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History of India
Asked 2 months ago · Viewed 14 times

वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय के लिए उत्तरदायी राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. लॉर्ड डलहौजी के 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) के तहत जहाँ सतारा, नागपुर और झाँसी का विलय किया गया, वहीं वर्ष 1856 में अवध का विलय नवाब वाजिद अली शाह पर कुशासन (Misgovernance) का झूठा आरोप लगाकर किया गया था, जिससे अवध के सैनिक जो सेना का मुख्य आधार थे, अत्यंत आहत हुए।
  2. 2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के परिणामस्वरूप पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और वस्त्र उद्योगों का पतन हुआ, जिससे कारीगरों और बुनकरों की आजीविका छिन गई, जबकि अंग्रेजों द्वारा थोपी गई कठोर भू-राजस्व प्रणालियों ने किसानों को साहूकारों और महाजनों के चंगुल में फँसा दिया।
  3. 3. वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) के माध्यम से पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकार के प्राचीन हिंदू कानूनों में संशोधन किया गया, जिसके तहत धर्म परिवर्तन कर ईसाई बनने वाले व्यक्ति को पैतृक संपत्ति से वंचित न रखने का प्रावधान किया गया, जिसे भारतीयों ने धर्म परिवर्तन का षड्यंत्र माना।
  4. 4. सेना के भीतर नस्लीय भेदभाव, भारतीय सिपाहियों को यूरोपीय सैनिकों की तुलना में अत्यंत कम वेतन और भत्ते मिलना, तथा वर्ष 1856 के 'सामान्य सेवा Enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) द्वारा नए रंगरूटों के लिए समुद्र पार सेवा देना अनिवार्य करना, विद्रोह के तात्कालिक और दीर्घकालिक कारणों में शामिल थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के महान विद्रोह के पीछे कोई एक तात्कालिक कारण नहीं था, बल्कि यह राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक और सैन्य कारणों का एक विस्फोटक परिणाम था। राजनीतिक कारणों में लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति और 1856 में अवध का कुशासन के आधार पर विलय शामिल था, जिससे अवध के हजारों सिपाही और पारंपरिक अभिजात वर्ग बेरोजगार हो गए। आर्थिक नीतियों ने भारतीय हस्तशिल्प को नष्ट कर दिया और किसानों को ऋण के जाल में फँसा दिया। सामाजिक और धार्मिक क्षेत्र में 1850 के धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम और 1856 के सामान्य सेवा अधिनियम ने रूढ़िवादी भारतीयों की धार्मिक भावनाओं को सीधे तौर पर आहत किया। अतः सभी कथन पूर्णतः सही हैं।
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Related Questions

→ वर्ष 1857 के महान विद्रोह के स्वरूप और इसके ऐतिहासिक मूल्यांकन के संदर्भ में, विभिन्न इतिहासकारों द्वारा दिए गए निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वी. डी. सावरकर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस विद्रोह को सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम के रूप में वर्णित किया था। 2. डॉ. एस. एन. सेन ने अपनी कृति 'एटी फिफ्टी सेवन' (1857) में यह निष्कर्ष निकाला था कि यह विद्रोह तथाकथित पहला राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो पहला था, न ही राष्ट्रीय था और न ही स्वतंत्रता संग्राम था। 3. बेंजमिन डिजरायली ने ब्रिटिश संसद में यह तर्क दिया था कि 1857 की घटना महज एक 'सिपाही विद्रोह' (Sepoy Mutiny) नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय विद्रोह या स्वतंत्रता के लिए व्यापक जन-असन्तोष था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए घटनाक्रम तथा वहाँ के प्रमुख नेतृत्वकर्ताओं—बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अवध के नवाब वाजिद अली शाह को कुशासन के आधार पर अपदस्थ किए जाने के पश्चात बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह की बागडोर संभाली और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी का नेतृत्व किया। 2. 'फैजाबाद के डंका शाह' के रूप में प्रसिद्ध मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने रोहिलखंड और अवध के सीमावर्ती क्षेत्रों में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया तथा चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेनाओं को पराजित करने में रणनीतिक भूमिका निभाई। 3. लखनऊ पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल और जनरल आउट्राम ने गोरखा रेजिमेंट की सहायता ली, और पराजय के उपरांत बेगम हजरत महल ने नेपाल की तराई में शरण ली जहाँ वर्ष 1879 में उनका निधन हो गया, जबकि अहमदुल्लाह शाह को धोखे से मार दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'गदर पार्टी' और इसके क्रांतिकारी अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गदर पार्टी की स्थापना 'सोहन सिंह भकना' द्वारा की गई थी और इसके साप्ताहिक पत्र 'गदर' का प्रकाशन मुख्य रूप से उर्दू, पंजाबी, गुजराती और पश्तो जैसी विभिन्न भाषाओं में किया जाता था ताकि विभिन्न पृष्ठभूमि के प्रवासियों तक इसे पहुँचाया जा सके। 2. लाला हरदयाल इस आंदोलन के प्रमुख बुद्धिजीवियों और संस्थापकों में से एक थे, जिन्होंने 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसका मुखपत्र बाद में 'गदर' के रूप में प्रसिद्ध हुआ। 3. प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ होने पर गदर पार्टी के अधिकांश क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह करने के लिए विदेशों से भारत लौटने का आह्वान किया, जिसे 'गदर षड्यंत्र' (Ghadar Mutiny) के रूप में जाना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → मुगलकालीन प्रशासनिक और सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अकबर द्वारा प्रशासनिक सुधारों के तहत शुरू की गई 'मनसबदारी व्यवस्था' आंशिक रूप से मंगोलों की दशमलव पद्धति पर आधारित थी, जिसमें प्रत्येक मनसबदार को अपने पद के अनुसार 'जात' (व्यक्तिगत पद और वेतन) और 'सवार' (घुड़सवार सैनिकों की संख्या) का निर्धारण करना होता था। 2. जहांगीर के शासनकाल में चित्रकला अपने स्वर्ण युग पर थी, और इसी काल में नूरजहाँ ने एक शक्तिशाली राजनीतिक गुट ('जहाँगीर गुट' या ज्यूरी) का निर्माण किया था, जिसमें उनके पिता इत्तिमद उद्दौला और भाई आसफ खान शामिल थे। 3. शाहजहाँ के शासनकाल में स्थापत्य कला ने चरम सीमा को छुआ, किंतु इस काल में बर्नियर और ट्रैवर्नीयर जैसे विदेशी यात्रियों ने यह उल्लेख किया कि साम्राज्य की अत्यधिक केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था और कृषि पर बढ़ते राजस्व बोझ के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो गई थी। 4. औरंगजेब द्वारा पुनः 'जिजिया' कर लगाया जाना तथा मंदिरों को तोड़ने की उसकी नीति केवल धार्मिक असहिष्णुता का परिणाम थी, और इस काल में मुगल साम्राज्य का कुल क्षेत्रफल अपने न्यूनतम स्तर पर आ गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → मुगल काल में "खुलासत-उत-तवारीख" के लेखक कौन हैं? → महाभारत का फारसी अनुवाद "रज़्मनामा" किसके निर्देशन में किया गया था?
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