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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए प्रतिरोध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व संभाला और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी का प्रभावी ढंग से संचालन किया था।
- 2. 'फैजाबाद के मौलवी' के रूप में प्रसिद्ध अहमदुल्लाह शाह ने चिनहट के युद्ध (जुलाई 1857) में ब्रिटिश सेनापति हेनरी लॉरेंस की सेना को पराजित करने में रणनीतिक नेतृत्व प्रदान किया था और उन पर अंग्रेजों द्वारा इनाम घोषित किया गया था।
- 3. लखनऊ पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के अंतिम चरणों में ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजिमेंट की सैन्य सहायता ली थी, और पराजय के उपरांत बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, जिन्हें बाद में कलकत्ता निर्वासित कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 और 2 सही हैं। वर्ष 1857 के विद्रोह के समय अवध का विलय कुशासन के आधार पर कर दिया गया था, जिसके बाद बेगम हजरत महल ने अपने पुत्र बिरजिस कादिर को नवाब घोषित कर लखनऊ में क्रांति की कमान संभाली। मौलवी अहमदुल्लाह शाह (जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' भी कहा जाता है) ने अंग्रेजों के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया और चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को परास्त किया। कथन 3 गलत है क्योंकि बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया था, बल्कि वे पराजय के उपरांत नेपाल चली गईं जहाँ उन्होंने शरण ली, जबकि अहमदुल्लाह शाह को एक धोखेबाज स्थानीय राजा द्वारा अंग्रेजों के हाथों मरवा दिया गया था। अवध के इस विद्रोही इतिहास के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन, गांधी-इरविन समझौते और गोलमेज सम्मेलनों के घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1930 में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था क्योंकि महात्मा गांधी सहित कांग्रेस के शीर्ष नेता सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारण जेल में थे, किंतु इस सम्मेलन में मुस्लिम लीग, हिंदू महासभा और दलित वर्ग के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया था।
2. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने हिंसात्मक गतिविधियों में लिप्त कैदियों को छोड़कर अन्य सभी राजनीतिक बंदियों को तुरंत रिहा करने, सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई करने और समुद्र तट के समीप बिना कर दिए नमक बनाने की अनुमति देना स्वीकार किया था।
3. कराची अधिवेशन (1931) में सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता के दौरान कांग्रेस ने गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन किया तथा इसी अधिवेशन में पहली बार 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया गया था।
4. लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, किंतु डॉ. बी. आर. अंबेडकर द्वारा दलितों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorates) की मांग पर उत्पन्न तीव्र गतिरोध के कारण यह सम्मेलन बिना किसी ठोस राजनीतिक समझौते के समाप्त हो गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप और उसके मूल्यांकन के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों के कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. "यह न तो पहला, न ही राष्ट्रीय, और न ही स्वतंत्रता संग्राम था" - डॉ. आर.सी. मजूमदार
2. "यह सुनियोजित तरीके से लड़ा गया भारत का प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम था" - वी.डी. सावरकर
3. "यह विद्रोह केवल एक सिपाही विद्रोह था, जिसका राष्ट्रीयता से कोई दूर-दूर तक संबंध नहीं था" - सर जॉन सीले
4. "यह धर्म का अंधा युद्ध था जो कि बर्बरता और सभ्यता के बीच का संघर्ष था" - टी.आर. होम्स
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-कौन से सही सुमेलित हैं?
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की नगर योजना, वास्तुकला और जल प्रबंधन प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस सभ्यता के अधिकांश नगर सामान्यतः दो भागों में विभाजित थे — पश्चिमी भाग जो ऊँचा होता था (जिसे 'दुर्ग' या 'सिटाडेल' कहा जाता था) और पूर्वी भाग जो बड़ा होता था तथा सामान्य नागरिकों के लिए आवास क्षेत्र था, किंतु 'धोलावीरा' एक ऐसा विशिष्ट नगर था जो दो के स्थान पर तीन भागों (किल्ला, मध्यम नगर और निचला नगर) में विभाजित था।
2. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नानागार' (Great Bath) के निर्माण में जल के रिसाव को रोकने के लिए ईंटों के बीच बिटुमिन (तारकोल) या जिप्सम की परतों का प्रयोग किया गया था, और इसका मुख्य उपयोग धार्मिक अनुष्ठानों या सार्वजनिक स्नान के लिए किया जाता था।
3. सिंधु घाटी सभ्यता के लगभग सभी प्रमुख नगरों में घरों के गंदे पानी की निकासी के लिए सड़कों के किनारे ढकी हुई नालियों की उत्तम व्यवस्था थी, तथा हर घर का गड़ा हुआ जलमार्ग मुख्य सड़क की ढकी हुई नालियों से जुड़ने से पहले रास्ते में एक छोटे 'सोक पिट' (हौज या सेप्टिक टैंक) से होकर गुजरता था ताकि कचरा नीचे बैठ सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सेना में नई एनफील्ड राइफल (Enfield Rifle) के 도입 से पूर्व पुरानी ब्राउन बैस बंदुक के स्थान पर जिस नई राइफल को शामिल किया गया था, उसके कारतूसों के आवरण को खोलने के लिए दाँतों से खींचना पड़ता था, जिसमें गाय और सूअर की चर्बी होने की अफ़वाह ने भारतीय सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया।
2. चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरोध में सर्वप्रथम असंतोष की चिंगारी जनवरी 1857 में दमदम छावनी में भड़की, जहाँ के लसकारों ने नए कारतूसों का प्रयोग करने से साफ इंकार कर दिया था।
3. बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को अपने सहपाठियों को उकसाते हुए ब्रिटिश अधिकारियों ह्यूसन और बाग पर गोली चलाकर उनकी हत्या कर दी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 10 अप्रैल 1857 को निर्धारित तिथि से पहले ही फाँसी दे दी गई।
4. बैरकपुर की इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश प्रशासन ने अनुशासनहीनता के आरोप में 34वीं और 19वीं नेटिव इन्फैंट्री रेजिमेंट को औपचारिक रूप से भंग कर दिया, जिससे संपूर्ण बंगाल आर्मी के सैनिकों में कंपनी शासन के प्रति आक्रोश चरम पर पहुँच गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में बंगाल प्रेसीडेंसी के सेना मुख्यालय में पुरानी 'ब्राउन बैस' मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में सुअर और गाय की चर्बी से बने ग्रीस के प्रयोग होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी धार्मिक आक्रोश उत्पन्न किया था।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के आदेश के विरुद्ध खुलकर विद्रोह कर दिया और अपने ब्रिटिश अधिकारियों—सर्जेंट ह्यूग बाथर्स्ट और लेफ्टिनेंट बॉग—पर आक्रमण कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया था।
3. मंगल पांडे को गिरफ्तार किए जाने के बाद ब्रिटिश सैन्य अदालत (कोर्ट-मार्शल) द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए 8 अप्रैल 1857 को बैरकपुर में उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई, जो आगे चलकर संपूर्ण उत्तर भारत में विद्रोह की चिंगारी का मुख्य तात्कालिक उत्प्रेरक बना।
4. इस घटना के तुरंत बाद मेरठ छावनी में 10 मई 1857 को 3rd लाइट कैवलरी के सिपाहियों ने नए कारतूसों को छूने से इंकार कर दिया, जिन्हें कोर्ट-मार्शल द्वारा कठोर सजा देकर जेल भेज दिया गया था, और इसके विरोध में अगले दिन सैनिकों ने विद्रोह कर दिल्ली की ओर कूच कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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