख्य भूमिगत संचालक के रूप में कार्य कर रहे थे। 3. आज़ाद हिंद फौज (INA) की स्थापना मूल रूप से कैप्टन मोहन सिंह के प्रयासों से हुई थी, जिसे बाद में रास बिहारी बोस और सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में पुनर्गठित किया गया तथा सिंगापुर में 'अर्जी हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद' की स्थापना की गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (घोषणा पत्र) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के माध्यम से भारत का शासन सीधे ब्रिटिश महारानी के नाम पर कर दिया गया तथा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) का नया पद सृजित किया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (Council of India) का गठन किया गया। 2. इलाहाबाद (प्रयागराज) में 1 नवंबर 1858 को आयोजित एक भव्य दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ी गई क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में देशी रियासतों के राजाओं को आश्वस्त किया गया कि भविष्य में ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार नहीं किया जाएगा और उनकी दत्तक पुत्र लेने की अनुमति (गोद लेने के अधिकार) को मान्यता दी जाएगी। 3. इस घोषणा में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय प्रजा को नस्ल, जन्मस्थान, धर्म या रंग के भेदभाव के बिना योग्यता के आधार पर सभी सरकारी सेवाओं में समान अवसर देने का स्पष्ट वादा किया था, जिसे बाद में प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से पूरी तरह से अक्षरशः लागू कर दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? अहमदनगर के "निजामशाही वंश" का संस्थापक कौन था?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.