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History of India
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वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में स्थापित 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) और इसके क्रांतिकारी कार्यक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस संगठन के गठन में चंद्रशेखर आजाद, भगवती चरण बोहरा और सुखदेव थापर की प्रमुख भूमिका थी, तथा इसका मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ की तर्ज पर समाजवादी विचारों के आधार पर भारत में 'संघीय गणराज्य' की स्थापना करना था।
- 2. ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जे.पी. सांडर्स की हत्या (लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने हेतु) और वर्ष 1929 की केंद्रीय विधानसभा बम कांड जैसी घटनाओं को अंजाम देने में इसी संगठन के क्रांतिकारियों ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
- 3. भगवती चरण बोहरा द्वारा रचित प्रसिद्ध दस्तावेज 'द फिलॉसफी ऑफ द बॉम्ब' (बम का दर्शन) ने क्रांतिकारियों की हिंसात्मक कार्यवाहियों का पुरजोर समर्थन करते हुए यह स्पष्ट किया कि हिंसा ही केवल ब्रिटिश साम्राज्यवाद को उखाड़ फेंकने का एकमात्र साधन है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 और 2 सही हैं। वर्ष 1928 में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन कर इसे 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) नाम दिया गया, जिसमें समाजवाद का स्पष्ट प्रभाव था। लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज से हुई मृत्यु का बदला लेने के लिए 17 दिसंबर 1928 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने सॉंडर्स की हत्या की थी। कथन 3 गलत है क्योंकि भगवती चरण बोहरा द्वारा लिखित 'द फिलॉसफी ऑफ द बॉम्ब' में हिंसा को पूरी तरह से अंधाधुंध या एकमात्र साधन के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया, बल्कि यह स्पष्ट किया गया कि बम और पिस्तौल का उद्देश्य क्रांति का प्रचार करना और जनता को जागरूक करना था। इस संगठन के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, 'मलिक काफूर' के दक्षिण अभियानों तथा 'अलाउद्दीन खिलजी' की बाजार नियंत्रण प्रणाली के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा दक्षिण भारत के राज्यों (देवगिरी, वारंगल, होयसल और पाण्ड्य) पर विजय प्राप्त करने के लिए भेजे गए मलिक काफूर ने सबसे पहले वारंगल के काकतीय शासक प्रतापरुद्रदेव द्वितीय को पराजित किया था और वहीं से विश्व प्रसिद्ध 'कोहिनूर हीरा' प्राप्त किया था।
2. अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण प्रणाली को सख्ती से लागू करने के लिए 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' नामक नए अधिकारियों की नियुक्ति की थी, जिनका मुख्य कार्य वस्तुओं के मूल्य निर्धारित करना और जमाखोरों पर कड़ी नजर रखना था।
3. बाजार में अन्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अलाउद्दीन ने ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्यान्न की बिक्री पर प्रतिबंध लगाते हुए यह अनिवार्य कर दिया था कि सुल्तान के भंडार गृहों के लिए सीधे किसानों से राजस्व के रूप में अनाज वसूला जाए।
4. अलाउद्दीन खिलजी ने अपने साम्राज्य में शराब और नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था, किंतु शाही दरबारियों और उच्च कुलीन वर्ग के लिए निजी आवासों में शराब पीने की सीमित छूट प्रदान की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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तुर्की भाषा में लिखी गई "बाबरनामा" का फारसी में अनुवाद किसने किया था?
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इंदौर में "होल्कर" वंश की नींव किसने रखी थी?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में वर्धन राजवंश और दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की प्रशासनिक, सैन्य और स्थापत्य विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के समय कन्नौज की सभा में महायान बौद्ध मत के प्रचार-प्रसार और चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में एक विशाल धार्मिक सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें नालंदा महाविहार के विद्वानों के साथ-साथ अनेक राजाओं ने भाग लिया था।
2. बादामी के चालुक्य वंश के प्रसिद्ध शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका विस्तृत विवरण हमें एहोल शिलालेख में मिलता है जिसकी रचना रविचर्ति ने की थी।
3. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम (मामल्ल) ने वातापी पर अधिकार कर लिया था और 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी, तथा महाबलीपुरम में प्रसिद्ध रथ मंदिरों (सप्त पगोडा) का निर्माण कार्य उसी के शासनकाल में प्रारंभ हुआ था।
4. चोल प्रशासन के संदर्भ में 'उर' साधारण ग्रामवासियों की सभा थी, 'सभा' या 'अग्रहार' मुख्य रूप से ब्राह्मणों की बस्तियों की सभा थी, और 'नगरम्' व्यापारियों और दुकानदारों के निगम (व्यापारिक संगठन) की स्थानीय संस्था थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल में चीनी यात्री ह्वेनसांग भारत आया था, जिसने कन्नौज में आयोजित भव्य धर्मसभा की अध्यक्षता की थी, और हर्षवर्धन ने 'शीलदित्य' की उपाधि धारण करने के साथ-साथ 'नागानंद', 'रत्ननावली' और 'प्रियदर्शिका' जैसे संस्कृत नाटकों की रचना की थी।
2. बादामी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी کے तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसका सजीव वर्णन कालिदास की प्रसिद्ध रचना 'हर्षचरित' में मिलता है।
3. पल्लव वंश के शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी पर अधिकार कर लिया था और 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण की थी, तथा इसी के शासनकाल में ह्वेनसांग ने पल्लव की राजधानी कांची की यात्रा की थी।
4. चोल शासक राजराजा प्रथम ने तंजावुर में प्रसिद्ध 'राजराजेश्वर' (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण करवाया था, जो द्रविड़ वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है और पूरी तरह से भगवान विष्णु को समर्पित है。
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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