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History of India
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तुर्की भाषा में लिखी गई "बाबरनामा" का फारसी में अनुवाद किसने किया था?

Detailed Explanation

अब्दुल रहीम खान-ए-खाना ने इसका फारसी में अनुवाद किया था।
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और विशेषकर मनसबदारी तथा जागीरदारी प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर द्वारा आरंभ की गई मनसबदारी व्यवस्था में 'जात' पद से अधिकारी के व्यक्तिगत वेतन और पद-प्रतिष्ठा का बोध होता था, जबकि 'सवार' पद से उसे अपने अधीन रख-रखाव वाले घुड़सवार सैनिकों की संख्या का ज्ञान होता था। 2. जहाँगीर के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में एक नया संशोधन करते हुए 'दु-अस्पा सिह-अस्पा' प्रणाली जोड़ी गई, जिसके अंतर्गत कुछ विशेष मनसबदारों को बिना अपने 'जात' पद को बढ़ाए हुए अतिरिक्त 'सवार' पद रखने की अनुमति दी जाती थी। 3. शाहजहाँ के शासनकाल में जागीर संकट (Jagirdari Crisis) अपने चरम पर पहुँच गया था, क्योंकि खालसा भूमि के क्षेत्रफल में अप्रत्याशित वृद्धि होने के कारण अमीरों को वेतन के बदले जागीरें आवंटित करने के लिए पर्याप्त भूमि (पैबाकी) उपलब्ध नहीं थी। 4. औरंगजेब के अंतिम वर्षों के दौरान दक्कन अभियानों के विस्तार के कारण जागीरों की भारी कमी हो गई थी, जिसे इतिहास में 'बेजागीरी' की स्थिति कहा जाता है और यह मुगल साम्राज्य के प्रशासनिक पतन का एक प्रमुख आंतरिक कारण बना। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक स्वरूप का विश्लेषण करते हुए निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रसिद्ध इतिहासकार सर जॉन सीले ने 1857 के विद्रोह को 'पूरी तरह से देशभक्तिहीन और स्वार्थी सिपाही विद्रोह' करार दिया था, जिसका समर्थन करते हुए सर जॉन लॉरेنس ने इसे केवल एक सैनिक असंतोष माना। 2. बेंजामिन डिजरायली ने ब्रिटिश संसद में इस घटना को केवल एक साधारण सिपाही विद्रोह न मानकर इसे 'राष्ट्रीय विद्रोह' (National Revolt) की संज्ञा दी थी। 3. मार्क्सवादी इतिहासकार एस.एन. सेन ने अपनी अधिकृत सरकारी रिपोर्ट '१८५७' में यह निष्कर्ष निकाला कि यह विद्रोह प्रारंभ में राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए एक सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र के रूप में शुरू हुआ था, जो बाद में प्रतिक्रियावादी सामंती ताकतों के हाथों में चला गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के समय दिल्ली में विद्रोही सैनिकों और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के मध्य प्रशासनिक समन्वय तथा सत्ता के वास्तविक स्वरूप के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पहुँचने पर वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने तुरंत उत्साहपूर्वक इस विद्रोह का नेतृत्व स्वीकार कर लिया और अपनी व्यक्तिगत देखरेख में एक सुदृढ़ सैन्य रणनीति तैयार की। 2. दिल्ली में विद्रोह के सुचारू संचालन के लिए एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (प्रशासनिक न्यायालय) का गठन किया गया था, जिसमें नागरिक और सैन्य दोनों सदस्य शामिल थे, किंतु इसके अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय सम्राट की व्यक्तिगत अनुमति के बिना लिए जाते थे। 3. विद्रोही सैनिकों में अनुशासनहीनता, वित्तीय संकट और प्रशासनिक नियंत्रण के अभाव के कारण बहादुर शाह जफर की स्थिति एक नाममात्र के प्रतीक से अधिक नहीं रह गई थी, और वे सैनिकों की मनमानी पर प्रभावी अंकुश लगाने में असमर्थ थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34), गांधी-इरविन समझौता और गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1930 में प्रारंभ हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम चरण के दौरान महात्मा गांधी ने दांडी मार्च के माध्यम से नमक कानून तोड़ा, जिसके उपरांत ब्रिटिश सरकार द्वारा आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग लिया था। 2. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते (दिल्ली समझौते) के तहत सरकार ने हिंसात्मक अपराधियों को छोड़कर सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने और समुद्र तट के पास लोगों को नमक बनाने की अनुमति देने पर सहमति व्यक्त की थी। 3. कराची में आयोजित कांग्रेस के विशेष अधिवेशन (1931) में गांधी-इरविन समझौते को अनुमोदित किया गया, जिसकी अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी और इसी अधिवेशन में कांग्रेस ने 'मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम' से संबंधित ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया था। 4. डॉ. भीमराव अंबेडकर ने तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया था, जबकि महात्मा गांधी ने केवल तृतीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, वास्तुकला और उसके सामाजिक-आर्थिक पहलुओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हड़प्पा सभ्यता की अधिकांश बस्तियों में नगर दो भागों में विभाजित थे - पश्चिमी भाग जो छोटा किंतु ऊँचा (दुर्ग या गढ़ी) होता था, और पूर्वी भाग जो बड़ा किंतु सामान्य धरातल पर बसा आवासीय क्षेत्र होता था, अपितु 'धोलावीरा' इसका एक अपवाद है जो त्रि-स्तरीय (तीन भागों) विभाजित था। 2. सिंधु घाटी सभ्यता की ईंटों का सामान्य अनुपात मानक रूप से 1:2:4 (मोटाई : चौड़ाई : लंबाई) था और अधिकांश बस्तियों में अलंकृत ईंटों का प्रयोग केवल मंदिरों और सार्वजनिक स्नागारों के फर्श निर्माण में किया जाता था। 3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नागार' (Great Bath) के निर्माण में जल रिसाव को रोकने के लिए ईंटों के जोड़ों के बीच बिटुमिन (डामर) की परत का उपयोग किया गया था, और इसके उत्तर तथा दक्षिण में सीढ़ियाँ बनी हुई थीं। 4. सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे (अयस) और तांबे दोनों धातुओं से पूर्णतः परिचित थे, और उन्होंने रक्षात्मक हथियारों के बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए लोहे का ही सबसे अधिक उपयोग किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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